Surya Grahan 2026: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण इस दिन लगेगा, जानिए भारत में सूतक काल और किन 4 राशियों पर पड़ेगा भारी असर

सूर्य ग्रहण एक बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी के महीने में लगा था, जबकि दूसरा और इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण पवित्र सावन मास की हरियाली अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क (Kark Rashi) में लगेगा, जिसके चलते देश और दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों पर इसका विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। इस ग्रहण की सबसे खास बात यह है कि इस दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु एक ही राशि यानी कर्क में मौजूद रहेंगे, जिससे एक शक्तिशाली 'चतुर्ग्रही योग' का निर्माण होगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण कब लगेगा, भारत में इसका सूतक मान्य होगा या नहीं और किन 4 राशियों के लिए यह समय थोड़ा चुनौतीभरा हो सकता है।
साल के अंतिम सूर्य ग्रहण की तारीख और सही समय
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से शुरू होकर रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, मुख्य रूप से श्रावण अमावस्या 12 अगस्त को ही मनाई जाएगी और इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा।
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ग्रहण का आरंभ: भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा।
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ग्रहण का मोक्ष (समापन): इसका समापन 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।
क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल?
ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले ही प्रभावी हो जाता है। इस गणित के हिसाब से सूतक काल सुबह 09:04 बजे से शुरू होना चाहिए था, लेकिन राहत की बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा (नजर नहीं आएगा)। वैज्ञानिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जो ग्रहण किसी देश विशेष में दिखाई नहीं देता, वहां उसका सूतक काल और धार्मिक पाबंदियां मान्य नहीं होती हैं। इसलिए भारत में रहने वाले लोगों को सूतक काल के नियमों को लेकर चिंतित होने की कोई आवश्यकता नहीं है।
इन 4 राशियों के जातकों को रहना होगा सबसे ज्यादा सतर्क
भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में न दिखाई दे और इसका सूतक यहां मान्य न हो, लेकिन ग्रहों की चाल और चतुर्ग्रही योग के प्रभाव के कारण सभी राशियों पर इसका सूक्ष्म असर जरूर पड़ेगा। ज्योतिषीय आकलन के मुताबिक, यह सूर्य ग्रहण मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों के लिए थोड़ा मुश्किल और संघर्षपूर्ण साबित हो सकता है। इन चारों राशियों के लोगों को 12 अगस्त से लेकर अगले 6 महीनों यानी 12 जनवरी तक बहुत अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
इन राशि के जातकों को इस अवधि के दौरान निम्नलिखित सावधानियां रखनी चाहिए:
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सेहत और मानसिक स्थिति: अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखें, गुप्त बीमारियां या पुराना तनाव उभर सकता है।
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करियर और मान-सम्मान: कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों से वैचारिक मतभेद या अपयश का सामना करना पड़ सकता है, अतः संयम से काम लें।
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आर्थिक मामले: धन हानि, संपत्ति या जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने विवाद तूल पकड़ सकते हैं, इसलिए बिना सोचे-समझे कहीं भी बड़ा निवेश करने से बचें।
सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के अचूक उपाय
यदि आपकी भी राशि इनमें से एक है और आप किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं:
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मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों को 12 अगस्त से लेकर अगले 6 महीनों तक नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
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सावन के हर सोमवार के दिन विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
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महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सभी प्रकार के ग्रह दोष, कष्ट और संकट दूर होते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।