Zuckerberg का बड़ा धमाका Meta ने लॉन्च किया Muse Spark AI, क्या अब फीकी पड़ जाएगी ChatGPT और Gemini की चमक?

News India Live, Digital Desk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की रेस में अब तक पिछड़ती दिख रही मेटा ने एक ऐसा दांव खेला है जिसने पूरी टेक इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है। मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने आधिकारिक तौर पर अपने नए और बेहद शक्तिशाली AI मॉडल ‘Muse Spark’ को लॉन्च करने की घोषणा कर दी है। यह नया मॉडल न केवल गणित और विज्ञान के जटिल रहस्यों को सुलझाने में सक्षम है, बल्कि यह वेबसाइट बनाने से लेकर गेमिंग की दुनिया तक में क्रांति लाने का दम रखता है।सुपरइंटेलिजेंस की ओर मेटा का पहला कदममेटा की ‘सुपरइंटेलिजेंस लैब्स’ द्वारा तैयार किया गया यह मॉडल Muse सीरीज़ का पहला हिस्सा है। जुकरबर्ग ने इसे ‘स्केलिंग लैडर’ का पहला पायदान बताया है। Muse Spark को विशेष रूप से रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। चाहे आपको खाने की फोटो देखकर उसकी कैलोरी पता करनी हो या किसी कमरे को री-डिजाइन करने के लिए वर्चुअल सलाह चाहिए हो, यह AI आपकी आंखों की तरह देख और समझ सकता है।ChatGPT और Gemini के लिए खतरे की घंटी?अब तक बाजार में OpenAI का ChatGPT और गूगल का Gemini अपना दबदबा बनाए हुए थे, लेकिन Muse Spark ने अपनी ‘रीजनिंग’ (तर्क करने की क्षमता) से सबको चौंका दिया है। मेटा ने इसमें एक खास ‘Contemplating Mode’ पेश किया है, जो एक साथ कई AI एजेंट्स को सक्रिय कर देता है। यह फीचर इसे गूगल के Gemini Deep Think और OpenAI के GPT Pro जैसे दिग्गजों के समकक्ष खड़ा करता है। सबसे खास बात यह है कि मेटा के पास फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप के रूप में 3.5 अरब से ज्यादा यूजर्स का आधार है, जो इसे किसी भी अन्य कंपनी से ज्यादा शक्तिशाली बनाता है।ऐप्स में दिखेगा Muse Spark का जादूमेटा ने स्पष्ट किया है कि Muse Spark केवल एक वेब टूल नहीं रहेगा। आने वाले हफ्तों में इसे वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और फेसबुक मैसेंजर के साथ-साथ मेटा के AI स्मार्ट ग्लासेस में भी इंटीग्रेट किया जाएगा। इसका मतलब है कि आप चलते-फिरते अपने चश्मे से ही किसी भी वस्तु की जानकारी ले सकेंगे या सोशल मीडिया पर अपनी पसंद के अनुसार कंटेंट क्यूरेट करवा सकेंगे।ओपन सोर्स बनाम प्रोपराइटरी: जुकरबर्ग का बदला रुख?दिलचस्प बात यह है कि हमेशा ‘ओपन सोर्स’ AI की वकालत करने वाले मार्क जुकरबर्ग ने Muse Spark को फिलहाल ‘प्रोपराइटरी’ रखा है। यानी इसका एक्सेस फिलहाल मेटा के अपने प्लेटफॉर्म्स और चुनिंदा पार्टनर्स के लिए ही उपलब्ध होगा। हालांकि, कंपनी ने भविष्य में इस परिवार के कुछ मॉडल्स को ओपन सोर्स करने का वादा भी किया है। अब देखना यह होगा कि क्या मेटा का यह ‘म्यूज’ वाकई में AI की दुनिया का नया बादशाह बन पाएगा?