Teaching honesty : क्या बच्चे आज भी इतने सच्चे हैं? पश्चिम बंगाल के इस Honesty Store की कहानी आपका दिन बना देगी

News India Live, Digital Desk: आज के दौर में जब हम एक छोटी सी चीज पर भी नज़र रखने के लिए चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगा देते हैं, तो क्या आप यकीन करेंगे कि कहीं कोई ऐसी दुकान भी हो सकती है जो सिर्फ भरोसे पर चलती हो? सच कहूं तो सुनकर थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के एक स्कूल ने इस बात को सच साबित कर दिया है।इस स्कूल ने बच्चों के भीतर नैतिकता और सच्चाई का बीज बोने के लिए एक ‘ऑनेस्टी स्टोर’ (Honesty Store) शुरू किया है। ये कोई ऐसी-वैसी दुकान नहीं है, बल्कि बच्चों के चरित्र को परखने और निखारने की एक बहुत ही प्यारी कोशिश है।न कैमरा, न चौकीदार सिर्फ बच्चों का ज़मीरइस दुकान की सबसे खास बात ये है कि यहां सामान बेचने के लिए कोई दुकानदार नहीं बैठता। बच्चों को पेन, पेंसिल, कटर या रबर जैसी जो भी चीज चाहिए होती है, वो वहां से उठाते हैं, उसकी कीमत चेक करते हैं और पास रखे एक बॉक्स में चुपचाप पैसे डाल देते हैं। न वहां कोई देख रहा होता है और न ही किसी तरह का कोई पहरा है।सब कुछ बच्चों की अपनी ईमानदारी पर छोड़ दिया गया है। ये कदम ये देखने के लिए उठाया गया है कि जब कोई देख नहीं रहा हो, तब भी क्या हमारे बच्चे सही रास्ते पर चलते हैं?बचपन में ईमानदारी का पाठस्कूल प्रशासन का मानना है कि किताबों का ज्ञान तो बच्चों को कहीं भी मिल जाएगा, लेकिन असल शिक्षा वही है जो इंसान को अंदर से मज़बूत और ईमानदार बनाए। इस ऑनेस्टी स्टोर के ज़रिए बच्चों को ये समझ आ रहा है कि ईमानदारी किसी के डर से नहीं, बल्कि अपने अंदर से होनी चाहिए।उत्तर 24 परगना जिले के इस स्कूल में बच्चे इस ज़िम्मेदारी को बहुत अच्छे से निभा रहे हैं। वे उतने ही पैसे डालते हैं जितने का उन्होंने सामान लिया होता है। ये छोटी सी पहल सिखाती है कि अगर हम बच्चों पर भरोसा करें, तो वे कभी निराश नहीं करते।हम सबके लिए एक बड़ी सीख (A Lesson For Everyone)आज जब समाज में विश्वास की कमी होती जा रही है, पश्चिम बंगाल के इस छोटे से स्कूल की कहानी हम सबको एक बड़ा सबक देती है। ये उन माता-पिता और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा है जो सोचते हैं कि बच्चों को सुधारने के लिए सिर्फ सख्ती की ज़रूरत है। कभी-कभी प्यार और भरोसा बच्चों को बहुत बड़ा बना देता है।सच में, अगर हमारे हर स्कूल में इस तरह के छोटे-छोटे ‘ईमानदारी के प्रयोग’ होने लगें, तो शायद आने वाला कल बहुत खूबसूरत होगा। आपका इस ‘ऑनेस्टी स्टोर’ के बारे में क्या कहना है? क्या हमारे घरों में भी ऐसे भरोसे वाली बात होनी चाहिए?