विदेश

Trump-Iran Peace Deal: ट्रंप का दावा- वीकेंड पर साइन होगा समझौता, लेकिन ईरान के रुख ने खड़ा किया बड़ा सस्पेंस

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चल रहे भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के साथ चल रही जंग को पूरी तरह खत्म कर दिया है और ईरान ने भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार न बनाने की उनकी सबसे बड़ी शर्त को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, इस पूरे मामले में पेंच यह है कि ईरान की तरफ से अभी तक ऐसे किसी भी वादे या शांति समझौते की आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है।

ऑनलाइन रैली में ट्रंप ने किया बड़ा एलान

जॉर्जिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर बर्ट जोन्स के समर्थन में आयोजित एक ऑनलाइन रैली के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने अचानक इस ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र किया।

रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा:

"पता नहीं आप लोगों ने अभी तक यह खबर सुनी है या नहीं, लेकिन हमने आज ईरान के साथ युद्ध को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। वे अब परमाणु हथियार न रखने पर पूरी तरह सहमत हो गए हैं। हमारा पूरा ध्यान (करीब 95%) इसी मुख्य लक्ष्य पर था और इसमें हमें कामयाबी मिली है।"

हमले रद्द किए, लेकिन ईरानी मीडिया ने याद दिलाया पुराना रिकॉर्ड

इस बड़ी घोषणा से ठीक कुछ घंटे पहले ट्रंप ने संकेत दिए थे कि दोनों देश एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब हैं। इसी सकारात्मक माहौल के चलते उन्होंने ईरान पर किए जाने वाले नए हवाई और मिसाइल हमलों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया, जिनकी चेतावनी अमेरिकी सेना ने पहले ही दे दी थी।

दूसरी तरफ, ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' (Tasnim) ने ट्रंप के इस दावे पर कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले दो महीनों में ट्रंप कम से कम 38 बार किसी न किसी समझौते के बेहद करीब होने का दावा कर चुके हैं। एजेंसी ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक तेहरान (ईरान सरकार) खुद किसी समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं करता, तब तक ट्रंप के इन बयानों को अंतिम सच नहीं माना जाना चाहिए।

क्षेत्रीय देशों का समर्थन और होर्मुज की स्थिति

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर लिखा कि इस बातचीत को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है और दोनों देशों के बीच एक मजबूत समझौते का ड्राफ्ट तैयार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस शांति समझौते को क्षेत्र के कई अहम देशों और पक्षों का पूरा समर्थन प्राप्त है:

  • कतर और सऊदी अरब

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

  • तुर्किये और पाकिस्तान

  • इजराइल (हालांकि, इजराइल ने अतीत में इस तरह की किसी भी डील को लेकर हमेशा गहरा संदेह जताया है)

होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी अभी रहेगी जारी

भले ही शांति की बातें चल रही हों, लेकिन ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी (Naval Blockade) अभी पूरी तरह लागू रहेगी। यह सख्ती तब तक हटेगी नहीं, जब तक कि समझौता अंतिम रूप नहीं ले लेता।

उम्मीद जताई जा रही है कि इसी वीकेंड यूरोप में इस समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह खुद व्यस्तताओं के चलते शायद इसमें शामिल न हो पाएं, लेकिन अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) वहां मौजूद रहेंगे। समझौता होते ही वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को आधिकारिक रूप से दोबारा खोल दिया जाएगा।

 क्या वाकई टल गया है युद्ध का खतरा?

दोनों देशों के बीच चल रही इस बेहद गुप्त वार्ता की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समझौते के ज्यादातर बिंदुओं पर सहमति कई हफ्ते पहले ही बन चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी इस डील के आखिरी समय में टूटने की कम से कम 50% संभावना बनी हुई है। कई ऐसे अनसुलझे आंतरिक कारण हैं जो आखिरी पल में सब कुछ विफल कर सकते हैं। इसलिए फिलहाल ट्रंप के बड़े दावों के बावजूद इसे अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी।

Back to top button