Unique Village Traffic Fines News: सिर्फ 627 आबादी वाला यह अनोखा गांव, जहां स्पीड कैमरे से होती है करोड़ों की कमाई; रेडार के खौफ से फूंक-फूंककर कदम रखते हैं टूरिस्ट

दुनिया में अक्सर आपने बड़े-बड़े शहरों या महानगरों में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर पुलिस को भारी-भरकम चालान काटते देखा होगा। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि महज 627 लोगों की आबादी वाला एक बेहद छोटा और शांत गांव सिर्फ ट्रैफिक चालान के जरिए हर साल करोड़ों रुपये की कमाई कर लेता है? यह कोई काल्पनिक कहानी नहीं बल्कि इटली के खूबसूरत पहाड़ी और दूरदराज इलाके में बसे एक अनोखे गांव की वास्तविक कहानी है। यह छोटा सा गांव अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ दुनिया भर के ड्राइवरों और पर्यटकों के लिए सबसे बड़े 'स्पीड ट्रैप' (Speed Trap) के रूप में मशहूर हो चुका है।
इस गांव से गुजरने वाले हाईवे और पहाड़ी रास्तों पर हर दिन हजारों विदेशी टूरिस्ट और स्थानीय लोग अपनी गाड़ियों से निकलते हैं। लेकिन गांव की सीमा में प्रवेश करते ही ड्राइवरों के पसीने छूटने लगते हैं, क्योंकि यहां गति सीमा का थोड़ा सा भी उल्लंघन सीधे भारी-भरकम ई-चालान में बदल जाता है। गांव के प्रशासन द्वारा लगाए गए अत्याधुनिक स्पीड कैमरों की वजह से यह छोटा सा इलाका अब राजस्व (Revenue) जुटाने के मामले में बड़े-बड़े शहरों को पीछे छोड़ रहा है।
स्पीड कैमरे का खौफ: क्यों हर साल कटते हैं हजारों चालान और कैसे बदल गई गांव की तस्वीर?
इस गांव के बीच से गुजरने वाली मुख्य सड़क पर स्पीड लिमिट बेहद कम तय की गई है। जहां आमतौर पर खुली सड़कों पर गाड़ियां 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं, वहीं इस गांव की सीमाओं के भीतर स्पीड लिमिट को घटाकर 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तय किया गया है। स्थानीय प्रशासन का तर्क है कि संकरे पहाड़ी रास्तों, पैदल चलने वाले बुजुर्ग ग्रामीणों और छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कड़ा नियम लागू करना बेहद जरूरी था।
सुरक्षा के इसी उद्देश्य से गांव के प्रवेश और निकास द्वारों पर आधुनिक 'स्पीड रेडार' और हाई-टेक एआई (AI) कैमरे स्थापित किए गए। जैसे ही कोई गाड़ी निर्धारित सीमा से थोड़ी भी तेज गति से गुजरती है, ये कैमरे तुरंत उसकी तस्वीर खींचकर सेंट्रल सर्वर को भेज देते हैं और कुछ ही दिनों में ड्राइवर के घर लाखों रुपये (हजारों यूरो) का चालान पहुंच जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, एक साल के भीतर इस गांव में लगे कैमरों ने 25,000 से अधिक गाड़ियों के चालान काटे, जिससे स्थानीय निकाय को करोड़ों रुपये की बंपर आय हुई।
गांव की इतनी छोटी आबादी के लिए यह कमाई किसी जैकपॉट से कम नहीं है। चालान से मिलने वाले पैसों का उपयोग स्थानीय बुनियादी ढांचे को सुधारने, सड़कों की मरम्मत, मुफ्त सामुदायिक सुविधाओं और गांव के सौंदर्यीकरण के लिए किया जा रहा है। हालांकि, दूसरी तरफ यहां से गुजरने वाले पर्यटकों और चालकों के लिए यह गांव किसी खौफ से कम नहीं है। अब जब भी कोई पर्यटक या ट्रैवलर इस रूट से गुजरता है, तो वह स्पीडोमीटर पर नजर बनाए रखता है और बेहद फूंक-फूंककर कदम रखता है ताकि भारी चालान की मार से बचा जा सके।
सोशल मीडिया और ट्रैवल ब्लॉग्स पर भी इस गांव की चर्चा जोरों पर रहती है, जहां घूमना-फिरना पसंद करने वाले लोग एक-दूसरे को इस रूट पर गाड़ी की स्पीड एकदम धीमी रखने की सख्त हिदायत देते हैं।