Lucknow Alert : काम करो या कार्रवाई के लिए तैयार रहो, यूपी के 13 जिलों को सख्त चेतावनी

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में सुस्ती दिखाने वाले सरकारी बाबुओं और अधिकारियों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। अगर आप सोच रहे हैं कि लखनऊ में बैठी सरकार को ज़मीनी हकीकत का पता नहीं चलता, तो यह खबर आपकी आंखें खोलने वाली है। राजधानी लखनऊ से एक ऐसी खबर आई है जिसने प्रदेश के कई जिला मुख्यालयों में हड़कंप मचा दिया है। मामला जुड़ा है अन्नदाताओं यानी किसानों के हक़ और कड़ाके की ठंड से जुड़ी तैयारियों का।अचानक क्यों चढ़ा राहत आयुक्त का पारा?मंगलवार को जब प्रदेश के राहत आयुक्त (Relief Commissioner) डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने समीक्षा बैठक ली, तो फाइलों की स्थिति देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बात साफ़ थी जनता और किसानों के काम में लेतलतीफी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बहानेबाजी अब नहीं चलेगी।दरअसल, मामलाफसल क्षति के मुआवजे (Crop Loss Compensation) से जुड़ा है। बेमौसम बारिश या आपदा से जिन किसानों की फसलें बर्बाद हुई थीं, उन्हें सरकार ने राहत राशि देने का वादा किया था पैसे तैयार हैं, बजट मौजूद है, फिर भी अधिकारियों ने उसे बांटने में सुस्ती दिखाई। बस इसी बात पर आयुक्त ने 13 जिलों के अफ़सरों को आड़े हाथों ले लिया।इन 13 जिलों के नाम हैं ‘रेड लिस्ट’ मेंअगर आप सोच रहे हैं कि ये कौन से जिले हैं जहाँ के अधिकारियों की ‘क्लास’ लगी है, तो लिस्ट पर नज़र डालिये। समीक्षा में पाया गया किगाजीपुर, महोबा, मिर्जापुर, उन्नाव, झांसी, बलिया, मथुरा, मुजफ्फरनगर, चंदौली, हरदोई, जालौन, आगरा और अमरोहा ये वो 13 जिले हैं जिन्होंने राहत वितरण में सबसे ज्यादा लापरवाही बरती है।राहत आयुक्त ने साफ़ अल्टीमेटम दिया है:”अगले 24 घंटे के अंदर किसानों के खातों में पैसा भेजो, वरना सख्त कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहो।”सिर्फ किसान नहीं, सर्दी की तैयारियों पर भी नज़रअब बात करते हैं मौसम की। दिसंबर आ चुका है और कड़ाके की ठंड दस्तक देने वाली है। लेकिन कई जिलों में रैन बसेरों (Night Shelters) और अलाव (Bonfire) का अता-पता नहीं है। समीक्षा में सामने आया कि 40 जिलों में तो जगहें चिह्नित कर ली गई हैं, लेकिन35 जिले अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैंराहत आयुक्त ने एक नई तरकीब भी निकाली है। अब रैन बसेरों की निगरानी ‘कागज़ों’ पर नहीं, बल्कि ‘ऐप’ पर होगी। विभाग ने एक नयामोबाइल ऐप बनाया है जिससे अलाव और कंबलों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। मतलब अब कोई अधिकारी यह झूठ नहीं बोल पाएगा कि “साहब, अलाव जलवा दिया है,” क्योंकि सब कुछ डिजिटल मैप पर दिखेगा।आगे क्या?सीधा सन्देश यह है कि सरकार ‘एक्शन मोड’ में है। 24 घंटे का समय बहुत कम होता है, लेकिन जब फरमान ऊपर से आया हो, तो प्रशासन को घोड़े दौड़ाने ही पड़ते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कल शाम तक इन 13 जिलों के डीएम और संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट में क्या जादू दिखाते हैं। क्या वाकई 24 घंटे में सिस्टम सुधर जाएगा? यह तो वक़्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि लापरवाही अब महंगी पड़ने वाली है।