UP Politics : क्या ब्राह्मण तय करेंगे 2027 का मुख्यमंत्री? ब्रजेश पाठक का पूजनऔर राजभर की हुंकार ने बढ़ाई हलचल

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की सियासी बिसात पर एक बार फिर ‘ब्राह्मण’ केंद्र में आ गए हैं। राज्य में करीब 11 से 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाला यह समुदाय अब भाजपा, सपा और बसपा तीनों के लिए सत्ता की चाबी बन गया है। हालिया घटनाक्रमों ने साफ कर दिया है कि मिशन 2027 के लिए अभी से किलेबंदी शुरू हो गई है।ब्रजेश पाठक का ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और राजभर का नया समीकरणभाजपा की ओर से उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मोर्चा संभाल रखा है। हाल ही में उनके द्वारा किए गए विशेष पूजन और ब्राह्मण सम्मेलनों में उनकी सक्रियता को इसी नजरिए से देखा जा रहा है कि पार्टी अपने इस कोर वोटर को किसी भी कीमत पर छिटकने नहीं देना चाहती।वहीं, सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी अब केवल ‘अति पिछड़ा’ कार्ड तक सीमित नहीं हैं। उनकी रैलियों में ब्राह्मण चेहरों की मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि एनडीए गठबंधन हर वर्ग को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।विपक्ष की चाल: अखिलेश का ‘PDA’ और मायावती की सोशल इंजीनियरिंगअखिलेश यादव (सपा): समाजवादी पार्टी अब ‘एम-वाई’ (मुस्लिम-यादव) से आगे निकलकर ‘पीडीए’ में ब्राह्मणों को सम्मानजनक जगह देने की कोशिश कर रही है। सपा के ब्राह्मण नेता अब जिलों में जाकर प्रबुद्ध वर्ग को यह समझाने में जुटे हैं कि भाजपा में उनकी अनदेखी हो रही है।मायावती (बसपा): ‘हाथी नहीं गणेश है’ का नारा बुलंद करने वाली बसपा एक बार फिर अपने पुराने 2007 वाले सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले को जिंदा करने की कोशिश में है। मायावती ने साफ संकेत दिए हैं कि वह टिकट बंटवारे में ब्राह्मणों को प्राथमिकता देंगी।क्यों अहम है ब्राह्मण वोट बैंक?यूपी की राजनीति में ब्राह्मण समुदाय न केवल खुद एक बड़ा वोट बैंक है, बल्कि वह ग्रामीण और शहरी इलाकों में ‘ओपिनियन मेकर’ की भूमिका भी निभाता है। माना जाता है कि ब्राह्मण जिस तरफ झुकता है, माहौल उसी पार्टी के पक्ष में बनने लगता है।