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पासवर्ड का झंझट खत्म अब आपकी धड़कन और सांसों से खुलेंगे बैंकिंग ऐप्स, जानें क्या है VitalID तकनीक

News India Live, Digital Desk: डिजिटल दुनिया में सिक्योरिटी और पासवर्ड को लेकर हमेशा एक डर बना रहता है। लेकिन अब तकनीक इतनी एडवांस हो गई है कि आपको पिन (PIN) या कॉम्प्लेक्स पासवर्ड याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी क्रांतिकारी तकनीक विकसित की है, जिसमें आपकी दिल की धड़कन (Heartbeat) और सांस लेने का तरीका (Breathing Pattern) ही आपका पासवर्ड बन जाएगा। ‘VitalID’ नाम की यह तकनीक मोबाइल बैंकिंग और अन्य सेंसिटिव ऐप्स को अनलॉक करने के सुरक्षित और आसान तरीके के रूप में उभर रही है।क्या है VitalID तकनीक और यह कैसे काम करती है?रटगर्स यूनिवर्सिटी (Rutgers University) और अन्य शोधकर्ताओं द्वारा विकसित VitalID एक सॉफ्टवेयर-आधारित ऑथेंटिकेशन सिस्टम है। यह तकनीक हमारे शरीर के भीतर होने वाले सूक्ष्म कंपनों (Vibrations) को पहचानती है। जब हम सांस लेते हैं या हमारा दिल धड़कता है, तो उससे बहुत छोटे वाइब्रेशन्स पैदा होते हैं जो हमारी गर्दन से होते हुए खोपड़ी (Skull) तक पहुंचते हैं। चूंकि हर इंसान की हड्डियों की संरचना, मोटाई और चेहरे के ऊतक (Tissues) अलग-अलग होते हैं, इसलिए ये कंपन हर व्यक्ति के लिए एक यूनिक पैटर्न बनाते हैं—ठीक वैसे ही जैसे हमारे फिंगरप्रिंट्स।बिना किसी एक्स्ट्रा हार्डवेयर के मिलेगी हाई-टेक सिक्योरिटीइस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए आपके स्मार्टफोन या गैजेट में किसी अलग से सेंसर या हार्डवेयर की जरूरत नहीं है। यह मौजूदा मोशन सेंसर्स (जैसे एक्सेलेरोमीटर और जायरोस्कोप) का उपयोग करके ही इन सूक्ष्म गतिविधियों को रिकॉर्ड कर लेती है। बैंकिंग ऐप्स के लिए यह मील का पत्थर साबित हो सकती है, क्योंकि यह बैकग्राउंड में लगातार काम करती रहती है। यानी जब तक आप फोन पकड़े हुए हैं या हेडसेट पहने हुए हैं, यह सुनिश्चित करता रहेगा कि आप ही असली यूजर हैं।पासवर्ड और फेस स्कैन से कितनी अलग है यह तकनीक?आजकल हम फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें कई बार फोटो या सिलिकॉन फिंगरप्रिंट के जरिए ‘स्पूफ’ (धोखा) दिया जा सकता है। लेकिन VitalID को चकमा देना लगभग नामुमकिन है। कोई आपकी सांस लेने की लय की नकल तो कर सकता है, लेकिन आपकी खोपड़ी के भीतर होने वाले बायोमैकेनिकल वाइब्रेशन्स को कॉपी नहीं कर सकता। शोध के अनुसार, यह तकनीक 95% से अधिक सटीक पाई गई है, जो इसे पारंपरिक बायोमेट्रिक्स से ज्यादा भरोसेमंद बनाती है।मोबाइल बैंकिंग में सुरक्षा का नया अध्यायआने वाले समय में, जब आप अपना मोबाइल बैंकिंग ऐप खोलेंगे, तो आपको न तो चेहरा दिखाना होगा और न ही अंगूठा लगाना होगा। ऐप सिर्फ आपकी ‘धड़कन’ को महसूस करके आपको एक्सेस दे देगा। यह न केवल समय बचाएगा, बल्कि टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) की झंझट को भी कम करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य के मेटावर्स और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) डिवाइस के लिए सुरक्षा का मुख्य आधार बनेगी, जहां प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी सबसे अहम है।

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