Indian cinema : क्या 40 के बाद हीरोइन का करियर खत्म? दीया मिर्ज़ा ने खोला इंडस्ट्री का वो राज जो कोई नहीं बोलता

News India Live, Digital Desk : क्या आपने कभी गौर किया है? हमारे 90 के दशक के चहेते हीरो चाहे वो सलमान हों, शाहरुख़ हों या अक्षय कुमार आज भी बड़े पर्दे पर लीड रोल निभा रहे हैं। 55 की उम्र में भी वे रोमांस कर रहे हैं और विलेन की धुलाई कर रहे हैं। लेकिन जरा सोचिए, उनके साथ जिन हीरोइनों ने डेब्यू किया था, वो आज कहां हैं?ज्यादातर या तो फिल्मों से गायब हो गईं, या फिर उन्हें ‘मां’ और ‘भाभी’ के रोल ऑफर होने लगे। इसी भेदभाव और बॉलीवुड के “दोहरे रवैये” पर मशहूर एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा (Dia Mirza) ने अपनी बेबाक राय रखी है। उनकी बातें सुनने के बाद आप भी कहेंगे कि “बात में दम तो है।”क्या कहा दीया मिर्ज़ा ने?दीया मिर्ज़ा, जो अपनी खूबसूरती और सादगी के लिए जानी जाती हैं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में दिल की बात कही। उन्होंने बताया कि कैसे बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को स्क्रीन से धीरे-धीरे हटा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में एक अजीब सा “बैलेंस” बिगड़ा हुआ है। जहां मर्दों के लिए उम्र बढ़ना उनके अनुभव और “स्वैग” (Swag) का प्रतीक माना जाता है, वहीं महिलाओं के लिए बढ़ती उम्र करियर का “फुल स्टॉप” बन जाती है।दीया ने एक बहुत पते की बात कही— समाज और सिनेमा दोनों ही औरतों की जवानी और सुंदरता को एक ‘कीमती चीज’ मानते हैं। और जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, उन्हें लगता है कि अब उस महिला को देखने में किसी को दिलचस्पी नहीं होगी। इसलिए, मेकर्स उन्हें रोल देना बंद कर देते हैं या बहुत ही सीमित दायरे में बांध देते हैं।पुरुषों के लिए अलग नियम क्यों?यह सवाल हम सब के मन में आता है। दीया का कहना है कि एक मेल एक्टर अपनी मर्जी से बूढ़ा हो सकता है, उसके चेहरे की लकीरें उसका कैरेक्टर बढ़ाती हैं। लेकिन महिलाओं को हमेशा “परफेक्ट” और “जवान” दिखने का इतना प्रेशर होता है कि वो अपनी नेचुरल उम्र को एंजॉय ही नहीं कर पातीं। उन्हें लगता है कि अगर चेहरे पर झुर्री दिखी, तो काम मिलना बंद हो जाएगा।यही कारण है कि बहुत सारी बेहतरीन एक्ट्रेसेज, जिनके पास अनुभव का खजाना है, आज घर बैठी हैं या उन्हें कोई ढंग का काम नहीं मिल रहा। जबकि उनके साथ के एक्टर्स आज भी 20-25 साल छोटी एक्ट्रेस के साथ हीरो बनकर आ रहे हैं।उम्मीद की किरण (Hope for Change)हालांकि, दीया ने यह भी माना कि चीजें धीरे-धीरे बदल रही हैं। OTT प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद अब कहानियों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अब अधेड़ उम्र की महिलाओं के लिए भी ऐसे किरदार लिखे जा रहे हैं जो सिर्फ ‘सजावट’ नहीं, बल्कि कहानी की जान हैं। लेकिन फिर भी, बॉलीवुड की मेनस्ट्रीम फिल्मों में यह बदलाव आना अभी बाकी है।