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UPI पर मर्चेंट ट्रांजैक्शन फीस लगाने का फैसला अगले साल तक टला

भारतीय डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और फिनटेक सेक्टर से एक बहुत बड़ी और बाजार को हिला देने वाली खबर सामने आ रही है। देश में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) के जरिए होने वाले लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट या एमडीआर (MDR) यानी फीस लगाने के प्रस्ताव को फिलहाल अगले साल यानी 2027 तक के लिए टाले जाने की पूरी संभावना बन गई है। इस नीतिगत अनिश्चितता और नियामक चर्चाओं के बीच शेयर बाजार में लिस्टेड प्रमुख फिनटेक और डिजिटल पेमेंट कंपनियों के शेयरों पर भारी दबाव देखने को मिला है। खबर सामने आते ही देश की दिग्गज डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम (Paytm – One 97 Communications) का शेयर बाजार में लुढ़कते हुए सीधे लोअर सर्किट पर जा पहुंचा, वहीं फोनपे और अन्य सहयोगियों से जुड़ी पैरेंट कंपनियों तथा अन्य पेमेंट गेटवे शेयरों में भी बिकवाली का जोरदार दौर चल पड़ा है, जिससे निवेशकों में गहरी चिंता छा गई है।

UPI पर फीस लगाने या न लगाने की चल रही बहस और वित्त मंत्रालय तथा आरबीआई के बीच विचार-विमर्श

भारत में पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से मुफ्त रखे गए हैं, जिससे देश के छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह ऑनलाइन पेमेंट का कल्चर तेजी से फैला है। हालांकि, बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर लगातार यह मांग कर रहे थे कि भारी बुनियादी ढांचे के रखरखाव और सर्वर लागत को उठाने के लिए मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक निश्चित शुल्क यानी एमडीआर तय किया जाना चाहिए। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर बहुत ही सावधानी के साथ कदम बढ़ा रहे हैं, क्योंकि किसी भी प्रकार की फीस लगने से आम जनता और छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान का उत्साह कम हो सकता है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, तमाम पक्षों के विरोध और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के बाद इस फैसले को फिलहाल अगले साल के लिए टालने का मन बनाया गया है, ताकि डिजिटल अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर कोई ब्रेक न लगे।

पेटीएम के शेयर में लोअर सर्किट और शेयर बाजार में अन्य पेमेंट कंपनियों के शेयरों का हाल

नियामक बदलावों और नीतिगत फैसलों की अनिश्चितता का सबसे बुरा असर शेयर बाजार में लिस्टेड फिनटेक कंपनियों पर पड़ता दिखाई दे रहा है। जैसे ही यह खबर फैली कि यूपीआई फीस का मामला टल सकता है और इससे कंपनियों के रेवेन्यू मॉडल पर दबाव बना रहेगा, वैसे ही निवेशकों ने पेटीएम के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी, जिसके चलते यह स्टॉक अपने तय लोअर सर्किट की सीमा पर जा गिरा। इसके साथ ही, बाजार में सक्रिय अन्य वित्तीय प्रौद्योगिकी और डिजिटल भुगतान सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी 3 से 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना है कि जब तक सरकार और आरबीआई की ओर से यूपीआई मुद्रीकरण (Monetization) या एमडीआर नीति को लेकर कोई अंतिम और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाते, तब तक फिनटेक शेयरों में इसी तरह की उतार-चढ़ाव भरी स्थिति बनी रहेगी।

छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए क्या होंगे इसके दूरगामी परिणाम और आगे का बाजार रुझान

देश के करोड़ों आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों के लिए यह राहत की खबर जरूर है कि फिलहाल उन्हें यूपीआई पेमेंट करने या रिसीव करने पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा, जिससे डिजिटल इंडिया अभियान को लगातार मजबूती मिलती रहेगी। लेकिन दूसरी तरफ, जो कंपनियां इस फ्री इंफ्रास्ट्रक्चर को चला रही हैं और मर्चेंट को तकनीकी सेवाएं दे रही हैं, उनके लिए मुनाफा कमाना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले महीनों में देखना यह होगा कि सरकार बैंकों की लागत की भरपाई करने के लिए कोई वैकल्पिक वित्तीय प्रोत्साहन योजना लेकर आती है या फिर एमडीआर के नियमों में कोई बीच का रास्ता निकाला जाता है। तब तक निवेशकों को चाहिए कि वे फिनटेक सेक्टर के शेयरों में निवेश करते समय इन विनियामक जोखिमों का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि छोटी सी खबर भी इन शेयरों की चाल को पलभर में बदल सकती है।

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