US Iran Conflict: सऊदी अरामको पर हूती हमला, रेड सी में बेराकटार ड्रोन ढेर और समुद्री रास्तों पर नाकेबंदी

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत भले ही अस्थाई तौर पर रुक गई हो, लेकिन मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के धरातल पर ईरान ने एक ऐसा बारूद का ढेर बिछा दिया है जो आने वाले कई वर्षों तक शांत होता नहीं दिख रहा है। अमेरिका को अरब क्षेत्र से बाहर निकालने और पड़ोसी देशों को अपने आगे झुकाने के लिए ईरान ने अपने शक्तिशाली 'प्रॉक्सी नेटवर्क्स' को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा बमबारी रोकने के बाद भी ईरान ने इस लड़ाई को अनिश्चित काल तक खींचने का मन बना लिया है। यमन के हूती विद्रोहियों से लेकर इराक के उग्रवादी गुटों तक, ईरान के सहयोगियों ने पूरे अरब इलाके को रणनीतिक संकट की आग में झोंक दिया है।
अरामको रिफाइनरी पर ड्रोन हमला और अत्याधुनिक 'अकिन्की' ड्रोन को गिराने का दावा
ईरान की इस आक्रामक रणनीति का सबसे खतरनाक असर अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देश सऊदी अरब पर देखने को मिला है। हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी—'सऊदी अरामको' (Saudi Aramco)—पर आत्मघाती ड्रोन से भीषण प्रहार किया है। इस हमले के बाद रिफाइनरी के स्टोरेज टैंक एरिया और मुख्य पाइपलाइन सेक्शन के ऊपर धुएं का विशाल गुबार उड़ता देखा गया। हालांकि रिफाइनरी का मुख्य यूटिलिटी जोन सुरक्षित है, लेकिन पाइपलाइनों को पहुंचे नुकसान और मरम्मत के दौरान बने खतरे के कारण तेल का उत्पादन और प्रोसेसिंग लंबे समय तक ठप रहने की आशंका है। इसके साथ ही, हूतियों ने अल-जौफ प्रांत के आसमान में उड़ रहे सऊदी अरब के सबसे आधुनिक 'बेराकटार अकिन्की' (Bayraktar Akinci) ड्रोन को मार गिराने का बड़ा दावा करके सुरक्षा एजेंसियों में सनसनी फैला दी है।
होर्मुज और बाब अल-मंदाब में बिछाया सी-माइंस का जाल, जहाजों की आवाजाही पर ब्रेक
ईरान ने केवल जमीनी ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया है, बल्कि वैश्विक तेल व्यापार के दो सबसे प्रमुख समुद्री रास्तों पर अपना पूर्ण वर्चस्व कायम कर लिया है। पहला गेटवे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है, जहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इनबाउंड और आउटबाउंड दोनों शिपिंग लेन में भारी संख्या में 'सी-माइंस' (समुद्री सुरंगे) बिछा दी हैं, जिससे अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के बावजूद यह पूरा समुद्री रास्ता ठप हो गया है।
दूसरी तरफ, लाल सागर (Red Sea) के मुहाने पर स्थित 'बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य' पर हूती विद्रोहियों का कब्जा हो चुका है। हूतियों ने इस रास्ते से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर लगातार हमले करके और सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन को ब्लॉक करके लाल सागर में अपना खौफ कायम कर दिया है।
थम गया वैश्विक व्यापार: 11 जहाजों पर सिमटा ट्रैफिक, भीषण आर्थिक संकट की आहट
ईरानी लड़ाकों के इस दोहरे रणनीतिक चक्रव्यूह का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, बाब अल-मंदाब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कार्गो जहाजों की संख्या गिरकर अपने ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है। रविवार को इस बेहद व्यस्त मार्ग से महज 11 मालवाहक जहाज ही गुजर सके, जो दिखाता है कि हूतियों की नाकेबंदी किस हद तक प्रभावी हो चुकी है। वैश्विक बंदरगाहों को खाली कराने और सऊदी अर्थव्यवस्था को सीधे चोट पहुंचाने की इस ईरानी रणनीति ने पूरी दुनिया को एक भयंकर ऊर्जा संकट और आर्थिक तबाही की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।