US-Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान समझौते के बीच इजरायल का लेबनान पर बड़ा हमला, भड़का तेहरान, ट्रंप ने दी नेतन्याहू को नसीहत

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर हुए ऐतिहासिक अंतरिम समझौते के तुरंत बाद पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस शांति समझौते की घोषणा के बीच इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में सिलसिलेवार भीषण हमले कर दिए हैं। ईरान ने दावा किया है कि इजरायल ने लेबनान में लागू युद्धविराम (Ceasefire) का खुला उल्लंघन किया है। तेहरान ने इजरायल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि इस आक्रामकता के खिलाफ वह जल्द ही एक बड़ा सैन्य जवाबी हमला (Retaliation) करेगा। इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका को भी चेताया है कि समझौते के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन गंभीर नतीजों को जन्म देगा।
शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में साइन होगा ऐतिहासिक शांति समझौता
गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 107 दिनों से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर पूर्ण सहमति बन गई है। दोनों देशों के बीच इस ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर आगामी शुक्रवार (19 जून) को स्विट्जरलैंड के बुर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट (Burgenstock Resort) में आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा लेगी और वैश्विक बाजारों के लिए तेल का प्रवाह फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सकेगा।
'अगर अमेरिका न होता तो इजरायल खत्म हो जाता'- ट्रंप का बड़ा बयान
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा बयान दिया है। फ्रांस के एवियन में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा, "अगर अमेरिका का साथ नहीं होता, तो आज इजरायल पूरी तरह खत्म हो चुका होता।"
ट्रंप ने इजरायली पीएम नेतन्याहू को सख्त लहजे में नसीहत देते हुए कहा कि वे लेबनान पर अब और हमले तुरंत रोकें। इजरायल को इस क्षेत्र में अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। लेबनान की मौजूदा बदहाली पर दुख जताते हुए ट्रंप ने कहा, "यह वही देश है जो कभी बेहतरीन शिक्षकों, डॉक्टरों और वकीलों के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यहां हालात बदतर हो चुके हैं।" ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि किसी एक दुश्मन को निशाना बनाने के लिए पूरी की पूरी रिहायशी इमारत को गिरा देना बिल्कुल गलत है, क्योंकि उसमें कई बेकसूर नागरिक भी मारे जाते हैं। ट्रंप ने सुझाव दिया कि हिजबुल्लाह से निपटने का जिम्मा सीरिया को सौंपा जा सकता है।
नेतन्याहू के तेवर कड़े – 'चाहे समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे'
दूसरी ओर, अमेरिका-ईरान समझौते की खबरों से इजरायल के भीतर राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस समझौते को लेकर इजरायली जनता और सरकार के सहयोगियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने इसे इजरायल की 'ऐतिहासिक विफलता' करार दिया है। इस चौतरफा आलोचना के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने कदमों का पुरजोर बचाव किया है। नेतन्याहू ने कड़े शब्दों में कहा, "चाहे वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई भी समझौता हो जाए, ईरान के पास न तो आज परमाणु हथियार होंगे और न ही कल।"
नेतन्याहू ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके कड़े फैसलों की वजह से ही इजरायल के ऊपर मंडरा रहा तत्काल विनाश का खतरा टल सका है। अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ मतभेदों की अटकलों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, "कई बार ऐसा होता है जब राष्ट्रपति ट्रंप और मेरे विचार एक जैसे नहीं होते, लेकिन मुझे इजरायल के सुरक्षा हितों की रक्षा हर हाल में करनी है।" इसके साथ ही नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना को पीछे हटाने की संभावना से साफ इनकार कर दिया है, जिसे रक्षा विश्लेषक इस शांति समझौते के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा मान रहे हैं।