US Iran War 2026: खाड़ी देशों में सीजफायर टूटा, अमेरिका ने की ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी; ‘ऑपरेशन अल-नसर 2’ से ईरान का पलटवार

मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में एक बार फिर युद्ध के भीषण बादल गहरे हो गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा अस्थाई शांति समझौता (सीजफायर) महज 30 दिनों के भीतर ही पूरी तरह से टूट चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एलान किया है कि उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान की पूरी तरह से नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और बम बरसाए हैं। इसके जवाब में ईरान ने भी घुटने टेकने के बजाय 'ऑपरेशन अल-नसर 2' का एलान कर अपनी सबसे घातक मिसाइलें समंदर में दाग दी हैं। इस टकराव से पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है और ग्लोबल मार्केट पर एक बार फिर बड़े तेल संकट का खतरा मंडराने लगा है।
अमेरिका का बारूदी प्रहार और हॉर्मुज की पूर्ण घेराबंदी
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने दोपहर ठीक 3 बजे ईरान के खिलाफ एक बेहद आक्रामक सैन्य अभियान छेड़ दिया। अमेरिकी सेना का सीधा मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की उस नौसैनिक ताकत को कुचलना है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी। अमेरिकी हमलों में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल डिपो और ड्रोन सेंटर्स को भारी नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि ईरान के बंदरगाहों की यह घेराबंदी तब तक नहीं हटेगी, जब तक ईरान पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं कर देता।
ईरान का आत्मघाती पलटवार: 'ऑपरेशन अल-नसर 2' की शुरुआत
अमेरिका के इस चौतरफा हमले के तुरंत बाद ईरान के पैरा-मिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने मोर्चा संभाल लिया। ईरान ने 'ऑपरेशन अल-नसर 2' के तीसरे दौर का एलान करते हुए अपनी सबसे विध्वंसक मिसाइलों 'खैबर शिकन' और 'जुल्फिकार' को समंदर में उतार दिया है। इन घातक मिसाइलों के साथ दर्जनों सुसाइड ड्रोन भी लॉन्च किए गए हैं। ईरान ने सख्त चेतावनी दी है कि जो भी विदेशी जहाज उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करेगा, उसे समंदर में ही दफन कर दिया जाएगा। ईरान के इस आक्रामक रुख से बहरीन, कुवैत और जॉर्डन जैसे पड़ोसी खाड़ी देशों में भी युद्ध फैलने का डर पैदा हो गया है।
ट्रंप का यू-टर्न: जहाजों पर 20% टैक्स का प्लान क्यों बदला?
इस भीषण जंग के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला रणनीतिक फैसला भी लिया है। पहले उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर 20 फीसदी की भारी सिक्योरिटी फीस (टैक्स) लगाने की धमकी दी थी, लेकिन नाकेबंदी शुरू होने के ठीक पहले उन्होंने इसे वापस ले लिया। ट्रंप ने खुद इस बात का खुलासा किया कि खाड़ी देशों के राजाओं और अमीर सुल्तानों ने उन्हें फोन पर इस टैक्स को हटाने की गुजारिश की थी, जिसके बदले में उन्होंने अमेरिका में अरबों डॉलर का भारी निवेश करने का वादा किया है। ट्रंप ने इस बिजनेस डील को बेहतर माना और टैक्स लगाने का विचार छोड़ दिया।
ग्लोबल इकोनॉमी पर तबाही का साया: फिर भड़केगी तेल की आग
हॉर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की आर्थिक लाइफलाइन है। वैश्विक बाजार का 20 फीसदी कच्चा तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। इससे पहले जब फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर पहला बड़ा हमला किया था, तब यह समुद्री मार्ग पूरी तरह ठप हो गया था, जिससे दुनिया भर में तेल और अनाज की कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं। अब दोबारा इस रूट पर बारूद बरसने से वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी की गर्त में डूबने का खतरा पैदा हो गया है।
बातचीत की उम्मीदें खत्म, पर्दे के पीछे पाकिस्तान की कोशिशें
दोनों देशों के बीच हुआ 60 दिनों का अस्थाई सीजफायर अपने आधे सफर में ही दम तोड़ चुका है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य बातचीत के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सीमा विवाद को हमेशा के लिए सुलझाना था, लेकिन दोनों देशों की हठधर्मिता ने शांति की उम्मीदों को मलबे में तब्दील कर दिया। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों से खबर है कि पाकिस्तान इस समय भी पर्दे के पीछे से दोनों देशों को शांत करने और सीजफायर को दोबारा जिंदा करने की कोशिशों में लगा है। लेकिन समंदर में जिस तरह मिसाइलें और ड्रोन बरस रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि यह जंग महायुद्ध का रूप ले सकती है।