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US-Iran War Big Update: मिडिल ईस्ट युद्ध में हुई सऊदी अरब की सरप्राइज एंट्री

मध्य-पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे भयावह मोड़ पर पहुंच चुका है। कूटनीतिक वार्ताओं का दौर पूरी तरह समाप्त होने के बाद मोर्चे पर सबसे बड़ा उलटफेर तब देखा गया, जब सऊदी अरब ने अपनी पुरानी निष्पक्षता छोड़कर अमेरिका का खुलकर साथ देने का फैसला किया। इराक में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने संयुक्त रूप से हमला बोलकर ईरान समर्थित गुटों के लॉजिस्टिक्स डिपो और हथियारों के ठिकानों को तबाह कर दिया है। इस भीषण एयरस्ट्राइक में 20 लड़ाकों और 6 ईरानी सैन्य सलाहकारों की मौत हो चुकी है, जिससे इस क्षेत्रीय संघर्ष का संतुलन पूरी तरह बदल गया है।

जॉर्डन एयरबेस पर मिसाइल दागने के बाद भड़का अमेरिका

तनाव की यह नई चिंगारी तब सुलगी जब ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयरबेस 'मुवफ्फक साल्टी' को निशाना बनाते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते सभी मिसाइलों को हवा में ही ध्वस्त कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पलटवार करते हुए ईरान के अंदर कई सैन्य ठिकानों पर फिर से घातक बमबारी शुरू कर दी। वाशिंगटन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कूटनीति के लिए दिया गया पांच दिनों का विराम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

मिस्र के तटीय क्षेत्र तक फैला जंग का दायरा

इराक में हुई भीषण एयरस्ट्राइक के अलावा, संघर्ष की लपटें अब मिस्र तक भी पहुंच गई हैं। मिस्र के 'दमिएटा' बंदरगाह के पास खड़े अमेरिका के स्वामित्व वाले दो लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकरों पर संदिग्ध ड्रोन से हमला किया गया है। अब तक इस युद्ध से अछूते रहे मिस्र के समुद्री क्षेत्र में यह हमला इस बात का बड़ा सबूत है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय सीमाओं को लांघकर पूरे मध्य-पूर्व को निगलने के लिए तैयार खड़ा है।

सऊदी अरब की एंट्री से कैसे पलटा पूरा गेम?

अब तक इस जंग से दूरी बनाए रखने वाले सऊदी अरब ने अपने तेल प्रतिष्ठानों पर लगातार हो रहे ड्रोन हमलों के जवाब में अमेरिका से हाथ मिला लिया है। सऊदी की इस सैन्य सहभागिता से इराक, सीरिया और यमन में सक्रिय ईरान समर्थक संगठनों जैसे 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' (PMF) और 'हूती' विद्रोहियों पर दोहरी मार पड़ रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान युद्ध विराम की मिन्नतें कर रहा है, लेकिन अमेरिका उन्हें करारा जवाब देगा। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि अब हमारी बारी है और हम उन पर बहुत जोरदार प्रहार करने जा रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर मंडराया गहरा संकट

युद्ध के विकराल रूप धारण करने से विश्व अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है। थिंक टैंक CSIS की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार मिसाइल इंटरसेप्ट करने से अमेरिका के 'पैट्रियट' और 'थाड' इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खतरनाक स्तर तक कम हो गया है। वहीं दूसरी ओर, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही ठप होने से कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक सप्लाई रुकने की कगार पर है। अगर स्थिति नहीं संभली तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल और ऊर्जा के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंदी का कारण बन सकती है।

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