US-Iran War Mediation: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने की बड़ी पहल, पाकिस्तान में जुटे 4 मुस्लिम देश; अमेरिका-ईरान की सीधी मुलाकात जल्द!

मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और युद्ध की लपटों के बीच शांति की एक उम्मीद जगी है। रविवार, 29 मार्च से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस बैठक में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के दिग्गज राजनयिक शामिल हो रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन का मुख्य एजेंडा अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाना और क्षेत्र में छिड़ी जंग को शांत करना है।इस्लामाबाद में 4 देशों का ‘शांति चक्रव्यूह’: क्या थमेगी जंग?पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस विशेष बैठक में पाकिस्तान के इशाक डार, तुर्की के हकन फिदान और सऊदी अरब व मिस्र के शीर्ष प्रतिनिधि एक साथ बैठे हैं। तुर्की के विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि इस बैठक का मकसद युद्ध की दिशा बदलने और तनाव कम करने के लिए एक ठोस ‘मैकेनिज्म’ तैयार करना है। सबसे बड़ी खबर यह है कि जर्मन विदेश मंत्री के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच ‘बहुत जल्द’ पाकिस्तान की धरती पर सीधी मुलाकात हो सकती है।अमेरिका की 15 शर्तें बनाम ईरान का 5-सूत्रीय एजेंडाकूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने अमेरिका का एक ‘शांति प्रस्ताव’ तेहरान (ईरान) तक पहुंचाया है। इस प्रस्ताव में अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए 15 कड़ी शर्तें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से:ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक।मिसाइल विकास और परीक्षणों पर पाबंदी।होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े नए नियम।हालांकि, ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को पूरी तरह ‘एकतरफा’ करार देते हुए अपना खुद का 5-सूत्रीय फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसमें उसने अपनी संप्रभुता के सम्मान और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है।भरोसा बहाली की कोशिश: ईरान ने दिखाई दरियादिलीतनावपूर्ण माहौल के बीच ‘कॉन्फिडेंस बिल्डिंग’ यानी भरोसा बढ़ाने के उपाय भी शुरू हो गए हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने खुलासा किया कि ईरान ने सद्भावना के तौर पर पाकिस्तानी झंडे वाले 20 अतिरिक्त जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है। इसे कूटनीतिक हलकों में एक बड़ी जीत माना जा रहा है, हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अभी भी वाशिंगटन की ‘अनुचित मांगों’ पर कड़ा संदेह जताया है।शांति की बात और युद्ध की तैयारी: खाड़ी में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनातहैरान करने वाली बात यह है कि जहाँ एक तरफ मेज पर शांति की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ युद्ध के मोर्चे पर सैन्य गतिविधियां चरम पर हैं।अमेरिकी तैनाती: अमेरिका ने क्षेत्र में करीब 3,500 मरीन और 82nd एयरबोर्न डिवीजन के 5,000 पैराट्रूपर्स तैनात कर रखे हैं।रणनीति: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का मानना है कि अमेरिका बिना जमीनी सेना उतारे भी तकनीकी और हवाई हमलों के जरिए अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है।ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद की इस बैठक पर टिकी हैं कि क्या मुस्लिम देशों की यह मध्यस्थता सफल होगी या खाड़ी देश एक और बड़े विनाश की ओर बढ़ेंगे।