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Weight Loss Myth: क्या सिर्फ डाइट से कम हो सकता है वजन? सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया टिकाऊ वेट लॉस का असली फॉर्मूला

वजन घटाने (Weight Loss) की जर्नी में लोग तरह-तरह के तरीके आजमाते हैं। कोई जिम में घंटों पसीना बहाता है, तो कोई केवल अपनी डाइट में कटौती करने पर ही पूरा फोकस रखता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि—क्या सिर्फ डाइटिंग करके आसानी से और हमेशा के लिए वजन कम किया जा सकता है?

सेलेब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. गीतिका चोपड़ा के अनुसार, केवल डाइट पर निर्भर रहना एक बड़ा मिथक हो सकता है। शुरुआती दौर में सिर्फ डाइट कंट्रोल करने से भले ही आपका वजन कुछ किलो कम हो जाए, लेकिन लंबे समय तक स्वस्थ, टिकाऊ और सुरक्षित वेट लॉस के लिए अकेले डाइट काफी नहीं है।

वैज्ञानिक रिसर्च और एक्सपर्ट्स बताते हैं कि वजन घटाना केवल 'कम खाने' (Eat Less) का खेल नहीं है। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्मोन्स, मसल मास, नींद की क्वालिटी, स्ट्रेस लेवल, गट हेल्थ (पाचन स्वास्थ्य) और फिजिकल एक्टिविटी का एक संतुलित मेल है।

सिर्फ डाइटिंग करने के क्या हैं नुकसान?

यदि आप बिना एक्सरसाइज और पर्याप्त न्यूट्रिशन के सिर्फ क्रैश डाइटिंग (Crash Dieting) करते हैं, तो शरीर को फायदे की जगह नुकसान उठाना पड़ सकता है:

  1. मसल मास में कमी (Muscle Loss): केवल खाना कम करने से शरीर फैट के साथ-साथ आपकी मांसपेशियों (Muscles) को भी घटाने लगता है।

  2. स्लो मेटाबॉलिज्म (Slow Metabolism): मसल मास कम होने से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि आप दिन भर में कम कैलोरी बर्न कर पाते हैं।

  3. वजन दोबारा बढ़ने का खतरा (Weight Regain): जैसे ही आप अपनी नॉर्मल डाइट पर लौटते हैं, स्लो मेटाबॉलिज्म के कारण वजन बहुत तेजी से वापस बढ़ जाता है, जिसे 'यो-यो इफेक्ट' (Yo-Yo Effect) कहा जाता है।

डाइट के साथ इन 5 एक्टिविटी को भी करें फॉलो

सही और सुरक्षित तरीके से फैट बर्न करने के लिए न्यूट्रिशनिस्ट्स कैलोरी डेफिसिट (Calorie Deficit) के साथ निम्नलिखित रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं:

  • हाई क्वालिटी प्रोटीन: अपने हर मील (आहार) में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करें ताकि आपकी मांसपेशियां मजबूत रहें।

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: हफ्ते में कम से कम 2 से 4 दिन वेट ट्रेनिंग या बॉडीवेट एक्सरसाइज जरूर करें।

  • डेली स्टेप्स काउंट: दिन भर एक्टिव रहने के लिए रोजाना 7,000 से 10,000 कदम चलने का लक्ष्य रखें।

  • क्वालिटी स्लीप: रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और आरामदायक नींद लें। नींद की कमी से हंगर हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं।

  • स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव और एंग्जायटी से शरीर में 'कोर्टिसोल' हार्मोन बढ़ता है, जो जिद्दी बेली फैट (Belly Fat) को जमा करता है। ध्यान या योग से स्ट्रेस को कंट्रोल करें।

गट हेल्थ और मेटाबॉलिक हेल्थ को सुधारना है जरूरी

डॉ. गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि हमारा मुख्य लक्ष्य सिर्फ वजन का आंकड़ा कम करना नहीं, बल्कि गट इंफ्लामेशन (Gat Inflammation) और मेटाबॉलिक हेल्थ को ठीक करना होना चाहिए।

लंबे समय तक आंतों में रहने वाली सूजन (Chronic Inflammation) पाचन तंत्र को बिगाड़ती है, इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है और हार्मोनल इम्बैलेंस पैदा करती है। इतना ही नहीं, यह टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा सकती है। इसलिए एंटी-इंफ्लामेंट्री फूड्स (Anti-inflammatory Foods) और गट-हीलिंग न्यूट्रिशन पर ध्यान देना चाहिए।

एक्सपर्ट का अचूक वेट लॉस फॉर्मूला

यदि आप बिना बीमार पड़े हमेशा के लिए फिट रहना चाहते हैं, तो इस 7-स्टेप फॉर्मूले को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएं:

 

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