Windfall Tax Hike: डीजल और हवाई ईंधन पर सरकार का बड़ा फैसला, क्या महंगी होगी जेब

केंद्र सरकार ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। घरेलू स्तर पर कच्चे तेल के उत्पादन और रिफाइनिंग से होने वाले मुनाफे को संतुलित करने के लिए सरकार ने विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) की दरों में संशोधन किया है। इस नए फैसले के तहत डीजल और विमान ईंधन (ATF – Aviation Turbine Fuel) के निर्यात (Export) पर लगने वाले टैक्स को बढ़ा दिया गया है। हालांकि, देश के आम वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि पेट्रोल पर लगने वाले टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डीजल और हवाई ईंधन पर क्यों बढ़ा टैक्स
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और रिफाइनिंग मार्जिन में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) में बढ़ोतरी कर दी गई है। इसके साथ ही, हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एटीएफ के एक्सपोर्ट पर भी टैक्स बढ़ा दिया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थानीय बाजार में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना और तेल कंपनियों द्वारा कमाए जा रहे अप्रत्याशित मुनाफे (Windfall Gains) का एक हिस्सा राजस्व के रूप में प्राप्त करना है।
पेट्रोल पर टैक्स जस का तस
इस पूरे टैक्स संशोधन में सबसे बड़ी राहत पेट्रोल को लेकर मिली है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को शून्य पर बरकरार रखा है। इस फैसले से घरेलू बाजार में पेट्रोल की खुदरा कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, जो आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार इस समय खुदरा महंगाई दर को नियंत्रण में रखना चाहती है, इसलिए पेट्रोल को इस बढ़ोतरी से बाहर रखा गया है।
रिलायंस और ओएनजीसी जैसी कंपनियों पर क्या होगा असर
सरकार के इस फैसले का सीधा असर देश की बड़ी तेल उत्पादक और रिफाइनिंग कंपनियों जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया पर देखने को मिल सकता है। विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी के कारण इन कंपनियों के एक्सपोर्ट मार्जिन (निर्यात से होने वाले मुनाफे) पर कुछ दबाव आ सकता है। हालांकि, चूंकि यह टैक्स केवल विदेशों में भेजे जाने वाले ईंधन पर लागू होता है, इसलिए घरेलू बाजार में तेल बेचने वाली सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मुनाफे पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना बेहद कम है।
क्या होता है विंडफॉल टैक्स और क्यों लगाया जाता है
सरल शब्दों में कहें तो विंडफॉल टैक्स एक ऐसा विशेष टैक्स है जो किसी कंपनी या उद्योग पर तब लगाया जाता है जब उन्हें किसी बाहरी परिस्थिति के कारण अचानक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित मुनाफा होता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी थीं, तब भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने विदेशों में ईंधन बेचकर भारी मुनाफा कमाया था। इसी मुनाफे को रेगुलेट करने के लिए भारत सरकार ने जुलाई 2022 में पहली बार विंडफॉल टैक्स लागू किया था, जिसकी हर 15 दिन में समीक्षा की जाती है।