भारत के एक फैसले ने किया नेपाल को मजबूर, अकड़ रहे बालेन शाह लगाने लगे गुहार

भारत और नेपाल के बीच हाल ही में कूटनीतिक और कड़े व्यापारिक नियमों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक संबंधों और सीमावर्ती व्यापार को नियंत्रित करने के लिए जब भारत ने सख्त नियम लागू किए, तो नेपाल की राजनीति में हड़कंप मच गया। अपनी बड़बोलेपन और तीखे बयानों के लिए जाने जाने वाले काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अक्सर भारत विरोधी तेवर दिखाते नजर आते थे, अब अचानक से कूटनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए नजर आ रहे हैं और नेपाल के आंतरिक विकास व आपूर्ति के लिए भारत से मदद की गुहार लगाने पर मजबूर हो गए हैं।
क्यों पड़ी नेपाल को भारत के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरत
नेपाल भौगोलिक रूप से चारों तरफ से जमीन से घिरा देश है और अपनी रोजमर्रा की जरूरतें, ईंधन, खाद्य सामग्री और बुनियादी सामानों के आयात के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। हाल ही में जब भारत ने सीमा पार व्यापार और ट्रांजिट रूट्स को लेकर नियमों को कड़ा किया, तो नेपाल की अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों में तुरंत संकट के बादल मंडराने लगे। बालेन शाह जैसे नेताओं को यह अहसास हो गया है कि केवल बयानबाजी और तीखे तेवरों से देश की जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता, जिसके चलते उनकी सारी अकड़ काफूर हो गई है।
बालेन शाह के सुर बदले और शुरू हुई कूटनीतिक नरमी
काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह अपने कड़े फैसलों और भारत के खिलाफ की जाने वाली सोशल मीडिया बयानबाजी के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन जब जमीनी स्तर पर जनता को जरूरी सामानों की किल्लत और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा, तो उनका रुख एकदम से बदल गया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत की मजबूत विदेश नीति और स्पष्ट रुख ने नेपाल के उन नेताओं को आईना दिखा दिया है जो भारत की सदाशयता का फायदा उठाकर राजनीतिक रोटियां सेकते थे।
दोनों देशों के रिश्तों पर क्या होगा इसका असर
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत के बिना नेपाल के विकास और स्थिरता की कल्पना करना नामुमकिन है। भारत के सख्त और स्पष्ट फैसलों ने यह संदेश साफ कर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों में सम्मान और सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस दबाव के बाद अब नेपाल के हुक्मरान भविष्य में भारत विरोधी बयानों से बचेंगे और आपसी व्यापार तथा कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने पर अधिक जोर देंगे।