अगर शरीर का एक फेफड़ा काम करना बंद कर दे तो क्या इंसान जी सकता

हमारे शरीर के सबसे नाज़ुक और बेहद महत्वपूर्ण अंगों में फेफड़े (Lungs) शुमार हैं, जो हर पल हवा से ऑक्सीजन खींचकर हमारे खून में मिलाते हैं और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालते हैं। सांस लेने की यह पूरी प्रक्रिया इतनी स्वतःस्फूर्त और निरंतर चलती है कि हम कभी इस बात पर गौर ही नहीं करते कि अगर हमारे शरीर का एक फेफड़ा किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना या संक्रमण की वजह से पूरी तरह काम करना बंद कर दे, तो हमारे जीवन पर इसका क्या असर पड़ेगा। मेडिकल साइंस और पल्मोनरी एक्सपर्ट्स के अनुसार, चौंकाने वाली बात यह है कि यदि किसी इंसान का एक फेफड़ा खराब हो जाए या उसे निकालना भी पड़ जाए, तब भी वह व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है। हालांकि, इसके लिए शरीर को कुछ शारीरिक बदलावों और डॉक्टर द्वारा बताई गई जीवनशैली का पालन करना पड़ता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि एक फेफड़े के सहारे जीवन कैसे चलता है और इसके शरीर पर क्या प्रभाव होते हैं।
#1. क्या एक फेफड़े के साथ सामान्य जिंदगी मुमकिन है? जानिए मेडिकल साइंस का सच
आम तौर पर इंसानी शरीर में भगवान ने दो फेफड़े दिए हैं—दायां फेफड़ा और बायां फेफड़ा। लेकिन चिकित्सा विज्ञान इस बात की पुष्टि करता है कि मानव शरीर की बनावट और कार्यप्रणाली बहुत लचीली होती है। हमारे दोनों फेफड़ों में इतनी अतिरिक्त क्षमता (Reserve Capacity) होती है कि यदि इनमें से एक फेफड़ा किसी वजह से डैमेज हो जाए या कैंसर, टीबी, गंभीर चोट या संक्रमण के कारण सर्जरी करके उसे शरीर से बाहर भी निकाल दिया जाए, तो भी बचा हुआ दूसरा फेफड़ा अकेले ही पूरे शरीर की ऑक्सीजन की जरूरत को पूरा करने में सक्षम होता है। हालांकि, शुरुआत में मरीज को सांस लेने में थोड़ी तकलीफ या थकान महसूस हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ शरीर इस स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेता है और व्यक्ति अपनी सामान्य दिनचर्या के काम आसानी से करने लगता है।
#1. एक फेफड़ा काम करना बंद क्यों कर देता है? मुख्य वजहें और शुरुआती लक्षण
फेफड़ों का काम करना बंद करना अचानक होने वाली कोई घटना या किसी पुरानी गंभीर बीमारी का परिणाम हो सकता है। क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), गंभीर निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer), तपेदिक (TB), पल्मोनरी एम्बोलिज्म (खून का थक्का जमना) या छाती में गंभीर चोट लगने के कारण फेफड़े डैमेज हो जाते हैं। जब एक फेफड़ा काम करना बंद करता है, तो शरीर में कुछ चेतावनी भरे संकेत मिलने लगते हैं। पीड़ित व्यक्ति को थोड़ा सा भी चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने की समस्या, लगातार खांसी, छाती में भारीपन या दर्द, और खून में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण जल्दी थकान महसूस होने जैसी परेशानियां घेर लेती हैं।
#1. जब दूसरा फेफड़ा अकेला संभालता है जिम्मेदारी: शरीर में होने वाले आंतरिक बदलाव
जैसे ही शरीर का एक फेफड़ा निष्क्रिय होता है, वैसे ही शरीर की प्राकृतिक कार्यप्रणाली सक्रिय हो जाती है। स्वस्थ और चालू फेफड़ा आकार में थोड़ा फैलने लगता है और उसकी कार्यक्षमता बढ़ जाती है ताकि वह दोनों फेफड़ों का काम अकेले संभाल सके। इसके अलावा, हमारा हृदय और रक्त संचार तंत्र भी अधिक सक्रिय हो जाता है ताकि कम ऑक्सीजन मिलने पर भी शरीर के हर अंग तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। शुरुआत के कुछ हफ्तों या महीनों में भारी कसरत, दौड़ने या जिम जाने जैसे शारीरिक श्रम में दिक्कत आ सकती है, लेकिन सांस लेने के व्यायाम (Breathing Exercises) और योग की मदद से फेफड़े की बची हुई ताकत को काफी हद तक मजबूत किया जा सकता है।
#1. एक फेफड़े के साथ जीने वाले लोगों को किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान?
जिन लोगों का एक फेफड़ा काम नहीं करता है या जिन्हें सर्जिकल रिमूवल से गुजरना पड़ा है, उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर बेहद सतर्क रहना पड़ता है। ऐसे व्यक्तियों को वायु प्रदूषण, धूल-मिट्टी, सिगरेट के धुएं और हानिकारक रसायनों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, क्योंकि जरा सा संक्रमण भी उनके इकलौते काम कर रहे फेफड़े को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, उन्हें समय पर फ्लू और निमोनिया के टीके (Vaccination) लगवाने की सलाह दी जाती है। नियमित रूप से प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और हल्के एरोबिक व्यायाम करने से फेफड़ों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और आक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता में सुधार होता है। समय-समय पर पल्मोनोलॉजिस्ट से अपनी मेडिकल जांच कराते रहना लंबी और स्वस्थ जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है।