विदेश

अमेरिका और ईरान में सुलह की राह पर पाकिस्तान: डोनाल्ड ट्रंप से बड़ी डील की तैयारी

वैश्विक कूटनीति के गलियारों से इस समय एक बेहद हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बहुत बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने धुर विरोधी देश अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाते हुए दोनों देशों को सुलह की मेज पर लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। इस भू-राजनीतिक खेल के जरिए पाकिस्तान न केवल मुस्लिम जगत में अपनी खोई हुई साख वापस पाना चाहता है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के साथ एक बड़ी वित्तीय डील करने की फिराक में है, जिससे उसे अरबों डॉलर की मदद मिल सके।

डोनाल्ड ट्रंप से बड़े इनाम की उम्मीद और पाकिस्तान का आर्थिक एजेंडा पाकिस्तान की इस अचानक सक्रियता के पीछे उसका अपना बड़ा आर्थिक फायदा छिपा हुआ है। लंबे समय से आईएमएफ (IMF) और मित्र देशों के कर्ज पर निर्भर पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को इस समय भारी मात्रा में विदेशी निवेश और डॉलर की सख्त जरूरत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम कराने में थोड़ा भी सफल रहता है, तो वाशिंगटन की ओर से उसे एक बड़ा आर्थिक पैकेज, व्यापारिक छूट या फिर कर्ज माफी के रूप में भारी इनाम मिल सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की व्यावहारिक और 'डील-मेकिंग' राजनीति को देखते हुए पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस मध्यस्थता के बदले ट्रंप प्रशासन उसे मालामाल कर सकता है।

ईरान के साथ सीमाई रिश्ते और अमेरिका के साथ कूटनीतिक संतुलन पाकिस्तान के लिए यह राह इतनी आसान भी नहीं है, क्योंकि उसकी सीमा सीधे तौर पर ईरान से मिलती है और दोनों देशों के बीच अतीत में सीमा पार आतंकवाद को लेकर तनाव रहा है। इसके बावजूद, पाकिस्तान इस समय अपनी भौगोलिक स्थिति का पूरा फायदा उठाना चाहता है। एक तरफ जहां वह ईरान के साथ गैस पाइपलाइन और द्विपक्षीय व्यापार को फिर से पटरी पर लाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिका को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए उसकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इस दोहरे खेल के जरिए पाकिस्तानी हुक्मरान वाशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अपने संबंधों को एक नया आयाम देने की कोशिश में जुटे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्या सफल होगा पाकिस्तान का यह बड़ा मास्टरस्ट्रोक हालांकि, रक्षा और वैश्विक मामलों के विशेषज्ञों में इस बात को लेकर गहरा संशय है कि क्या खुद अंदरूनी अशांति और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा पाकिस्तान इतने बड़े दो महाशक्तियों के बीच समझौता करा पाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर दशकों पुराना विवाद है, जिसे सुलझाना बेहद जटिल काम है। लेकिन यदि पाकिस्तान इस कूटनीतिक प्रयास में आंशिक रूप से भी कामयाब रहता है, तो वैश्विक मंच पर उसका कद अचानक बढ़ जाएगा और उसे मिलने वाली अमेरिकी मदद उसकी खाली हो चुकी तिजोरी को भरने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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