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अमेरिका और ईरान युद्ध रोकने में पाकिस्तान हुआ फेल मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम

News India Live, Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और संभावित महायुद्ध को टालने के लिए पाकिस्तान द्वारा की गई मध्यस्थता (Mediation) की कोशिशें फिलहाल पटरी से उतरती नजर आ रही हैं। इस्लामाबाद में हुई हाई-प्रोफाइल वार्ताओं के बेनतीजा खत्म होने के बाद अब पाकिस्तान ने अपने सदाबहार दोस्त चीन से गुहार लगाई है। पाकिस्तान चाहता है कि चीन अपनी कूटनीतिक शक्ति का इस्तेमाल कर इस शांति प्रक्रिया में जान फूंके और दोनों देशों को फिर से वार्ता की मेज पर लाए।इस्लामाबाद वार्ता क्यों रही नाकाम?हाल ही में पाकिस्तान की मेजबानी में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक अमेरिका की ओर से रखी गई ‘कड़ी शर्तों’ और ईरान के अड़ियल रुख के कारण कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। ईरान का आरोप है कि अमेरिका की मांगें अनुचित हैं, जबकि वाशिंगटन का मानना है कि तेहरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। इस विफलता के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर भी सवाल उठने लगे हैं।चीन के ‘पावर’ से शांति की उम्मीदअपनी मध्यस्थता की कोशिशों को धराशायी होते देख पाकिस्तान ने अब बीजिंग से संपर्क साधा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और शीर्ष अधिकारियों ने चीनी समकक्षों से बातचीत कर उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। पाकिस्तान का मानना है कि ईरान पर चीन का गहरा प्रभाव है और यदि बीजिंग सीधे तौर पर इस वार्ता में कूदता है, तो अमेरिका पर भी दबाव बनेगा। चीन ने भी संकेत दिए हैं कि वह मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए ‘रचनात्मक भूमिका’ निभाने को तैयार है।पाकिस्तान की मजबूरी: युद्ध से अर्थव्यवस्था को खतरापाकिस्तान के लिए यह मध्यस्थता केवल कूटनीतिक दिखावा नहीं, बल्कि एक मजबूरी भी है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच पूर्ण युद्ध शुरू होता है, तो इसका सबसे बुरा असर पाकिस्तान की पहले से ही जर्जर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ईंधन की कीमतों में उछाल और क्षेत्रीय अस्थिरता पाकिस्तान को आर्थिक रूप से पूरी तरह बर्बाद कर सकती है। यही वजह है कि सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस युद्ध को टालने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।ट्रंप की ‘शांति योजना’ और ईरान का शकअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए ‘शांति प्रस्ताव’ को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है। ईरान को शक है कि पाकिस्तान इस वार्ता में अमेरिका के पक्ष में ‘डबल गेम’ खेल रहा है। तेहरान का मानना है कि इस्लामाबाद केवल अमेरिकी दबाव को उन पर थोपने का जरिया बन रहा है। इसी विश्वास की कमी को दूर करने के लिए अब पाकिस्तान, चीन को एक ‘न्यूट्रल पावर’ (तटस्थ शक्ति) के रूप में आगे कर रहा है।क्या होगा अगला कदम?आने वाले दिनों में चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक होने की संभावना है। यदि चीन इस प्रक्रिया में आधिकारिक तौर पर शामिल होता है, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित होगा। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजिंग और इस्लामाबाद मिलकर ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के बीच की खाई को पाट पाएंगे।

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