विदेश

अमेरिका देखता रह गया और भारत ने कर दिया खेला पुतिन की यात्रा के वो सच जो कोई नहीं बता रहा

News India Live, Digital Desk : पिछले दो दिनों से टीवी और सोशल मीडिया पर बस एक ही चेहरा छाया हुआ था व्लादिमीर पुतिन। रूस के राष्ट्रपति भारत आए, पीएम मोदी से मिले, और अपनी “पुरानी वाली” एंबेस्डर कार में बैठकर शान से निकल गए। लेकिन इन दो दिनों की चकाचौंध के बाद सवाल वही खड़ा होता है”आखिर इस सबसे हमें क्या मिला?”दुनिया, खासकर अमेरिका और यूरोप, टकटकी लगाए देख रहे थे कि शायद भारत रूस को “नाराज” करेगा या यूक्रेन युद्ध पर कुछ सख्त बोलेगा। लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा। चलिए आसान भाषा में डिकोड करते हैं इस विजिट की सबसे बड़ी बातें जो आपको पता होनी चाहिए।1. “तुम चिल्लाते रहो, हम व्यापार करेंगे”सबसे बड़ा टेकअवे (Takeaway) यही है कि भारत ने पश्चिमी देशों के दवाब को सिरे से नकार दिया है। मोदी और पुतिन ने मिलकर तय किया है कि 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर (100 Billion Dollar Trade Target) तक ले जाना है। इसका मतलब समझते हैं? दोनों देश अब डरने वाले नहीं हैं। अब बात सिर्फ हथियारों की नहीं होगी, बल्कि फर्टिलाइजर, कोयला और खेती-किसानी की भी होगी।2. सस्ता तेल और अपनी शर्तेंअगर आप पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर चिंतित रहते हैं, तो ये खबर आपके लिए अच्छी है। पुतिन ने साफ कर दिया है कि भारत को सस्ते कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई नहीं रुकेगी। चाहे दुनिया में कितनी भी उथल-पुथल हो, भारत की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा रूस की प्राथमिकता रहेगी। मतलब साफ है, भारत अपनी शर्तों पर दुनिया से डील कर रहा है।3. रूस में अब ‘देसी’ हुनर चलेगाएक बहुत ही इंट्रेस्टिंग बात निकल कर आई है लेबर मोबिलिटी (Labor Mobility) पर। रूस को काम करने वालों की जरूरत है और भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा यंग टैलेंट है। दोनों नेताओं के बीच इस पर सहमति बनी है कि स्किल्ड भारतीयों को रूस में काम करने के मौके आसानी से मिलेंगे। यानी भविष्य में रूस जाने का वीजा और वहां सेटल होना आपके लिए थोड़ा आसान हो सकता है।4. पेमेंट्स का पंगा सुलझेगा?रूस के साथ व्यापार में सबसे बड़ी दिक्कत ‘पैसों के लेनदेन’ (Payments) की आ रही थी क्योंकि डॉलर पर पाबंदी है। इस दौरे पर दोनों देशों ने अपनी-अपनी करंसी यानी रुपए और रूबल में व्यापार बढ़ाने और नए रास्ते खोजने पर जोर दिया है। अगर ऐसा हुआ, तो अमेरिकी डॉलर पर हमारी निर्भरता और कम हो जाएगी।

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