आशा भोसले का वो पाकिस्तानी गाना जिसने मचा दी थी हलचल, लीड एक्टर का नाम जानकर रह जाएंगे दंग

News India Live, Digital Desk: भारतीय संगीत की लीजेंड आशा भोसले की आवाज का जादू सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी सिर चढ़कर बोलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आशा ताई ने एक पाकिस्तानी फिल्म के लिए भी अपनी सुरीली आवाज दी थी? इस फिल्म का नाम था ‘सरगम’ (Sargam)। इस खबर का सबसे हैरान करने वाला पहलू फिल्म की स्टारकास्ट और इसके पीछे की कहानी है, जिसे जानकर आज की पीढ़ी के फैंस दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे।पाकिस्तानी फिल्म ‘सरगम’ और आशा ताई की जुगलबंदी90 के दशक में रिलीज हुई पाकिस्तानी फिल्म ‘सरगम’ संगीत के शौकीनों के बीच आज भी एक मील का पत्थर मानी जाती है। इस फिल्म के संगीत निर्देशक कोई और नहीं बल्कि मशहूर संगीतकार अदनान सामी थे। अदनान ने ही आशा भोसले से इस फिल्म के लिए गाने का अनुरोध किया था। आशा ताई ने अपनी जादुई आवाज में फिल्म के लिए ‘वो आए न आए’ जैसे सदाबहार गाने गाए, जो पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी काफी लोकप्रिय हुए।लीड कास्ट का नाम जानकर चौंक जाएंगे आप!इस फिल्म की मुख्य भूमिका में जो चेहरा नजर आया, उसे आज पूरी दुनिया एक बेहतरीन गायक के तौर पर जानती है। फिल्म ‘सरगम’ में मुख्य अभिनेता के रूप में अदनान सामी ने खुद काम किया था। उनके साथ लीड एक्ट्रेस के तौर पर उनकी तत्कालीन पत्नी और मशहूर पाकिस्तानी अभिनेत्री जेबा बख्तियार थीं। जेबा को भारतीय दर्शक फिल्म ‘हिना’ की मुख्य अभिनेत्री के रूप में पहचानते हैं। एक ही फिल्म में अदनान सामी का अभिनय, संगीत और आशा भोसले की आवाज का संगम किसी करिश्मे से कम नहीं था।क्यों खास था यह कोलाबोरेशन?भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के दौर में भी कला और संगीत ने हमेशा पुल का काम किया है। आशा भोसले का एक पाकिस्तानी फिल्म के लिए गाना यह साबित करता है कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती। इस फिल्म के गानों को लंदन के मशहूर स्टूडियो में रिकॉर्ड किया गया था। ‘सरगम’ उस दौर की सबसे सफल फिल्मों में से एक रही और इसने पाकिस्तान में कई रिकॉर्ड तोड़े।आज भी ताजा हैं यादेंआशा भोसले और अदनान सामी की इस जुगलबंदी ने ‘सरगम’ को अमर बना दिया। आज जब सोशल मीडिया पर पुराने गानों और ऐतिहासिक किस्सों का दौर चल रहा है, तो आशा ताई का यह ‘पाकिस्तानी कनेक्शन’ फिर से सुर्खियों में है। लोग इस बात पर हैरान हैं कि कैसे उस समय बिना किसी विवाद के इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय कलात्मक साझेदारी मुमकिन हो पाई थी।