इंडियन आर्मी में भर्ती होने का सुनहरा मौका यूपी-बिहार के युवाओं के लिए सेना ने खोले द्वार, नेपाली युवाओं का मोहभंग

News India Live, Digital Desk: भारतीय सेना में सेवा करने का जज्बा रखने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सेना द्वारा पोर्टर (Porter) भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती की सबसे दिलचस्प बात यह है कि पारंपरिक रूप से इन पदों पर काबिज होने वाले नेपाली युवाओं की संख्या में इस बार भारी कमी देखी जा रही है, जबकि यूपी और बिहार के नौजवानों में जबरदस्त उत्साह है। धारचूला और मुनस्यारी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में देश सेवा के साथ-साथ रोजगार पाने के लिए युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा है।दुर्गम चोटियों पर सेना के ‘मददगार’ बनेंगे मैदानी युवाभारतीय सेना के पोर्टर दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में रसद, गोला-बारूद और अन्य जरूरी सामान अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां गाड़ियां नहीं जा सकतीं, वहां ये पोर्टर सेना की रीढ़ साबित होते हैं। इस बार की भर्ती में मैदानी इलाकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और बिहार के विभिन्न जिलों से आए युवाओं की संख्या ने सबको हैरान कर दिया है। भर्ती केंद्र पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, जहां शारीरिक दक्षता परीक्षा के जरिए चयन किया जा रहा है।आखिर क्यों नेपाली युवाओं ने बनाई दूरी?दशकों से भारतीय सेना में पोर्टर के रूप में काम करने वाले नेपाली युवाओं की दिलचस्पी इस बार कम नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण हो सकते हैं। नेपाल में स्थानीय रोजगार के बढ़ते अवसर या अन्य देशों की ओर पलायन को भी इसका एक कारण माना जा रहा है। हालांकि, नेपाली युवाओं की कमी को यूपी-बिहार के मेहनती युवाओं ने पूरी तरह ढक दिया है। सेना के अधिकारियों के लिए भी यह सुखद अनुभव है कि देश के आंतरिक राज्यों के युवा इन कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आ रहे हैं।अच्छी सैलरी और सुविधाओं का मिल रहा लाभआर्मी पोर्टर के रूप में काम करने वाले युवाओं को न केवल एक निश्चित वेतन मिलता है, बल्कि उन्हें सेना की ओर से मुफ्त भोजन, वर्दी और चिकित्सा सुविधाएं भी दी जाती हैं। काम की अवधि आमतौर पर 179 दिनों की होती है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। कठिन चढ़ाई और भारी वजन ढोने की चुनौती के बावजूद युवा इसे एक गौरवशाली काम मान रहे हैं। यूपी से आए एक अभ्यर्थी ने बताया कि सेना की वर्दी पहनना और उनके साथ काम करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कड़े मानकसेना ने इस भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखा है। उम्मीदवारों का स्वास्थ्य परीक्षण और शारीरिक क्षमता की जांच कड़ी निगरानी में की जा रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए फेफड़ों की मजबूती और शारीरिक सहनशक्ति (Endurance) सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है। चयनित उम्मीदवारों को जल्द ही ट्रेनिंग के बाद विभिन्न यूनिटों के साथ अटैच कर दिया जाएगा। उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों पर अब यूपी और बिहार की बोलियां गूंजेंगी, जो राष्ट्रीय एकता का एक नया उदाहरण पेश कर रही हैं।