इमरान खान के लॉन्ग मार्च से पहले पूरे पंजाब में धारा 144 लागू, आत्मघाती आतंकी हमले के अलर्ट के बीच इंटरनेट बंद करने का आदेश

पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर भीषण टकराव और आंतरिक अस्थिरता के मुहाने पर आकर खड़ी हो गई है। जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की तत्काल रिहाई की मांग को लेकर पार्टी ने आगामी 27 सितंबर 2026 को देश की राजधानी इस्लामाबाद की ओर एक विशाल और निर्णायक 'लॉन्ग मार्च' निकालने का खुला ऐलान किया है। इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली संघीय सरकार और पंजाब प्रांत के प्रशासन की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। राजधानी इस्लामाबाद पर पीटीआई कार्यकर्ताओं के संभावित घेराव और शक्ति प्रदर्शन को कुचलने के लिए सरकारी मशीनरी ने व्यापक दमनकारी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पंजाब की प्रांतीय सरकार ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का हवाला देते हुए समूचे पंजाब प्रांत में आगामी 6 अक्टूबर 2026 तक धारा 144 लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
इस प्रतिबंधात्मक आदेश के प्रभावी होते ही पूरे पंजाब प्रांत में अगले 13 दिनों के लिए किसी भी सार्वजनिक स्थल पर पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक साथ एकत्र होने, रैलियां निकालने, जुलूस आयोजित करने, धरना देने और किसी भी प्रकार के सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन पर पूर्ण पाबंदी लगा दी गई है। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर आग्नेयास्त्रों, लाठी-डंडों या किसी भी प्रकार के घातक हथियारों को लेकर चलने पर भी सख्त रोक लगा दी गई है। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने मार्च से कई दिन पहले ही पीटीआई के शीर्ष नेताओं, पूर्व मंत्रियों, जमीनी पदाधिकारियों और यहां तक कि इमरान खान के करीबी परिजनों के आवासों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है और सैकड़ों लोगों को एहतियातन हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर भेज दिया है।
खुफिया एजेंसियों ने जारी किया फिदायीन हमले का अलर्ट, वीबीआईईडी और आत्मघाती हमलों का मंडराया साया
पंजाब सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए कड़े आदेशों के पीछे केवल राजनीतिक टकराव ही नहीं, बल्कि एक बेहद गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा संकट का भी हवाला दिया गया है। पाकिस्तान की शीर्ष खुफिया एजेंसियों ने गृह मंत्रालय को कई संवेदनशील इनपुट्स और थ्रेट अलर्ट्स भेजे हैं, जिनमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि इस बड़े राजनीतिक जमावड़े का फायदा उठाकर प्रतिबंधित आतंकी संगठन विनाशकारी घटनाओं को अंजाम दे सकते हैं। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, राजनीतिक रैलियों, मार्च के मुख्य मार्गों और नेताओं के काफिलों को निशाना बनाने के लिए आत्मघाती हमलावरों (Suicide Bombers) और विस्फोटकों से लदी गाड़ियों के जरिए वाहन जनित आईईडी (VBIED) हमलों की गहरी साजिश रची जा चुकी है।
इन खौफनाक आतंकी चेतावनियों के मद्देनजर राज्य प्रशासन ने यह दावा किया है कि धारा 144 का क्रियान्वयन केवल राजनीतिक कारणों से नहीं बल्कि आम नागरिकों और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए अनिवार्य हो गया था। खुफिया सूत्रों का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा से चलने वाले काफिलों में उपद्रवी और हथियारबंद तत्व शामिल हो सकते हैं, जो सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें भड़काकर देश में व्यापक अशांति पैदा करने का प्रयास कर सकते हैं। यही वजह है कि पूरे पंजाब में पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों, दंगा नियंत्रण दस्तों और रेंजर्स को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके।
अटॉक और रावलपिंडी में मोबाइल-इंटरनेट सेवा बंद करने की तैयारी, मार्च के प्रवेश द्वारों की होगी नाकेबंदी
पीटीआई के आंदोलन को डिजिटल और तकनीकी रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने के लिए पंजाब के गृह मंत्रालय ने पाकिस्तान की संघीय सरकार के आंतरिक मंत्रालय (गृह मंत्रालय) को एक गोपनीय पत्र लिखा है। इस पत्र में 27 सितंबर को सुबह 9 बजे से ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अटॉक जिले में सभी मोबाइल नेटवर्क, सेल्यूलर कॉलिंग और हाई-स्पीड मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद (Blackout) करने की सीधी सिफारिश की गई है। इसके अलावा, रावलपिंडी के उन सभी संवेदनशील और प्रमुख शहरी इलाकों में भी मोबाइल इंटरनेट और संचार सेवाओं को निलंबित करने का औपचारिक आग्रह किया गया है जो इस्लामाबाद की सीमा से सीधे जुड़ते हैं।
संचार सेवाओं को बंद करने के पीछे की रणनीतिक मंशा यह है कि पीटीआई के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच वास्तविक समय में संपर्क टूट जाए और भीड़ को एक जगह संगठित होने से रोका जा सके। असल में खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार और स्थानीय समर्थकों के दम पर निकलने वाला यह लॉन्ग मार्च अटॉक जिले की सीमा से पंजाब में प्रवेश करेगा और फिर जीटी रोड होते हुए रावलपिंडी के रास्ते इस्लामाबाद की राजधानी सीमा में दाखिल होगा। सरकार की पूरी योजना इस बात पर टिकी है कि अटॉक और रावलपिंडी के मुख्य प्रवेश द्वारों पर ही बड़े-बड़े शिपिंग कंटेनर्स रखकर, सड़कों को खोदकर और भारी पुलिस बल की तैनाती करके इस मार्च को राजधानी की सीमा से मीलों पहले ही रोक दिया जाए।
शहबाज सरकार और पीटीआई में आर-पार की जंग: इमरान खान की रिहाई पर टिका पाकिस्तान का भविष्य
पाकिस्तान में इस समय जो राजनीतिक संकट गहरा रहा है, वह पिछले कई दशकों के सबसे तनावपूर्ण दौर में पहुंच चुका है। अदियाला जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान अपने समर्थकों को लगातार अंतिम और निर्णायक आंदोलन का संदेश भेज रहे हैं। पीटीआई का स्पष्ट रुख है कि वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन सरकार अलोकतांत्रिक हथकंडे अपनाकर विपक्षी आवाजों को दबा रही है और फर्जी मुकदमों के जरिए उनके नेतृत्व को सलाखों के पीछे रखा गया है। पीटीआई प्रवक्ताओं ने धारा 144 और पुलिसिया धरपकड़ को सरकार की घबराहट और कायरता करार दिया है और दावा किया है कि जनता के आक्रोश को अब किसी सरकारी पाबंदी या इंटरनेट बैन से रोका नहीं जा सकता।
वहीं दूसरी तरफ, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और उनकी गठबंधन सरकार का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने या राजधानी को बंधक बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को साफ निर्देश दिए हैं कि अगर कोई भी समूह कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उससे पूरी कड़ाई से निपटा जाए। अब पूरी दुनिया की नजरें 27 सितंबर के उस दिन पर टिक गई हैं जब हजारों की तादाद में पीटीआई समर्थक सुरक्षा घेरों को तोड़कर इस्लामाबाद की ओर बढ़ने की कोशिश करेंगे, जिसने पाकिस्तान को एक अभूतपूर्व आंतरिक टकराव और हिंसा के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।