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ईरान पर US-इजराइल के हमलों से भीषण तबाही, क्या 12 साल पीछे चला गया देश? रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

News India Live, Digital Desk: अमेरिका और इजराइल के हालिया सैन्य हमलों ने ईरान की कमर तोड़ कर रख दी है। युद्ध के मैदान से जो खबरें निकलकर आ रही हैं, वे ईरान के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और आर्थिक विशेषज्ञों की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की बुनियादी संरचना और अर्थव्यवस्था को इतना गहरा जख्म मिला है कि उसकी भरपाई करने में ही 12 साल से अधिक का समय लग सकता है। हमलों ने न केवल सैन्य ठिकानों बल्कि देश की आर्थिक जीवनरेखा माने जाने वाले तेल और गैस संयंत्रों को भी बुरी तरह तबाह कर दिया है।ईरान की इकोनॉमी पर ‘महाप्रहार’: सेंट्रल बैंक ने दी चेतावनीईरान के सेंट्रल बैंक ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन को सौंपी एक गोपनीय रिपोर्ट में आगाह किया है कि देश की अर्थव्यवस्था ‘वेंटिलेटर’ पर है। हमलों के कारण ईरान के प्रमुख तेल रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल प्लांट और निर्यात बंदरगाहों को भारी नुकसान पहुँचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन संयंत्रों को फिर से उसी क्षमता पर लाने के लिए अरबों डॉलर और एक दशक से ज्यादा का वक्त लगेगा। इस तबाही के कारण ईरान में महंगाई सातवें आसमान पर पहुँच गई है और बुनियादी चीजों की भारी किल्लत हो गई है।परमाणु और सैन्य ढांचे को पहुँचा अपूरणीय नुकसानइजराइल और अमेरिका के दावों के मुताबिक, उनके सटीक हमलों (Precision Strikes) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल गोदामों को काफी हद तक ‘न्यूट्रलाइज’ कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के कई भूमिगत सैन्य परिसर अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। इन केंद्रों का पुनर्निर्माण तकनीकी और आर्थिक रूप से ईरान के लिए एक पहाड़ जैसी चुनौती है। 12 साल का अनुमान केवल भौतिक ढांचे के लिए है, जबकि खोई हुई सैन्य शक्ति को वापस पाना इससे भी लंबी प्रक्रिया हो सकती है।आम जनता पर टूटा मुसीबतों का पहाड़युद्ध की विभीषिका केवल धुआं और धमाकों तक सीमित नहीं है। हवाई हमलों में ईरान के प्रमुख हवाई अड्डों, बिजली घरों और संचार प्रणालियों को निशाना बनाया गया है। इसके चलते राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट बताती है कि बुनियादी ढांचे की मरम्मत में होने वाली देरी से ईरान का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) रसातल में जा सकता है, जिससे आने वाली एक पूरी पीढ़ी को गरीबी और बेरोजगारी का सामना करना पड़ सकता है।हॉर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक संकटईरान पर हुए इन हमलों का असर केवल उसी तक सीमित नहीं है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई चेन ठप पड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान अगले कुछ वर्षों में अपनी तेल उत्पादन क्षमता बहाल नहीं कर पाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक अस्थिर रह सकती हैं। दुनिया अब यह देख रही है कि क्या ईरान इन मलबों से उठकर फिर से खड़ा हो पाएगा या यह 12 साल का लंबा इंतजार उसे और गहरे संकट में धकेल देगा।

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