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उत्तराखंड में कुदरत का कहर: 14 से 17 अगस्त तक भारी से अति भारी बारिश का रेड-ऑरेंज अलर्ट, पहाड़ों पर भयावह लैंडस्लाइड और नदियों के उफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त

देवभूमि उत्तराखंड में इस मानसूनी सीजन में कुदरत का आक्रामक रुख थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही आफत की बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने राज्य के लिए नई एडवाइजरी जारी करते हुए चेतावनी दी है कि 14 से 17 अगस्त 2026 के दौरान उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में भीषण से अति भीषण बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है। पर्वतीय ढलाने लगातार हो रही बारिश से बेहद संवेदनशील हो चुकी हैं, जिससे कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों पर लैंडस्लाइड का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संवेदनशील जिलों के जिलाधिकारियों को चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं।

14 से 17 अगस्त तक मौसम विभाग की चेतावनी: कई जिलों में मूसलाधार बारिश के आसार

मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्वानुमान के अनुसार, 14 अगस्त से 17 अगस्त के बीच उत्तराखंड के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखा जाएगा। देहरादून, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में कहीं-कहीं अत्यंत तीव्र दौर (Intense Spell) की बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर कम समय में अत्यधिक बारिश (Cloudburst-like conditions) जैसी स्थिति बन सकती है। इसके साथ ही, मैदानी इलाकों जैसे हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी तेज बौछारों के साथ जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है।

चारधाम यात्रा मार्गों पर मलबा आने से लैंडस्लाइड का बढ़ा खतरा, हाईवे ठप

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) चमोली जिले के हेलंग, पागलनाला और नंदप्रयाग के पास बार-बार पहाड़ी से विशालकाय पत्थर और मलबा गिरने के कारण घंटों बाधित हो रहा है। वहीं, गंगोत्री नेशनल हाईवे धरासू और नालूपानी के पास मलबे के कारण ठप पड़ा है, जबकि यमुनोत्री हाईवे सिलाई बैंड, सयानाचट्टी और जंगलचट्टी में लगातार हो रहे लैंडस्लाइड की वजह से बंद हो रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सीमा सड़क संगठन (BRO) की जेसीबी और पोकलैंड मशीनें मार्ग खोलने के काम में दिन-रात जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार गिरते पत्थरों के कारण राहत और बचाव कार्य में भारी जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

उफान पर अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी; खतरे के निशान के पास पहुंचा गंगा का जलस्तर

पहाड़ों पर रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश का सीधा असर राज्य की प्रमुख नदियों और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर पर पड़ रहा है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं, जबकि देवप्रयाग में भागीरथी नदी का जलस्तर चेतावनी के स्तर को पार कर चुका है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा नदी का वेग और जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) और स्थानीय प्रशासन लाउडस्पीकर के माध्यम से नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क कर रहे हैं और सुरक्षित स्थानों या राहत शिविरों में जाने की अपील कर रहे हैं।

आपदा प्रबंधन और प्रशासन हाई अलर्ट पर: मुख्यमंत्री ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आपदा परिचालन केंद्र (State Disaster Operation Center) पहुंचकर प्रदेश भर में हो रही बारिश और आपदा की स्थिति की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और स्थानीय पुलिस बल को मुस्तैद रखा जाए। अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को पूर्व में ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए कई जिलों में प्राथमिक से लेकर 12वीं तक के सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में एहतियातन छुट्टी घोषित की जा रही है।

पर्यटकों, श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के लिए विशेष एडवाइजरी

14 से 17 अगस्त तक के भारी बारिश के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड शासन ने राज्य में आने वाले पर्यटकों, चारधाम यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए एक विस्तृत सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है:

  1. अनावश्यक यात्रा से बचें: भारी बारिश की अवधि के दौरान जब तक बहुत आवश्यक न हो, पर्वतीय मार्गों पर रात के समय यात्रा करने से पूरी तरह बचें।

  2. मौसम और मार्ग की अद्यतन जानकारी रखें: यात्रा शुरू करने से पहले उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और मौसम विभाग के अपडेट्स अवश्य चेक करें।

  3. नदी-नालों के किनारे जाने पर पाबंदी: उफनते बरसाती नालों और नदियों के किनारे जाने से बचें तथा भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में गाड़ियां न रोकें।

  4. आपातकालीन नंबर पास रखें: किसी भी प्रकार की दुर्घटना या सड़क मार्ग बंद होने पर आपातकालीन स्थिति में 112 या जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के नंबरों पर तत्काल संपर्क करें।

उत्तराखंड में आगामी चार दिन मौसम की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। प्रशासन पूरी मुस्तैदी से स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि जन-धन की हानि को रोका जा सके।

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