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भारी बारिश और बाढ़ के चलते यूपी, उत्तराखंड और बिहार में स्कूलों की छुट्टी, जानिए अपने जिले का ताजा अपडेट

देश के कई हिस्सों में मानसून के उग्र रूप और लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अत्यधिक वर्षा, नदियों के उफान और जलभराव की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी भारी बारिश के रेड और ऑरेंज अलर्ट के बाद बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के कई जिलों में स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा के चलते सड़कों पर पानी भर गया है और यातायात ठप हो गया है, जिससे अभिभावक और छात्र दोनों परेशान हैं।

पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक मौसम का मिजाज बेहद बिगड़ा हुआ नजर आ रहा है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति के कारण जिलाधिकारियों ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि छात्रों को किसी भी तरह के जोखिम में न डाला जाए। सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी सभी प्रकार के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में स्थिति सामान्य होने तक शैक्षणिक कार्य स्थगित रखने या अवकाश घोषित करने की प्रक्रिया तेजी से लागू की गई है।

उत्तर प्रदेश: बरेली, मुरादाबाद, पीलीभीत समेत कई जिलों में डीएम का अवकाश आदेश

उत्तर प्रदेश के मध्य, पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। राजधानी लखनऊ, कानपुर, बरेली, पीलीभीत, मुरादाबाद, लखीमपुर खीरी और फर्रुखाबाद जैसे क्षेत्रों में असाधारण बारिश रिकॉर्ड की गई है। जलभराव और जर्जर भवनों के खतरे को देखते हुए मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत और आसपास के जिलों में जिला प्रशासन ने कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी बोर्डों के स्कूलों में छुट्टी का ऐलान किया है। कुछ जिलों में केवल प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों को बंद रखा गया है, जबकि गंभीर जलभराव वाले जिलों में इंटरमीडिएट तक के सभी संस्थानों को बंद रखने का आदेश है।

स्थानीय जिलाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मौसम की गंभीरता के आधार पर स्कूल प्रबंधन को दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना होगा। बिजली के खंभों में करंट आने के खतरे, नदियों के किनारे कटान और सड़कों के धंसने के चलते बच्चों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई है। अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी आपात सूचना या अवकाश की पुष्टि के लिए संबंधित स्कूल प्रशासन या आधिकारिक जिला पोर्टल के संपर्क में रहें।

उत्तराखंड में रेड अलर्ट के बीच स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद, चारधाम यात्रा भी प्रभावित

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में स्थिति और भी ज्यादा संवेदनशील बनी हुई है। मौसम विभाग द्वारा बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, देहरादून और पौड़ी जनपदों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ों में भूस्खलन, मलबा गिरने और संपर्क मार्ग टूटने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पहले ही कई प्रभावित जिलों में कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन तंत्र को 24 घंटे सतर्क रहने का निर्देश दिया है। भारी बारिश और भूस्खलन के चलते चारधाम यात्रा मार्गों पर भी आवाजाही सीमित की गई है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि संवेदनशील पहाड़ी ढलानों और बरसाती नालों के पास रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। जब तक मौसम की स्थिति में स्पष्ट सुधार नहीं हो जाता, तब तक पर्वतीय जनपदों में स्कूल खोलने का जोखिम नहीं लिया जा रहा है।

बिहार और अन्य राज्यों की स्थिति: नेपाल से छोड़े गए पानी और बारिश ने बढ़ाई चिंता

उत्तर भारत के साथ-साथ बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी हालात चिंताजनक हैं। नेपाल के तराई क्षेत्रों और बिहार के पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी और आसपास के जिलों में भारी वर्षा के चलते गंडक और कोसी जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। वाल्मीकिनगर और बीरपुर बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण कई निचले गांवों में पानी घुस चुका है। स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित अंचलों में स्कूलों के संचालन को फिलहाल टाल दिया है और प्रभावित भवनों को राहत शिविरों में तब्दील करने की तैयारी की जा रही है।

दूसरी ओर, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत स्थिर है, इसलिए वहां सामान्य रूप से स्कूल खुले रहने की संभावना है। हालांकि, ओडिशा और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में स्थानीय बारिश के चलते क्षेत्रीय आधार पर छुट्टियां घोषित की गई हैं। शिक्षा विभागों ने निर्देश दिया है कि मौसम में सुधार होते ही कक्षाओं को दोबारा शुरू किया जाएगा, लेकिन जब तक अलर्ट जारी है, तब तक बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।

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