“एक भी गाड़ी खराब हुई तो नाम बताओ”: एथनॉल का विरोध करने वालों पर भड़के नितिन गडकरी, बोले— किसानों को हुआ 45,000 करोड़ का बंपर मुनाफा

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एथनॉल-मिश्रित पेट्रोल (Ethanol-Blended Petrol) की आलोचना करने वालों को खुले मंच से चुनौती देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। एक सम्मेलन के दौरान गडकरी ने विरोधियों पर तीखा हमला बोला और पेट्रोल में 20% एथनॉल (E20) के मिश्रण से गाड़ियों को नुकसान पहुंचने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ज्यादा एथनॉल मिश्रण को लेकर बाजार में जानबूझकर गलत जानकारी और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिसके पीछे कुछ खास हितों वाले लोगों का हाथ है।
"मक्के की कीमत 1200 से बढ़कर 2800 रुपये हुई"
नितिन गडकरी ने एथनॉल नीति से किसानों को हुए आर्थिक फायदों के आंकड़े पेश करते हुए कहा, “जब हमारी सरकार ने मक्के से एथनॉल बनाने का ऐतिहासिक फैसला किया था, तब बाजार में मक्के की कीमत महज ₹1,200 प्रति क्विंटल थी, जबकि उसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹1,800 प्रति क्विंटल था। लेकिन इस नीति के लागू होने के बाद, आज मक्के की बाजार कीमत बढ़कर ₹2,800 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है।” केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि मक्के और गन्ने से एथनॉल उत्पादन के कारण अकेले उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की जेब में ₹45,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा पहुंचा है।
₹22 लाख करोड़ के आयात बोझ से मिलेगी मुक्ति
‘विकसित भारत’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि कोयला, डीजल और पेट्रोल जैसे जीवाश्म ईंधनों (Fossil Fuels) पर भारत की अत्यधिक निर्भरता देश के लिए एक बहुत बड़ा आर्थिक बोझ है। भारत को अपनी ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना ₹22 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आयात (Import) पर खर्च करनी पड़ती है, जो सीधे तौर पर विदेशी हाथों में जाती है। इसके साथ ही इससे पर्यावरण को भी गंभीर खतरा होता है। ऐसे में आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए स्वच्छ व स्वदेशी ऊर्जा को अपनाना बेहद जरूरी है।
कारों में खराबी के दावों को दी खुली चुनौती
E20 ईंधन से इंजन खराब होने की अफवाहों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गडकरी ने कहा, “देशभर में E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के कारण किसी भी कार या दोपहिया वाहन में समस्या आने का एक भी सिंगल मामला सामने नहीं आया है। क्या पूरे देश में कोई एक भी ऐसी कार है जिसे इस पेट्रोल से दिक्कत हुई हो? अगर है, तो बस एक गाड़ी का नाम बताइए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत ने तय समय से पहले ही पेट्रोल में 20% एथनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे न केवल कच्चे तेल का आयात घटा है बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आई है।
अब E85, E100 और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की तैयारी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में ग्रीन फ्यूल का दायरा बढ़ाने के लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 (CMVR) में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव दिया है। इस कदम का मुख्य मकसद सभी कैटेगरी की गाड़ियों के लिए 'फ्लेक्स-फ्यूल' (Flex-Fuel) और पूरी तरह से बायोफ्यूल पर चलने वाले इंजनों का रास्ता साफ करना है। सरकार का फोकस अब पेट्रोल में 85% एथनॉल मिश्रण वाले E85 ईंधन और लगभग 100% शुद्ध एथनॉल पर चलने वाली गाड़ियों के लिए E100 ईंधन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही पर्यावरण को बचाने के लिए B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG (H-CNG) मिश्रण के इस्तेमाल पर भी तेजी से काम चल रहा है।
ब्राजील की तर्ज पर पेट्रोल पंपों पर मिलेंगे विकल्प
एथनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्के, खराब चावल और बायोमास स्रोतों से किया जाता है। वर्तमान में भारत के पेट्रोल पंपों पर गाड़ी मालिकों के पास अलग-अलग तरह के ईंधन चुनने का विकल्प नहीं होता है, लेकिन सरकार अब ब्राजील की तर्ज पर नई व्यवस्था लाने पर विचार कर रही है। ब्राजील के कानून में ग्राहकों को पेट्रोल पंप पर अलग-अलग कीमतों और मिश्रण वाले फ्यूल चुनने की आजादी होती है, जहां ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन पर सरकार की तरफ से भारी टैक्स छूट और कम कीमत का फायदा मिलता है।
परिवार पर लगे आरोपों पर गडकरी का करारा जवाब
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर अक्सर विरोधी यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके परिवार के सदस्य चीनी मिलों और एथनॉल उत्पादन से जुड़े हैं, इसलिए वे इसे इतना बढ़ावा दे रहे हैं। इस आरोप पर स्थिति साफ करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही उनके परिवार के सदस्यों के पास चीनी मिलें हैं, लेकिन उनकी कंपनियां वित्तीय रूप से एथनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे यह काम अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि देश के करोड़ों किसानों को समृद्ध बनाने और भारत का पैसा भारत में रखने के लिए कर रहे हैं।