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एपस्टीन कांड में नया मोड़: सीक्रेट फाइल्स से भड़के पीड़ित, संपत्ति पर सामूहिक केस दर्ज, ₹57 करोड़ मुआवजे की मांग

दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जेल में संदिग्ध मौत के वर्षों बाद भी उससे जुड़े काले कारनामों का साया खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एपस्टीन के आलीशान ठिकानों से जब्त की गई 'सीक्रेट फाइल्स' और बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी अश्लील सामग्री (CSAM) के सार्वजनिक होने और आज भी सर्कुलेट होने के खुलासे के बाद पीड़ितों का आक्रोश एक बार फिर सड़कों से लेकर अदालतों तक फूट पड़ा है। अमेरिका की एक संघीय अदालत में दो पीड़ित महिलाओं ने आगे आकर एपस्टीन के पूरे एस्टेट (संपत्ति) और उसके वित्तीय प्रबंधकों के खिलाफ एक बड़ा सामूहिक मुकदमा (Class-Action Lawsuit) दायर कर दिया है। इन महिलाओं का गंभीर आरोप है कि उनके बचपन की बेहद संवेदनशील और आपत्तिजनक तस्वीरों को एपस्टीन ने अपने निजी कलेक्शन में कैद किया था, जिसका दंश वे आज भी झेल रही हैं।

जेन डो और एमी की दास्तान: 12 साल की उम्र में खींची गई अश्लील तस्वीरें आज भी बिकने का संगीन आरोप

इस नए कानूनी मोर्चे का नेतृत्व करने वाली दो प्रमुख याचिकाकर्ताओं में से एक की पहचान 'जेन डो' के रूप में गोपनीय रखी गई है, जबकि दूसरी महिला की पहचान 'एमी' के तौर पर सामने आई है। जेन डो ने अपने शपथपत्र में अदालत को बताया कि जब वह महज 12 साल की मासूम बच्ची थी, तब जेफ्री एपस्टीन ने फुसलाकर और डरा-धमकाकर उसकी अश्लील तस्वीरें अपने कैमरों में उतारी थीं। वहीं दूसरी पीड़िता एमी ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में जब अमेरिकी जांच एजेंसियों ने एपस्टीन के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की थी, तब जब्त की गई बच्चों के गंभीर यौन शोषण से जुड़ी सामग्री में वह भी मौजूद थी। एमी का आरोप है कि एपस्टीन के नेटवर्क द्वारा तैयार की गई ये घिनौनी सामग्रियां आज भी डार्क वेब और अवैध बाजारों में बेची और खरीदी जा रही हैं, जिससे पीड़ितों का मानसिक उत्पीड़न कभी खत्म नहीं हो रहा है।

पीड़ितों की पहचान और ₹57.54 करोड़ के सामूहिक मुआवजे का बड़ा दावा

अमेरिकी अदालत के समक्ष दायर इस विस्तृत याचिका में पीड़ित पक्ष ने न्यायपालिका से दो अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी करने की मांग की है। पहली मांग यह है कि अदालत एपस्टीन की अकूत संपत्ति की देखरेख करने वाले ट्रस्टियों और अमेरिकी सरकारी जांच एजेंसियों को एक संयुक्त टास्क फोर्स बनाकर उस पूरे सीक्रेट फोटो-वीडियो कलेक्शन में दिखने वाले सभी बच्चों और पीड़ितों की पहचान अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दे, ताकि उन्हें उनके अधिकारों और कानूनी विकल्पों की आधिकारिक जानकारी दी जा सके। दूसरी प्रमुख मांग मुआवजे को लेकर है, जिसमें अदालत से आग्रह किया गया है कि एपस्टीन के अरबों डॉलर के एस्टेट से प्रत्येक चिन्हित पीड़ित को कम से कम लगभग 1.25 करोड़ रुपये ($150,000) की वित्तीय क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाए। इस कानूनी ड्रॉफ्ट के अनुसार पूरे समूह के लिए शुरुआती कुल दावा कम से कम 57.54 करोड़ रुपये का बैठता है, जिसमें पीड़ितों की संख्या बढ़ने के साथ भारी इजाफा होने की संभावना है।

एपस्टीन के पूर्व वकील डैरेन इंडिके और अकाउंटेंट रिचर्ड कान के खिलाफ कानूनी शिकंजा

यह नया कानूनी शिकंजा सीधे तौर पर जेफ्री एपस्टीन के सिंडिकेट को चलाने वाले उसके सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों पर कसा गया है। मुकदमे में मुख्य प्रतिवादी के रूप में एपस्टीन के पूर्व लंबे समय के वकील डैरेन इंडिके और उसके पूर्व निजी अकाउंटेंट रिचर्ड कान को नामजद किया गया है, जो एपस्टीन की मृत्यु के बाद उसके ट्रस्ट और अरबों डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन देख रहे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन प्रबंधकों ने पीड़ितों के मूल अधिकारों की रक्षा करने और अश्लील सामग्रियों के अवैध प्रसार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इस संवेदनशील मामले पर जब मीडिया ने संपर्क किया, तो डैरेन इंडिके का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील डैनियल वेनर ने आधिकारिक टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया, जबकि रिचर्ड कान के कानूनी सलाहकारों ने भी मीडिया के सवालों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया है।

वकील हिलेरी नैपी का बड़ा दावा: मुकदमे में जुड़ सकते हैं दुनिया भर के हजारों अज्ञात पीड़ित

अदालत में दोनों पीड़ित महिलाओं की पैरवी कर रहीं जानी-मानी मानवाधिकार वकील हिलेरी नैपी ने इस कानूनी लड़ाई को ऐतिहासिक करार दिया है। एक मीडिया साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्लास-एक्शन मुकदमे का दायरा केवल इन दो महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आने वाले समय में हजारों की संख्या में वर्ग सदस्य (Class Members) शामिल हो सकते हैं। हिलेरी नैपी ने रेखांकित किया कि एफबीआई और अमेरिकी पुलिस द्वारा एपस्टीन के मैनहट्टन और वर्जिन आइलैंड्स के परिसरों से जब्त किए गए विशाल संग्रह में सैकड़ों अज्ञात किशोरियों और बच्चों के चेहरे दर्ज हैं, जिनकी पहचान सरकारी एजेंसियों द्वारा कभी की ही नहीं गई। वकील के अनुसार, यह मुकदमा उन तमाम गुमनाम चेहरों को न्याय और सम्मान दिलाने का एक जरिया बनेगा, जिन्हें वर्षों तक केवल एक डिजिटल फाइल मानकर छोड़ दिया गया था।

यौन शोषण के मुकदमों से कैसे बिल्कुल अलग है यह नया क्लास-एक्शन वाद

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक जेफ्री एपस्टीन और उसकी सहयोगी घिसलीन मैक्सवेल पर जो मुकदमे चले थे, वे मुख्य रूप से सीधे यौन शोषण, अवैध तस्करी और नाबालिगों को प्रलोभन देकर बुलाने (Sex Trafficking) के आपराधिक आरोपों पर केंद्रित थे। इसके विपरीत, यह नया मुकदमा पूरी तरह से चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) यानी बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, अवैध भंडारण, संकलन और उसके डिजिटल प्रसार के खिलाफ छेड़ा गया है। इसका सीधा उद्देश्य उन लोगों को जवाबदेह बनाना और राहत दिलाना है जिनकी तस्वीरें या वीडियो बचपन में एपस्टीन या उसके प्रभावशाली साथियों ने बिना सहमति के खींची, चुराईं या व्यवसायिक रूप से संग्रहित की थीं। यह मुकदमा कानून की नजर में इन तस्वीरों को अनवरत चलने वाले अपराध के रूप में परिभाषित करने की मांग करता है।

2008 का दोषसिद्धि समझौता, 2019 की FBI रेड और जेल में आत्महत्या से छूटा आपराधिक ट्रायल

जेफ्री एपस्टीन पहली बार वर्ष 2008 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब बदनाम हुआ था, जब फ्लोरिडा में एक नाबालिग लड़की के यौन शोषण की कोशिश के मामले में उसे एक विवादास्पद प्ली-डील के तहत दोषी ठहराया गया था। इसके बाद जुलाई 2019 में एपस्टीन तब दुनिया भर की सुर्खियों में आ गया, जब अमेरिकी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने न्यूयॉर्क स्थित उसके विशाल बंगले पर छापा मारा। इस छापेमारी के दौरान अलमारियों और तिजोरियों से हजारों निजी तस्वीरें, मॉडलिंग बुक्स, हार्ड ड्राइव्स और सीडी बरामद हुई थीं, जिनमें नाबालिग बच्चों का भयावह यौन शोषण दर्ज था। हालांकि, इस छापेमारी के कुछ ही हफ्तों बाद अगस्त 2019 में एपस्टीन न्यूयॉर्क की अत्यधिक सुरक्षित मेट्रोपॉलिटन करेक्शनल सेंटर जेल की बैरक में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया, जिसे आधिकारिक तौर पर आत्महत्या करार दिया गया था। जेल में उसकी आकस्मिक मौत के कारण अमेरिकी न्याय प्रणाली में उस पर बाल यौन शोषण सामग्री तैयार करने या उसे वितरित करने का पूर्ण आपराधिक ट्रायल कभी नहीं चल सका, और यही कारण है कि अब नागरिक अदालतों (Civil Courts) के जरिए उसकी संपत्ति को घेरकर न्याय की गुहार लगाई जा रही है।

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