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एयर इंडिया विमान हादसे की सरकारी रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल: पायलट संगठन ने खोली जांच की पोल

अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 (Air India AI-171) के दर्दनाक हादसे को लेकर विमानन क्षेत्र में एक बहुत बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस भयानक दुर्घटना में विमान का पिछला हिस्सा (टैल पार्ट) एक इमारत की छत पर गिर गया था, जिसके कारण 260 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। अब देश के सबसे बड़े पायलट संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस मामले की जांच कर रहे एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को एक कड़ा पत्र लिखकर शुरुआती रिपोर्ट पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पायलटों का आरोप है कि सरकारी रिपोर्ट में दिखाई गई टाइमलाइन और विमान के सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण 'आरएटी' (Ram Air Turbine) के खुलने का समय पूरी तरह संदिग्ध है। लाइव हिन्दुस्तान के विशेष विमानन संवाददाता नीतीश कुमार की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड खोजी रिपोर्ट में जानिए कि आखिर सरकारी जांच में कहां पर बहुत बड़ी चूक पकड़ी गई है।

बोइंग 787 सिमुलेटर टेस्टिंग ने खोली पोल, सरकारी रिपोर्ट के 5 सेकंड बनाम असलियत के 18 सेकंड का खेल

पायलट संगठन एफआईपी द्वारा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन काम करने वाले एएआईबी के महानिदेशक (Director General) को भेजे गए पत्र में एक बेहद चौंकाने वाला तकनीकी खुलासा किया गया है। सरकारी रिपोर्ट के दावों के अनुसार, विमान के कॉकपिट में फ्यूल कंट्रोल स्विच (ईंधन नियंत्रण स्विच) को बंद या चालू करने के महज 4 से 5 सेकंड के भीतर ही आरएटी (RAT) ने बिजली बनाना (पावर जनरेशन) शुरू कर दिया था। लेकिन जब पायलट संगठन ने इसी परिस्थितियों को समझने के लिए आधुनिक बोइंग 787 (Boeing 787 Dreamliner) के आधिकारिक सिमुलेटर पर लाइव टेस्टिंग की, तो यह प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम 18 सेकंड का समय पाया गया। पायलटों का कहना है कि यह 13 सेकंड का बहुत बड़ा अंतर सरकारी रिपोर्ट की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और वैज्ञानिक सटीकता पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है।

ईंधन की कमी नहीं बल्कि विमान का सिस्टम फेल होना था असली वजह, पायलटों ने दी नई थ्योरी

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स का मानना है कि इस हादसे के पीछे पायलटों की गलती या ईंधन का अचानक रुकना एकमात्र वजह नहीं थी। संगठन ने अपनी तकनीकी थ्योरी में सुझाव दिया है कि विमान में आपातकालीन बिजली की आपूर्ति करने वाले आरएटी (RAT System) की तैनाती ईंधन स्विच के मूवमेंट से काफी पहले ही हो चुकी थी। यह साफ तौर पर इशारा करता है कि टेकऑफ के समय या उड़ान के दौरान विमान में पहले से ही कोई बेहद गंभीर इलेक्ट्रॉनिक खराबी, शॉर्ट सर्किट या मेजर सिस्टम फॉल्ट मौजूद था। पायलटों ने जोर देकर कहा है कि अगर विमान का इलेक्ट्रिकल सिस्टम ईंधन की गड़बड़ी से पहले ही पूरी तरह फेल हो चुका था, तो इस पहलू की बेहद बारीकी और गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि हादसे की असली हकीकत दुनिया के सामने आ सके।

पीड़ित परिवारों के वकील माइकल एंड्रयूज की चिट्ठी के बाद एक्शन में आया पायलट संगठन

यह पूरा विवाद और सरकारी रिपोर्ट को चुनौती देने का कदम विमान हादसे के ठीक एक महीने बाद आया है। दरअसल, इस भयानक हादसे में मारे गए 260 यात्रियों के प्रभावित और दुखी परिवारों की तरफ से पैरवी कर रहे प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वकील डी. माइकल एंड्रयूज ने पायलटों के इस संगठन को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने सरकारी जांच एजेंसी की शुरुआती रिपोर्ट में मौजूद कई गंभीर तकनीकी कमियों और विसंगतियों की तरफ ध्यान आकर्षित कराया था। इसके बाद एफआईपी की तकनीकी टीम ने बोइंग के डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि सिमुलेटर डेटा किसी भी हाल में एएआईबी की टाइमलाइन से मेल नहीं खा रहा है।

भविष्य में होने वाले हादसों को रोकने के लिए अतिरिक्त सिमुलेशन और तकनीकी विश्लेषण की मांग

पायलटों की संस्था ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से पुरजोर अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले में लीपापोती करने के बजाय जांच में और अधिक गहराई लाएं। एफआईपी ने मांग की है कि जांच एजेंसी इस नए इलेक्ट्रिकल फॉल्ट वाले पहलू को पूरी गंभीरता से संज्ञान में ले और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मौजूदगी में अतिरिक्त सिमुलेशन व एडवांस तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) आयोजित करे। पायलटों का कहना है कि ऐसा करना न केवल 260 मृतकों के परिवारों को सच्चा न्याय दिलाने के लिए जरूरी है, बल्कि भविष्य में बोइंग 787 विमानों में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी भयानक घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए भी बेहद अनिवार्य है।

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