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कच्चे तेल की कीमतों में 15% की ऐतिहासिक गिरावट ट्रंप के दो हफ्ते के युद्धविराम’ के प्रस्ताव से ग्लोबल मार्केट में हलचल

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी तनाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम (Ceasefire) का प्रस्ताव रखे जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस घोषणा के तुरंत बाद कच्चे तेल के दाम 15% तक लुढ़क गए हैं, जो हाल के महीनों की सबसे बड़ी गिरावट है।क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम?कच्चे तेल की कीमतों में इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से भू-राजनीतिक (Geopolitical) राहत और सप्लाई की सुगमता को माना जा रहा है:युद्धविराम का प्रस्ताव: राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्यस्थता करते हुए दो हफ्ते के सीजफायर का सुझाव दिया है। इससे बाजार में यह संकेत गया कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रह सकते हैं।सप्लाई की चिंता हुई कम: ईरान और इजरायल के बीच सीधे टकराव की आशंका से तेल की सप्लाई बाधित होने का डर था। युद्धविराम की खबर ने इस डर को कम कर दिया है, जिससे कीमतों में ‘करेक्शन’ आया है।94 डॉलर के नीचे ब्रेंट क्रूड: इस गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई है।भारत पर क्या होगा इसका असर?भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी ‘बूस्टर’ से कम नहीं है:पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत: यदि कच्चे तेल के दाम इसी स्तर पर स्थिर रहते हैं, तो आने वाले दिनों में देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं।महंगाई पर लगाम: तेल सस्ता होने से ट्रांसपोर्टेशन (माल ढुलाई) की लागत कम होती है, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।डॉलर के मुकाबले रुपया: कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आने से भारत का व्यापार घाटा कम होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी।बाजार विशेषज्ञों की रायमार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यह गिरावट ‘अस्थायी’ भी हो सकती है। यदि दो हफ्तों के भीतर कोई स्थायी शांति समझौता नहीं होता है, तो कीमतें फिर से उछल सकती हैं। फिलहाल, वैश्विक बाजारों ने ट्रंप के इस कदम का जोरदार स्वागत किया है और निवेशकों ने राहत की सांस ली है।

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