कनाडा को सबक सिखाने का समय, कार्नी के ट्रेड वार्ता तोड़ने पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, दी खुली धमकी

अमेरिका और कनाडा के बीच कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर घमासान एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद को लेकर अपनी मुखर शैली के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप कनाडा के रुख से बुरी तरह भड़क उठे हैं। दरअसल, कनाडा के मार्क कार्नी द्वारा अचानक व्यापार वार्ता यानी ट्रेड टॉक्स को बीच में ही तोड़ने और ठंडे बस्ते में डालने के फैसले ने ट्रंप का पारा चढ़ा दिया है। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को आड़े हाथों लेते हुए एक खुली और सख्त धमकी दी है, जिसमें साफ कहा गया है कि अब कनाडा को उसकी हरकतों का करारा सबक सिखाने का समय आ चुका है। इस तल्ख बयानबाजी से उत्तर अमेरिकी महाद्वीप की राजनीति में भूचाल आ गया है।
व्यापार वार्ता टूटने की असल वजह और दोनों देशों के बीच बढ़ा तनाव
अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से आर्थिक समझौतों, आयात-निर्यात शुल्कों और व्यापारिक नीतियों को लेकर वार्ताओं का दौर चल रहा था। दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं, जिसके कारण ट्रेड डील्स का होना दोनों के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि, मार्क कार्नी की तरफ से अचानक उठाए गए कदमों और बातचीत से पीछे हटने के फैसले ने अमेरिकी प्रशासन को सकते में डाल दिया। कनाडाई पक्ष का मानना था कि अमेरिकी शर्तें उनके घरेलू उद्योगों और आर्थिक हितों के अनुकूल नहीं हैं, जिसके चलते उन्होंने बातचीत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। लेकिन कूटनीतिक शिष्टाचार को दरकिनार करते हुए इस तरह अचानक वार्ता तोड़ने का निर्णय वाशिंगटन को बिल्कुल रास नहीं आया।
डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख और कनाडा को सीधी चेतावनी
अपने कड़े तेवरों के लिए पहचाने जाने वाले डोनाल्ड ट्रंप इस अपमानजनक रवैये पर चुप बैठने वाले राजनेताओं में से नहीं हैं। वार्ताओं के टूटने की खबर सामने आते ही ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों से कनाडा को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कनाडा अमेरिका की उदारता और व्यापारिक सहयोग का फायदा उठाता रहा है, और यदि वे इस तरह के एकतरफा फैसले लेंगे तो अमेरिका भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठेगा। ट्रंप ने अपनी खुली धमकी में साफ कर दिया कि यदि कनाडा ने अपने रवैये में सुधार नहीं किया और दोबारा बातचीत की मेज पर नहीं आया, तो अमेरिका कनाडाई उत्पादों पर भारी-भरकम आयात शुल्क यानी टैरिफ़ थोप देगा, जिससे कनाडाई अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मार्क कार्नी का फैसला और कनाडाई राजनीतिक गलियारों में हलचल
कनाडा की ओर से मार्क कार्नी का यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश की आंतरिक राजनीति और आर्थिक चुनौतियां भी अपने चरम पर हैं। कनाडाई हुक्मरानों का एक वर्ग यह मान रहा था कि ट्रंप प्रशासन के दबाव में आकर किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करना देश के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ होगा। इसी राष्ट्रीय हित की दुहाई देते हुए व्यापार वार्ता को तोड़ा गया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कनाडा अपनी शर्तों पर समझौता करेगा न कि किसी के दबाव में। हालांकि, ट्रंप के इस आक्रामक और खुली धमकी वाले तेवर के बाद अब खुद कनाडा के भीतर ही यह बहस छिड़ गई है कि क्या अमेरिका से पंगा लेना उनकी अर्थव्यवस्था के लिए सही फैसला साबित होगा या इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
उत्तर अमेरिकी व्यापार और वैश्विक बाजारों पर पड़ने वाला इसका असर
अमेरिका और कनाडा के बीच इस तरह के ट्रेड वॉर की आहट से वैश्विक बाजारों और निवेशकों में भी चिंता की लहर दौड़ गई है। दोनों देश यूएसएमसीए जैसे बड़े व्यापार समझौतों से जुड़े हुए हैं, और यदि इनके बीच का आपसी सहयोग चरमराता है, तो इसका सीधा असर ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों पर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि डोनाल्ड ट्रंप अपनी धमकियों को अमलीजामा पहनाते हुए कनाडाई सामानों पर कड़े टैक्स लगाते हैं, तो कनाडा के निर्यातकों की मुसीबतें कई गुना बढ़ जाएंगी। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक माध्यमों से इस तनाव को सुलझा पाते हैं या फिर यह व्यापारिक संघर्ष और अधिक विकराल रूप धारण करता है।