दीपिका-वांगा विवाद में क्यों उछला श्रीदेवी और राजामौली का नाम? जानिए ‘स्पिरिट’ से ‘बाहुबली’ तक के अनसुलझे विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी

सिनेमा जगत में इस समय डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा और बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण के बीच का विवाद जबरदस्त सुर्खियों में बना हुआ है। प्रभास स्टारर अपकमिंग मेगा बजट एक्शन ड्रामा फिल्म 'स्पिरिट' में फीमेल लीड की कास्टिंग को लेकर शुरू हुआ यह मामला अब व्यक्तिगत बयानबाजी और सोशल मीडिया बहस तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म 'स्पिरिट' के लिए पहले दीपिका पादुकोण से बातचीत चल रही थी। चर्चा है कि दीपिका ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारी फीस के साथ-साथ प्रॉफिट शेयरिंग और काम के सीमित घंटों (8 घंटे की शिफ्ट) जैसी कुछ शर्तें रखी थीं, क्योंकि वह एक छोटे बच्चे की मां हैं और अपने परिवार व काम के बीच संतुलन बनाना चाहती थीं।
बातचीत सिरे नहीं चढ़ पाई और दीपिका इस प्रोजेक्ट से अलग हो गईं, जिसके बाद यह रोल तृप्ति डिमरी की झोली में चला गया। विवाद तब गहराया जब संदीप रेड्डी वांगा और उनके प्रोडक्शन कैंप की तरफ से सोशल मीडिया व इंटरव्यूज में बिना नाम लिए कुछ तीखे तंज कसे गए। वांगा ने 'अनस्पोकन एनडीए' (गोपनीयता नियम) तोड़ने, कहानी लीक करने और एक युवा कलाकार को नीचा दिखाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जाहिर की। वहीं, दीपिका के समर्थकों का कहना है कि किसी भी कलाकार को अपनी फीस और कार्य शर्तों को तय करने का पूरा हक है और किसी प्रोजेक्ट को ठुकराना कोई अपराध नहीं है।
अचानक क्यों याद आया श्रीदेवी और एसएस राजामौली का पुराना विवाद?
दीपिका और वांगा के बीच उपजे इस तनाव ने सिनेप्रेमियों और सोशल मीडिया यूजर्स को दिग्गज दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी और ब्लॉकबस्टर डायरेक्टर एस.एस. राजामौली के पुराने विवाद की याद दिला दी है। दर्शक और फिल्म विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या जब भी कोई स्थापित महिला सुपरस्टार किसी बड़े दक्षिण भारतीय प्रोजेक्ट या निर्देशक के प्रस्ताव को अपनी शर्तों के चलते अस्वीकार करती है, तो निर्देशकों की तरफ से इसे नकारात्मक रूप में पेश किया जाता है।
यह पूरा मामला साल 2015 की ऐतिहासिक फिल्म 'बाहुबली: द बिगिनिंग' से जुड़ा हुआ है। जब राजामौली अपनी इस पैन-इंडिया फिल्म की कास्टिंग कर रहे थे, तब उन्होंने राजमाता 'शिवगामी देवी' के ऐतिहासिक और शक्तिशाली किरदार के लिए सबसे पहले नेशनल सुपरस्टार श्रीदेवी से संपर्क किया था। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई और बाद में यह प्रतिष्ठित किरदार एक्ट्रेस रम्या कृष्णन ने निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
'बाहुबली' में शिवगामी के किरदार और कथित डिमांड्स का सच
जब श्रीदेवी 'बाहुबली' का हिस्सा नहीं बनीं, तो उसके बाद राजामौली ने एक तेलुगु टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में कुछ ऐसे खुलासे किए जिसने पूरे बॉलीवुड और टॉलीवुड में सनसनी मचा दी थी। राजामौली ने दावा किया था कि श्रीदेवी ने इस रोल के लिए 8 से 10 करोड़ रुपये की फीस, अपने लिए फाइव स्टार होटल का पूरा एक फ्लोर, टीम के लिए 10 बिजनेस-क्लास फ्लाइट टिकट और फिल्म के प्रॉफिट में हिस्सेदारी मांगी थी।
इतना ही नहीं, निर्देशक ने यहां तक कह दिया था कि यह उनकी और फिल्म की खुशकिस्मती थी कि श्रीदेवी ने इस रोल को नहीं स्वीकारा, क्योंकि रम्या कृष्णन ने इस किरदार के साथ कहीं बेहतर न्याय किया। राजामौली के इस सार्वजनिक बयान के बाद मीडिया में श्रीदेवी की कथित "अत्यधिक मांगों" को लेकर कई तरह की नकारात्मक खबरें प्रकाशित होने लगी थीं।
राजामौली के बयानों से गहरा आहत हुई थीं श्रीदेवी
राजामौली की सार्वजनिक टिप्पणियों पर उस समय श्रीदेवी बेहद हैरान और आहत हुई थीं। अपनी फिल्म 'मॉम' (MOM) के प्रमोशन के दौरान जब मीडिया ने उनसे इस विवाद पर सवाल पूछा, तो उन्होंने अपनी गरिमा बनाए रखते हुए खुलकर जवाब दिया था। श्रीदेवी ने कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में 50 साल बिताए हैं और 300 से अधिक फिल्मों में काम किया है। अगर वह ऐसी अनुचित और गैर-पेशेवर मांगें करतीं, तो इतने लंबे समय तक इंडस्ट्री में एक सफल मुकाम पर नहीं टिकी रह सकती थीं।
श्रीदेवी ने यह भी स्पष्ट किया था कि वह राजामौली का एक बेहतरीन फिल्ममेकर के तौर पर बहुत सम्मान करती थीं और उनकी फिल्म 'ईगा' (मक्खी) देखकर उनके साथ काम करने को लेकर उत्साहित थीं। लेकिन जिस तरह से निर्देशक ने सार्वजनिक मंच पर जाकर वित्तीय और कास्टिंग से जुड़ी निजी बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा था। बाद में खुद राजामौली ने भी अपनी गलती स्वीकार की थी और खेद जताते हुए कहा था कि उन्हें सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर किसी भी कलाकार के पारिश्रमिक या बातचीत के विवरण पर चर्चा नहीं करनी चाहिए थी।
क्या फिल्म इंडस्ट्री में अभिनेत्रियों की शर्तों पर दोहरा रवैया अपनाया जाता है?
दीपिका-वांगा और श्रीदेवी-राजामौली के मामलों में कई समानताएं तलाशी जा रही हैं। आज के डिजिटल युग में सिने प्रेमी और आलोचक यह तर्क दे रहे हैं कि जब एक मेल सुपरस्टार किसी फिल्म के लिए 100 से 150 करोड़ रुपये फीस, भारी प्रॉफिट शेयरिंग या अपनी सुविधानुसार शूटिंग शेड्यूल की मांग करता है, तो उसे उसका स्टारडम और हक माना जाता है। लेकिन जब वही मांग या शर्तें एक स्थापित महिला कलाकार अपनी सुविधा, मातृत्व या मार्केट वैल्यू के आधार पर रखती है, तो उसे 'ईगो', 'नखरे' या 'अव्यावहारिक मांगें' करार दे दिया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिनेमा में पेशेवर सीमाओं और सम्मान का दायरा दोनों पक्षों के लिए समान होना चाहिए। जब किसी फिल्म की कास्टिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, तो दोनों पक्षों को आपसी गोपनीयता बनाए रखनी चाहिए, न कि सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की आलोचना करनी चाहिए। यही कारण है कि 'स्पिरिट' विवाद के बीच श्रीदेवी और राजामौली का पुराना मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर जेंडर समानता और पेशेवर मर्यादा को लेकर बड़ी बहस का केंद्र बन गया है।