कांस्टेबल का बेटा पहले बना MBBS डॉक्टर, फिर क्रैक किया IAS… अब करोड़ों के टेंडर घोटाले में हुआ सस्पेंड

देश की प्रशासनिक सेवा यानी ब्यूरोक्रेसी के गलियारों से इस वक्त एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह कहानी संघर्ष, कामयाबी के चरम और फिर अचानक लगे एक बड़े दाग की है। एक पुलिस कांस्टेबल का बेटा, जिसने अपनी काबिलियत के दम पर पहले एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री हासिल की और फिर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस (IAS) अधिकारी बना। लेकिन आज उसी होनहार अधिकारी का नाम करोड़ों रुपये के एक बड़े टेंडर घोटाले में सामने आने के बाद उन्हें पद से सस्पेंड कर दिया गया है। इस पूरे मामले में दो बड़े अधिकारियों की गाज गिरने की कहानी कूटनीतिक और प्रशासनिक हल्कों में चर्चा का विषय बनी हुई है। कांस्टेबल के बेटे का डॉक्टर से आईएएस बनने का सफर इस सस्पेंड हुए आईएएस अधिकारी का शुरुआती जीवन बेहद प्रेरणादायक रहा है। एक बेहद साधारण परिवार और पुलिस महकमे के एक छोटे से कांस्टेबल के घर जन्मे इस युवा ने बचपन से ही बड़े सपने देखे थे। अपनी लगन से उसने पहले मेडिकल की प्रवेश परीक्षा पास की और एक डॉक्टर बनकर समाज सेवा शुरू की। लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था को करीब से सुधारने के जुनून में उसने यूपीएससी (UPSC) की तैयारी की और सफलता का परचम लहराते हुए आईएएस की नीली बत्ती वाली गाड़ी हासिल कर ली। इनकी इस सफलता की कहानी कभी लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल हुआ करती थी। कैसे लगे कामयाबी की उड़ान पर घोटाले के दाग अर्श से फर्श पर आने की यह कहानी तब शुरू हुई जब इस अधिकारी की तैनाती एक बेहद महत्वपूर्ण विभाग में की गई। आरोप है कि पद पर रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी टेंडर बांटे गए। इस पूरे टेंडर आवंटन में भारी वित्तीय अनियमितताएं और कमीशनखोरी की शिकायतें सरकार तक पहुंची थीं। शुरुआती जांच में जब पुख्ता सबूत मिले और फाइलों में हेराफेरी की बात सामने आई, तो शासन ने बिना किसी देरी के सख्त कदम उठाते हुए इस पूर्व डॉक्टर और वर्तमान आईएएस अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। दो बड़े अधिकारियों पर एक साथ गिरी गाज, महकमे में हड़कंप यह कार्रवाई सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस पूरे खेल में शामिल एक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की गर्दन भी इस घोटाले में फंस गई है। सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए दोनों अधिकारियों को एक साथ सस्पेंड कर लाइन हाजिर या सस्पेंशन ऑर्डर थमा दिया है। इस दोहरे एक्शन के बाद से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि इस टेंडर घोटाले के तार और कहां-कहां जुड़े हैं और क्या इसमें कुछ राजनेताओं या बड़े ठेकेदारों की भी मिलीभगत थी। युवाओं को प्रेरित करने वाली एक कहानी का इस तरह घोटाले के मोड़ पर पहुंचना वाकई झकझोर देने वाला है।