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किडनैपिंग केस में कुंभ मेला फेम मोनालिसा भोसले को बड़ी राहत, केरल हाईकोर्ट ने रद्द की FIR, जानें क्या है पूरा मामला

News India Live, Digital Desk: प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आईं और खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाली मोनालिसा भोसले को न्यायपालिका से बड़ी जीत मिली है। केरल हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज अपहरण (Kidnapping) के मामले को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। यह मामला भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव और राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम के एक करीबी रिश्तेदार से जुड़ा था, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी।क्या था पूरा विवाद और अपहरण का आरोप?मामले की जड़ें एक पारिवारिक विवाद से जुड़ी थीं। दरअसल, बिनॉय विश्वम के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति ने मोनालिसा भोसले पर गंभीर आरोप लगाए थे कि उन्होंने जबरन उसे बंधक बनाया और डराया-धमकाया। इस शिकायत के आधार पर केरल पुलिस ने मोनालिसा के खिलाफ अपहरण और अन्य धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। मोनालिसा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक साजिश और उन्हें बदनाम करने की कोशिश करार दिया था।हाईकोर्ट ने क्यों दी राहत? जांच में नहीं मिले पुख्ता सबूतजस्टिस ए. बदरुद्दीन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों में कई विसंगतियां थीं। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपों में स्पष्टता का अभाव है और प्रथम दृष्टया अपहरण जैसा कोई अपराध साबित नहीं होता। हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला आपसी विवाद का अधिक लग रहा है जिसे आपराधिक रंग देने की कोशिश की गई। सबूतों के अभाव और कानूनी तकनीकी पहलुओं को देखते हुए माननीय न्यायालय ने मोनालिसा के खिलाफ दर्ज केस को ‘क्वैश’ (Quash) यानी रद्द करने का आदेश दिया।कौन हैं कुंभ फेम मोनालिसा भोसले?मोनालिसा भोसले पहली बार सुर्खियों में तब आई थीं जब प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेले के दौरान उनकी तस्वीरें और कार्य सोशल मीडिया पर जबरदस्त तरीके से वायरल हुए थे। उन्हें उनके बेबाक अंदाज और सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता है। हालांकि, केरल में दर्ज इस केस के बाद उनकी छवि पर सवाल उठे थे, लेकिन अब कोर्ट के फैसले ने उन्हें एक बड़ी क्लीन चिट दे दी है।फैसले के बाद मोनालिसा का बयान: ‘सत्य की हुई जीत’राहत मिलने के बाद मोनालिसा भोसले ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से ही भारत के कानून पर भरोसा था। उनके अनुसार, उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया गया ताकि उनकी आवाज को दबाया जा सके, लेकिन सच्चाई की जीत हुई है। इस फैसले के बाद अब वह अपनी सामाजिक गतिविधियों को फिर से सुचारू रूप से जारी रख सकेंगी।

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