कॉलेजों में ब्रेक कब और कितने CCTV कैमरे? स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर की तलाश में जुटा NTA, सरकार ने मांगी पूरी रिपोर्ट

देशभर में आयोजित होने वाली विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए (NTA) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। हाल के दिनों में कई निजी परीक्षा केंद्रों पर सामने आई गड़बड़ियों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को देखते हुए अब सरकार और एनटीए का पूरा फोकस सरकारी शिक्षण संस्थानों पर आ गया है। इसी कड़ी में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने देश के सभी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और तकनीकी विश्वविद्यालयों से उनके परिसरों में उपलब्ध आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सुविधाओं का पूरा ब्योरा मांगा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य देश भर में अत्याधुनिक 'स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर' (Standard Testing Centres) विकसित करना है, ताकि आने वाले समय में होने वाली सभी परीक्षाएं पूरी तरह चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच संपन्न कराई जा सकें। आज के इस विस्तृत और गहराई से विश्लेषण वाले लेख में हम इस नई नीति, कॉलेजों से मांगी गई जानकारियों और परीक्षा प्रणाली में होने वाले बड़े बदलावों के हर एक पहलू पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि आप इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक खबर से पूरी तरह वाकिफ हो सकें।
क्यों पड़ी स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर्स की जरूरत और क्या है NTA की नई रणनीति
पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश की कई बड़ी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और प्राइवेट केंद्रों पर बिजली या इंटरनेट फेल होने जैसी समस्याओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता को काफी बढ़ा दिया था। कई बार तो हालात इतने बदतर हो गए कि परीक्षा केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण परीक्षाएं तक रद्द करनी पड़ गईं। इन तमाम गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए परीक्षा सुधारों के लिए बनी उच्च स्तरीय डॉ. के. राधाकृष्णन कमेटी ने अपनी सिफारिशों में देश भर के सरकारी संस्थानों में कम से कम 1000 स्थायी स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर बनाने की बात कही थी। इसी सिफारिश को अमलीजामा पहनाने के लिए अब एनटीए ने कमर कस ली है और देश के प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के मजबूत बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। चूंकि अब एनटीए की अधिकांश परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी सीबीटी (CBT) मोड में आयोजित की जा रही हैं और आने वाले समय में अन्य बड़ी परीक्षाएं भी इसी पैटर्न पर शिफ्ट होने वाली हैं, इसलिए उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर लैब और सुरक्षित परिसरों की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कॉलेजों में छुट्टियों, सेमेस्टर ब्रेक और CCTV कैमरों का हो रहा है पूरा आकलन
AICTE द्वारा देश के सभी सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों को भेजे गए निर्देशों के अनुसार, उन्हें अपने यहां की व्यवस्थाओं से जुड़ा एक विस्तृत प्रोफर्मा भरकर जमा करना होगा। इस असेसमेंट प्रक्रिया के तहत संस्थानों से यह बारीकी से पूछा गया है कि उनके यहां शनिवार और रविवार को परीक्षा का संचालन कैसे हो सकता है, उनके यहां सेमेस्टर ब्रेक (Semester Break) कब-कब होता है और अकादमिक कैलेंडर में छुट्टियां किस अवधि में पड़ती हैं। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण पहलू सुरक्षा का है, जिसके तहत कॉलेजों से यह ब्योरा मांगा गया है कि उनके परिसर में कुल कितने सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगे हुए हैं और वे कैंपस में किस-किस जगह यानी एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स, गलियारों और परीक्षा कक्षों में स्थापित हैं। इस डेटा के विश्लेषण के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किस संस्थान को आधिकारिक तौर पर 'स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर' के रूप में विकसित किया जा सकता है, ताकि परीक्षा के दिन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नकल की गुंजाइश पूरी तरह से समाप्त की जा सके।
कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्किंग और पावर बैकअप की रिपोर्ट करना है अनिवार्य
स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर के रूप में चयन के लिए संस्थानों को तकनीकी मोर्चे पर अपनी पूरी क्षमता का स्पष्ट ब्योरा देना होगा। इसके तहत मुख्य रूप से छह प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया गया है, जिसमें संस्थानों में कुल कार्यशील कंप्यूटरों (Functional Computers) की वास्तविक संख्या, उच्च गति वाली इंटरनेट कनेक्टिविटी और नेटवर्किंग की स्थिति, तथा निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर या यूपीएस (UPS) बैकअप की उपलब्धता शामिल है। कई बार तकनीकी केंद्रों पर सर्वर डाउन होने या बिजली चले जाने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक जाता है, इसी जोखिम को पूरी तरह से खत्म करने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि केवल उन्हीं संस्थानों को सेंटर बनाया जाए जिनका तकनीकी और पावर बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर त्रुटिहीन हो। इसके अलावा परिसरों में मौजूद उन खाली कमरों, हॉल या अप्रयुक्त空间 (Unutilised Space) की भी जानकारी मांगी गई है जिन्हें भविष्य में स्थाई रूप से सुरक्षित परीक्षा लैब के रूप में बदला जा सके।
शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य पर इस बदलाव का क्या पड़ेगा असर
सरकार और एनटीए के इस दूरदर्शी कदम से आने वाले समय में देश की परीक्षा प्रणाली में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। जब परीक्षाएं पूरी तरह से सुरक्षित, सरकारी नियंत्रण वाले और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 'स्टैंडर्ड टेस्टिंग सेंटर्स' में आयोजित होंगी, तो पेपर लीक और सॉल्वर गैंग जैसी अवैध गतिविधियों पर अपने आप लगाम लग जाएगी। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि शुरुआती दौर में सभी परीक्षाओं को पूरी तरह से सरकारी संस्थानों में आयोजित कराना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इसके लिए भारी-भरकम तकनीकी और लॉजिस्टिक तैयारी की जरूरत है। लेकिन इस दिशा में उठाया गया यह कदम इस बात का सुबूत है कि एजेंसी छात्रों की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। देश के लाखों युवा जो कड़ी मेहनत कर अपनी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था एक बड़ी राहत लेकर आएगी और उन्हें बिना किसी मानसिक तनाव के पूरी ईमानदारी के साथ अपनी प्रतिभा दिखाने का उचित मंच मिल सकेगा।