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कोर्ट ने खारिज की सीबीआई की याचिका: नीट (NEET) पेपर लीक मामले में आरोपियों का नहीं होगा लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट

देश भर में बहुचर्चित और चर्चित नीट यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले में जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को बड़ा झटका लगा है। विशेष अदालत ने नीट पेपर लीक केस में गिरफ्तार मुख्य आरोपियों के लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) और नार्को एनालिसिस टेस्ट कराने की मांग वाली सीबीआई की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद अब जांच एजेंसी आरोपियों की सहमति के बिना उनका साइंटिफिक टेस्ट नहीं करा सकेगी।

कोर्ट ने क्यों खारिज की सीबीआई की अर्जी?

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए सीबीआई की मांग का कड़ा विरोध किया। भारतीय संविधान और कानून के स्थापित सिद्धांतों के तहत किसी भी आरोपी को अपने खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता (Self-Incrimination Prohibition)।

  • आरोपियों की असहमति: सर्वोच्च न्यायालय (Selvi vs State of Karnataka Case) के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफ, नार्को या ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने के लिए उसकी लिखित सहमति (Consent) होना अनिवार्य है।

  • सहमति देने से इनकार: जब कोर्ट ने आरोपियों से पूछा कि क्या वे स्वेच्छा से इस टेस्ट के लिए तैयार हैं, तो आरोपियों ने लाई डिटेक्टर और नार्को टेस्ट कराने से साफ इनकार कर दिया।

  • अदालत का निर्णय: आरोपियों द्वारा सहमति न दिए जाने के कारण विशेष अदालत ने कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए सीबीआई की अर्जी को खारिज कर दिया।

सीबीआई की जांच पर क्या पड़ेगा असर?

नीट पेपर लीक की कड़ियों को जोड़ने और इसके मास्टरमाइंड्स का पर्दाफाश करने के लिए सीबीआई आरोपियों से सच उगलवाना चाहती थी। जांच एजेंसी का मानना था कि आरोपियों के पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट से इस बात का खुलासा हो सकता था कि पेपर कहां से लीक हुआ, किन-किन राज्यों में बांटा गया और इस रैकेट के पीछे कौन-कौन से बड़े नाम या कोचिंग संस्थान शामिल थे।

अर्जी खारिज होने के बाद अब सीबीआई को पूरी तरह से फॉरेंसिक सबूतों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक ट्रांजैक्शंस और अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर ही चार्जशीट और जांच को आगे बढ़ाना होगा।

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