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महिलाओं का मल्टीटास्किंग दिमाग और हार्मोनल बदलाव हैं मुख्य वजह: जानें पुरुषों की तुलना में महिलाओं को क्यों चाहिए 20 मिनट ज्यादा नींद

अक्सर आपने देखा होगा कि दिनभर के कामों के बाद महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा थकान महसूस करती हैं या उन्हें थोड़ी देर और सोने की इच्छा होती है। यदि आपको लगता है कि यह महज एक आलस है, तो आप पूरी तरह गलत हैं। न्यूरोलॉजिस्ट्स और स्लीप रिसर्च एक्सपर्ट्स के अनुसार, महिलाओं को पुरुषों की तुलना में हर रात औसतन 11 से 20 मिनट ज्यादा नींद की जरूरत होती है। अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए शोध और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो महिलाओं के मस्तिष्क की अनूठी बनावट, उनकी कार्यप्रणाली और शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव इसके मुख्य जिम्मेदार हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर महिलाओं को पुरुषों से अधिक नींद की जरूरत क्यों पड़ती है।

1. महिलाओं का 'मल्टीटास्किंग' दिमाग (Multi-Tasking Brain)

महिलाओं के अधिक नींद लेने का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण उनके दिमाग की जटिल बनावट है। महिलाएं एक ही समय में कई काम करने (मल्टीटास्किंग) में माहिर होती हैं। वे दिनभर अपने दिमाग के कई हिस्सों का एक साथ इस्तेमाल करती हैं—जैसे ऑफिस का काम, घर की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और भविष्य की योजनाएं बनाना।

जब दिमाग दिनभर इतना सक्रिय रहता है, तो उसकी न्यूरोनल कोशिकाओं को खुद को रिपेयर और रिकवर करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। नींद का मुख्य उद्देश्य दिमाग को तरोताजा करना और खुद को डिटॉक्स करना होता है। चूंकि महिलाएं अपने मस्तिष्क की ऊर्जा का अधिक इस्तेमाल करती हैं, इसलिए उनके दिमाग को पूर्ण रिकवरी के लिए अतिरिक्त समय और गहरी नींद (Deep Sleep) की आवश्यकता होती है।

2. हार्मोनल बदलाव और पीरियड्स का असर

महिलाओं के शरीर में जीवन के विभिन्न चरणों में हार्मोन्स का उतार-चढ़ाव तेजी से होता है। मासिक धर्म (Periods), गर्भावस्था (Pregnancy) और रजोनिवृत्ति (Menopause) के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन्स का स्तर लगातार बदलता रहता है।

  • पीरियड्स: मासिक धर्म के दौरान शरीर में एंठन, ऐंठन और दर्द के कारण नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे शरीर ज्यादा थका हुआ महसूस करता है।

  • गर्भावस्था: प्रेगनेंसी के दौरान भ्रूण के विकास और शारीरिक वजन बढ़ने के कारण महिलाओं को अत्यधिक शारीरिक थकान होती है, जिसके लिए अतिरिक्त विश्राम की आवश्यकता होती है।

  • मेनोपॉज: मेनोपॉज के दौरान 'हॉट फ्लैशेस' (अचानक गर्मी लगना) और रात में पसीना आने से नींद बार-बार टूटती है, जिससे अगली सुबह थकान बनी रहती है।

3. मानसिक तनाव और एंक्वाइटी (Mental Stress & Anxiety)

स्वास्थ्य अध्ययनों के अनुसार, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अवसाद (Depression), एंग्जायटी और मानसिक तनाव के मामले अधिक देखे जाते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों और करियर के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद में महिलाओं का दिमाग रात में भी शांत नहीं हो पाता, जिसे 'मेंटल लोड' (Mental Load) कहा जाता है।

तनाव के कारण जब शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो शरीर को आराम की मुद्रा में जाने में ज्यादा समय लगता है। पर्याप्त नींद न मिलने पर महिलाओं में मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा पुरुषों की तुलना में तेजी से बढ़ता है।

4. नींद की खराब गुणवत्ता (Sleep Disruption)

कई अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि भले ही महिलाएं बिस्तर पर उतना ही समय बिताएं जितना पुरुष, लेकिन उनकी नींद की गुणवत्ता (Quality of Sleep) अक्सर पुरुषों की तुलना में खराब होती है। छोटे बच्चों की देखभाल, नवजात शिशु को रात में दूध पिलाना, घर के काम या किसी परिजन की बीमारी के कारण महिलाओं की नींद रात में कई बार टूटती है। इस अधूरी या खंडित नींद (Fragmented Sleep) की भरपाई करने के लिए उनके शरीर को थोड़ी अतिरिक्त नींद की आवश्यकता होती है।

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