उत्तर प्रदेश

कौन हैं हरीश द्विवेदी? लोकसभा चुनाव में हार के बाद संगठन में छाए, अब बीजेपी ने दी राष्ट्रीय महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सांगठनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में नई टीम का ऐलान कर दिया है। इस नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उत्तर प्रदेश से कई दिग्गज चेहरों को शामिल किया गया है, जिसमें बस्ती लोकसभा सीट से दो बार सांसद रह चुके हरीश द्विवेदी का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। पार्टी ने उनके सांगठनिक अनुभव और निष्ठा को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को जमीन से जुड़े नेताओं को तरजीह देने के रूप में देखा जा रहा है।

एबीवीपी से की थी राजनीतिक सफर की शुरुआत

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के तेलियाजोत गांव के रहने वाले हरीश द्विवेदी का जन्म 22 अक्टूबर 1971 को एक संभ्रांत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती और उच्च शिक्षा गोरखपुर से ही पूरी हुई। साल 1998 में उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान (Political Science) में एमए की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव राष्ट्रवाद और समाजसेवा की ओर हो गया था, जिसके बाद उन्होंने साल 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने संगठन में विभिन्न पदों पर रहते हुए छात्र और युवा वर्ग के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई।

चुनावी झटकों के बाद पूरी तरह संगठन को समर्पित हुए हरीश

हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने साल 2012 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और साल 2014 तथा 2019 के आम चुनावों में बस्ती लोकसभा सीट से शानदार जीत दर्ज कर संसद पहुंचे। एक सांसद के रूप में उन्होंने संसद की ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति, कोयला मंत्रालय की सलाहकार समिति और वित्त संबंधी स्थायी समिति के सदस्य के रूप में भी सराहनीय सेवाएं दीं। हालांकि, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन हार से हताश होने के बजाय उन्होंने खुद को पूरी तरह से पार्टी संगठन के कार्यों में झोंक दिया।

असम के प्रभारी के रूप में निभाई थी अहम भूमिका

लोकसभा चुनाव 2024 में हार के बाद पार्टी संगठन ने उनकी कार्यक्षमता और निष्ठा को देखते हुए उन्हें पूर्वोत्तर के अहम राज्य असम का प्रभारी नियुक्त किया था। इसके अलावा वह पूर्व में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी सफलतापूर्वक निभा चुके हैं। पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और धरातल पर काम करने की उनकी शैली ने उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व के करीब ला खड़ा किया। अब राष्ट्रीय महासचिव जैसी बड़ी जिम्मेदारी मिलने के बाद पार्टी को उम्मीद है कि वह संगठन को और अधिक मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Back to top button