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क्या राहुल गांधी को बड़ा झटका देंगे CM विजय? राजीव गांधी के ड्रीम प्रोजेक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की तमिलनाडु सरकार को सख्त हिदाय

देश की सर्वोच्च अदालत में आज शिक्षा नीति और भाषाई विवाद को लेकर एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले पर तीखी कानूनी तकरार देखने को मिली। सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार 16 जुलाई 2026 को तमिलनाडु सरकार की उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई हो रही थी, जिसमें उसने मद्रास उच्च न्यायालय के हर जिले में नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidyalaya) स्थापित करने के ऐतिहासिक आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ के सामने जैसे ही यह मामला आया, कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह गरमा गया। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि जब सारा खर्च केंद्र सरकार उठाने को तैयार है, तो तमिलनाडु के मेधावी ग्रामीण छात्रों को इस अधिकार से क्यों वंचित रखा जा रहा है।

तमिलनाडु को क्यों रख रहे हैं वंचित? सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सख्त फटकार

सुनवाई की शुरुआत होते ही तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने मामले को फिलहाल टालने का अनुरोध किया और कोर्ट को एक आधिकारिक पत्र सौंपा। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने मौखिक टिप्पणी की, "आपके राज्य में नवोदय विद्यालय होने ही चाहिए। जब पूरा वित्तीय भार केंद्र सरकार वहन कर रही है और आपको सिर्फ आवश्यक जमीन उपलब्ध करानी है, तो आप अड़ंगा क्यों लगा रहे हैं? भारत के बाकी सभी राज्यों में ये स्कूल सफलतापूर्वक चल रहे हैं, फिर तमिलनाडु को इससे दूर क्यों रखा जा रहा है?" इस पर एएसजी ने दलील दी कि इस विषय पर उच्च स्तरीय बातचीत चल रही है, इसलिए सरकार अभी अंतिम बयान देने से बच रही है।

कोर्ट की नई TVK सरकार को दोटूक: केंद्र सरकार के स्कूलों को मत रोकें

नवोदय विद्यालय समिति के कानूनी प्रतिनिधि ने पीठ को बताया कि पिछले न्यायिक आदेश के तहत राज्य को 6 हफ्ते में जमीन आवंटित करनी थी, लेकिन अब वे 12 हफ्ते का अतिरिक्त समय मांग रहे हैं। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 तय करते हुए तमिलनाडु सरकार को निर्देश प्राप्त करने के लिए 3 सप्ताह की मोहलत दी। पीठ का नेतृत्व कर रही जस्टिस नागरत्ना ने तमिलनाडु के नए राजनीतिक समीकरणों का जिक्र करते हुए कहा, "हमें निर्देश लेने की अनुमति देनी होगी। अब वहां एक नई सरकार (तमिलगा वेत्री कड़गम – TVK) सत्ता में है। हमें अभी उनकी आधिकारिक शिक्षा नीति के बारे में जानकारी नहीं है। हो सकता है कि आपकी अपनी स्थानीय शिक्षा प्रणाली हो, लेकिन तमिलनाडु में केंद्र सरकार के उत्कृष्ट स्कूलों के प्रवेश को पूरी तरह न रोकें।"

40 साल पुराना विवाद: राजीव गांधी का ड्रीम प्रोजेक्ट और त्रि-भाषा नीति का विरोध

नवोदय विद्यालयों का इतिहास सीधे तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) से जुड़ा हुआ है। यह उनकी एक अति-महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत की छिपी हुई प्रतिभाओं को मुफ्त और उच्च स्तरीय आवासीय शिक्षा प्रदान करना था। पूरे देश ने इसे अपनाया, लेकिन तमिलनाडु पिछले 40 वर्षों से एकमात्र ऐसा राज्य बना हुआ है जहां एक भी नवोदय विद्यालय नहीं है। इसके पीछे का मुख्य कारण राज्य की पारंपरिक दो-भाषा नीति (तमिल और अंग्रेजी) है, जबकि नवोदय विद्यालय हिंदी सहित त्रि-भाषा प्रणाली (Three-Language Formula) को लागू करते हैं। सालों तक सूबे की सत्ता पर काबिज रहीं द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) सरकारों ने हिंदी विरोध के चलते इन स्कूलों को राज्य की सीमाओं में घुसने नहीं दिया।

राहुल गांधी की साख दांव पर: मुख्यमंत्री थलपति विजय का क्या होगा अगला कदम?

वर्तमान में तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। थलपति विजय के नेतृत्व वाली नई टीवीके (TVK) सरकार सत्ता में है, जिसे कांग्रेस पार्टी का सीधा और मजबूत समर्थन हासिल है, और कांग्रेस भी सरकार का हिस्सा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री विजय पुरानी लीक से हटकर हर जिले में नवोदय विद्यालय खोलने की अनुमति देते हैं, तो यह गांधी परिवार, विशेष रूप से राहुल गांधी के लिए एक बड़ी वैचारिक और भावनात्मक जीत होगी, क्योंकि तमिलनाडु की धरती पर उनके पिता का सपना सच हो जाएगा। इसके विपरीत, यदि मुख्यमंत्री विजय भी क्षेत्रीय दलों के पुराने रुख पर अड़े रहते हैं, तो यह गठबंधन में शामिल कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। अब 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

 

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