बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगेगा ताला! बिना माता-पिता की इजाजत नहीं खुलेगा खाता

डिजिटल युग में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभावों को देखते हुए भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक बड़ा और सख्त कदम उठाया जा रहा है। पाकिस्तान के सबसे बड़े और प्रभावशली पंजाब प्रांत की विधानसभा में एक ऐसा अभूतपूर्व प्रस्ताव पेश किया गया है, जो अगर कानून में बदलता है तो 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावकों की लिखित अनुमति के बिना किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना अकाउंट नहीं खोल पाएंगे। इस कदम के बाद अब पड़ोसी देश में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल लत को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।
इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक का मास्टरस्ट्रोक: सारा अहमद ने पेश किया देश का पहला अनोखा प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा में यह ऐतिहासिक और अपनी तरह का पहला अनूठा प्रस्ताव सत्तारूढ़ गठबंधन की प्रमुख सहयोगी पार्टी 'इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी' (IPP) की विधायक सारा अहमद द्वारा मंगलवार 14 जुलाई 2026 को पेश किया गया। सारा अहमद, जो पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो (Punjab Child Protection Bureau) की अध्यक्ष भी हैं, उन्होंने बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को पटल पर रखा। सारा अहमद ने प्रांतीय सरकार से न केवल अपने राज्य में इसे लागू करने की मांग की है, बल्कि प्रांतीय प्रशासन के जरिए देश की संघीय (केंद्र) सरकार से भी पूरे पाकिस्तान में बच्चों के लिए समान रूप से डिजिटल सुरक्षा कानून बनाने की पुरजोर सिफारिश की है।
क्यों पड़ी इस कड़े कानून की जरूरत? साइबर उत्पीड़न और डिजिटल एडिक्शन से बचाने की राज्य की नैतिक जिम्मेदारी
प्रस्ताव के मसौदे में इस बात को बेहद गंभीरता से रेखांकित किया गया है कि देश के बच्चों का शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास सुनिश्चित करना किसी भी कल्याणकारी राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। आधुनिक समय में सोशल मीडिया तक बच्चों की अनियंत्रित और अनियंत्रित पहुंच के कारण वे लगातार साइबर बुलिंग (Cyber Bullying), ऑनलाइन यौन शोषण, अनुचित एवं अश्लील सामग्री, भारी मानसिक तनाव, गंभीर अवसाद और खतरनाक डिजिटल एडिक्शन (Digital Addiction) का शिकार हो रहे हैं। इन बढ़ते खतरों को रोकने के लिए सिर्फ पारिवारिक समझ नहीं, बल्कि एक मजबूत और प्रभावी कानूनी संरक्षण चक्र की तत्काल आवश्यकता है।
पीटीए (PTA) से सख्त ऐज वेरिफिकेशन की मांग: सोशल मीडिया कंपनियों को लागू करना होगा कड़ा सुरक्षा तंत्र
इस नए कानून के प्रस्ताव में सिर्फ प्रतिबंध लगाने की बात नहीं की गई है, बल्कि इसे धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए एक तकनीकी ढांचा तैयार करने की भी मांग की गई है। प्रस्ताव के अनुसार, पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA – Pakistan Telecommunication Authority) को देश में संचालित होने वाले सभी वैश्विक सोशल मीडिया दिग्गजों (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और एक्स) के लिए एक बेहद प्रभावी और अनिवार्य ऐज वेरिफिकेशन सिस्टम (Age Verification System) लागू करना होगा। इस मजबूत तकनीकी फिल्टर के लागू होने के बाद ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई भी कम उम्र का बच्चा अपनी सही उम्र छुपाकर या फर्जी प्रोफाइल बनाकर इन प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल न कर सके।
वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा है बच्चों पर पहरा: ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ की तर्ज पर तैयारी
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आया यह प्रस्ताव किसी एक देश की सोच नहीं है, बल्कि वर्तमान में पूरी दुनिया की सरकारें बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार को लेकर बेहद गंभीर हो चुकी हैं। चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक शोधों में लगातार यह साबित हो रहा है कि अत्यधिक सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह बर्बाद कर रहा है। इसी के मद्देनजर हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (EU) के कई सदस्य देशों ने अपने यहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक बच्चों की पहुंच को सीमित करने के लिए सख्त आयु-आधारित प्रतिबंध और कानून लागू किए हैं। इसी राह पर चलते हुए अब पड़ोसी देश भी बच्चों के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए इस कड़े नियमन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।