गणतंत्र दिवस का सस्पेंस खत्म, मोदी सरकार ने भेज दिया न्योता, जानिए कौन होगा 26 जनवरी का वीवीआईपी मेहमान?

News India Live, Digital Desk: हर साल जैसे ही दिसंबर-जनवरी का महीना आता है, हम सभी भारतवासियों के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है “इस बार 26 जनवरी की परेड में मुख्य अतिथि (Chief Guest) कौन होगा?” दोस्तों, यह सवाल सिर्फ जिज्ञासा का नहीं, बल्कि गर्व का भी होता है। आखिर हमारे देश के सबसे बड़े पर्व पर दुनिया का कौन सा बड़ा नेता हमारे साथ खड़ा होगा, यह जानना हम सबका हक है।अगर आप भी इसी सस्पेंस में थे, तो आपके लिए एक पक्की खबर है। अब अटकलों का बाजार बंद हो गया है क्योंकि भारत सरकार केविदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने पर्दा हटा दिया है। और मजे की बात यह है कि खबर सिर्फ एक मेहमान की नहीं, बल्कि ‘दो’ बड़े आयोजनों के खास मेहमानों की है।विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या निकला?अक्सर सोशल मीडिया पर कई तरह के नाम चलते रहते हैं, लेकिन जो बात आधिकारिक हो, उसी पर भरोसा करना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने मीडिया के सामने आकर साफ-साफ बता दिया है कि जनवरी 2025 में भारत किन दो बड़े विदेशी मेहमानों की मेजबानी करने वाला है। यह जानकारी इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पता चलता है कि दुनिया में भारत की दोस्ती किसके साथ कितनी गहरी हो रही है।कौन हैं वो दो खास नाम?दरअसल, जनवरी में हमारे पास खुश होने के दो मौके होते हैं। एक तोप्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Divas – PBD) और दूसरा हमारा अपनागणतंत्र दिवस (Republic Day)। सरकार ने दोनों के लिए न्योता भेजा और मंजूरी भी मिल गई है।गणतंत्र दिवस के लिए: अगर रिपोर्ट्स की मानें और विदेश मंत्रालय के संकेत देखें, तो इस बार वियतनाम (Vietnam) या किसी बड़े आसियान (ASEAN) देश के प्रमुख के नाम पर मुहर लगने की बात कही जा रही है। हर साल की तरह, इस बार भी सरकार ने ऐसे देश को चुना है जो भारत की ‘लुक ईस्ट पॉलिसी’ (Look East Policy) के लिए बहुत मायने रखता है। मेहमान का चयन सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) को भी दिखाता है।प्रवासी भारतीय दिवस (PBD) के लिए: ओडिशा के भुवनेश्वर में होने वाले इस शानदार कार्यक्रम के लिए भी एक दिग्गज अंतरराष्ट्रीय नेता को मुख्य अतिथि बनाया गया है। यह वो नेता हैं जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हो सकती हैं या जिनका भारत से बहुत पुराना याराना है।ऐसा क्यों किया जाता है?शायद आप सोच रहे होंगे कि इतनी पहले ये नाम क्यों तय होते हैं? दरअसल, 26 जनवरी की परेड में किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का आना सिर्फ एक रस्म नहीं है। यह दुनिया को एक कड़ा संदेश होता है कि भारत के दोस्त कौन हैं। जैसे पिछले साल फ्रांस के राष्ट्रपति आए थे, उससे पहले मिस्र (Egypt) के राष्ट्रपति। हर मेहमान अपने साथ व्यापार, रक्षा सौदे और ढेर सारी उम्मीदें लेकर आता है।सस्पेंस अब भी थोड़ा बाकी!विदेश मंत्रालय ने “दो नामों” का जिक्र कर मीडिया की उत्सुकता शांत तो की है, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, डिप्लोमेसी में आखिरी वक्त तक कई चीजें बहुत नपे-तुले अंदाज में बाहर आती हैं। लेकिन इतना तय मानिए, आने वाले जनवरी में दिल्ली का कर्तव्य पथ और भुवनेश्वर का मंच, दोनों जगह भारत की धाक जमने वाली है।हम और आप बस इतना इंतज़ार कर सकते हैं कि कब वो दिन आए और हम टीवी पर उन शानदार झांकियों के साथ इन विदेशी मेहमानों को भारत की ताकत का गवाह बनते देखें। तो तैयार रहिए, जश्न की तैयारी शुरू हो चुकी है!