गाजीपुर की जहूराबाद सीट से इलेक्शन लड़ेंगे ओमप्रकाश राजभर, यूपी चुनाव की रणनीतियों को लेकर सुभासपा अध्यक्ष ने खोले अपने पत्ते

उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी आक्रामक बयानबाजी, बेबाक अंदाज और मजबूत जातीय समीकरणों के बल पर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले सुहेलबाद भारतीय समाज पार्टी यानी सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से अपने तरकश के तीर बाहर निकालने शुरू कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल तेज हो गई है क्योंकि ओमप्रकाश राजभर ने एक बड़ा और रणनीतिक ऐलान करते हुए यह साफ कर दिया है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में गाजीपुर जिले की बेहद हॉट और प्रतिष्ठापूर्ण मानी जाने वाली जहूराबाद विधानसभा सीट से ही चुनावी मैदान में उतरेंगे। उनके इस अचानक और स्पष्ट ऐलान के बाद से पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं और राजनीतिक विश्लेषक इस बात का आकलन करने में जुट गए हैं कि राजभर का यह दांव आने वाले चुनाव में कितना असरदार साबित होगा।
गाजीपुर की जहूराबाद सीट पर ओमप्रकाश राजभर की नजर
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में आने वाला गाजीपुर जिला हमेशा से राज्य की राजनीति का एक ऐसा केंद्र रहा है जहां की सीटें यह तय करती हैं कि लखनऊ की गद्दी पर कौन बैठेगा। जहूराबाद विधानसभा सीट सुभासपा के लिए एक तरह से उसका गढ़ मानी जाती है और पिछले चुनावों में भी यहां का राजनीतिक मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था। ओमप्रकाश राजभर ने एक बार फिर इसी सीट को अपनी कर्मभूमि और चुनावी रणक्षेत्र के रूप में चुनकर अपने विरोधियों को खुला संदेश दे दिया है कि वह अपनी पारंपरिक जमीन छोड़ने वाले नहीं हैं। जहूराबाद की इस सीट पर राजभर बिरादरी और अन्य पिछड़ी जातियों का एक बड़ा वोट बैंक है, जिसे ओमप्रकाश राजभर का सबसे मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है, और यही वजह है कि उन्होंने चुनाव से काफी पहले ही इस सीट से अपनी दावेदारी ठोककर मैदान में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी है।
यूपी चुनाव की तैयारियों को लेकर सुभासपा अध्यक्ष के खुले पत्ते
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी गोटी फिट करने में लगे हैं, लेकिन ओमप्रकाश राजभर ने जिस तरह से अपनी उम्मीदवारी और सीट का खुलासा किया है, उसने बाकी दलों को भी रणनीतिक बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। राजनीतिक बैठकों और जनसंपर्क अभियानों के दौरान राजभर लगातार यह दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी इस बार के चुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी न केवल जहूराबाद बल्कि पूर्वांचल की कई अन्य सीटों पर भी अपने मजबूत प्रत्याशी उतारेगी। राजभर की यह रणनीति इस बात की गवाही देती है कि वह चुनाव के वक्त किसी भी दल के साथ गठबंधन या अकेले उतरने की स्थिति में अपनी सौदेबाजी की ताकत को कम नहीं आंकना चाहते हैं और जमीन पर अपनी पकड़ को और अधिक पुख्ता करना चाहते हैं।
पूर्वांचल की सियासत और जातीय समीकरणों का खेल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्वांचल का इलाका हमेशा से जातियों के समीकरण और सामाजिक न्याय के नारों के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। ओमप्रकाश राजभर को इस क्षेत्र की नब्ज अच्छी तरह मालूम है और वह लगातार अति पिछड़ों, दलितों और वंचितों के अधिकारों की बात कहकर अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करते आए हैं। जहूराबाद सीट पर जीत हासिल करने के लिए केवल एक पार्टी का नाम काफी नहीं होता, बल्कि वहां स्थानीय समीकरण, व्यक्तिगत पकड़ और जमीनी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क बहुत मायने रखता है। राजभर का यह ऐलान कि वह इसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, उनके कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भर रहा है और विरोधी दलों के नेताओं के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है कि वे इस मजबूत किले को भेदने के लिए किस चेहरे और रणनीति के साथ मैदान में उतरेंगे।
विरोधियों की प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक हलचल
जैसे ही ओमप्रकाश राजभर द्वारा जहूराबाद सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा सार्वजनिक हुई, विपक्षी दलों की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर विरोधी दलों के नेताओं का कहना है कि जनता इस बार हवा-हवाई दावों में नहीं आने वाली है और विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाएगा। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि ओमप्रकाश राजभर अपने बयानों से हमेशा मीडिया की सुर्खियों में बने रहने की कला अच्छी तरह जानते हैं और चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले इस तरह के बयान देकर वह अपने समर्थकों को एकजुट करने में पूरी तरह कामयाब हो रहे हैं। आने वाले दिनों में गाजीपुर और जहूराबाद का यह सियासी रण और अधिक दिलचस्प होने वाला है क्योंकि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, दिग्गजों के बीच जुबानी जंग और तेज होगी।
जनता के बीच सुभासपा का प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां
ओमप्रकाश राजभर के लिए जहूराबाद की यह सीट केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि उनके राजनीतिक वजूद और प्रभाव की सबसे बड़ी परीक्षा है। पिछले कुछ वर्षों में उनके सियासी सफर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, कभी वह सत्ता के साथ गठबंधन में रहे तो कभी तीखे तेवर दिखाते हुए विपक्ष में नजर आए। ऐसे में जनता के बीच उनकी छवि को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि जमीन स्तर पर उनके कार्यकर्ताओं की फौज और उनकी भाषण शैली का असर मतदाताओं पर जरूर पड़ता है। अब देखना यह होगा कि जहूराबाद की जनता इस बार चुनाव में उनके इस खुले ऐलान पर क्या मुहर लगाती है और क्या राजभर एक बार फिर अपनी इस पारंपरिक सीट परचम लहराने में सफल हो पाते हैं या फिर विरोधियों का चक्रव्यूह उनके इस प्लान को फेल कर देता है।