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ग्लोबल पेमेंट्स की दुनिया में यूपीआई (UPI) का दबदबा: एनपीसीआई (NPCI) के नए मेगा प्लान को रफ्तार देंगे विदेश में बसे भारतीय (NRIs)

भारत की डिजिटल क्रांति की रीढ़ बन चुका 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस' (UPI) अब केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया के ग्लोबल पेमेंट्स मैप पर अपना दबदबा बना रहा है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की अंतरराष्ट्रीय शाखा NIPL (NPCI International Payments Limited) ने आने वाले समय में दुनिया भर के 15 से 20 विदेशी बाजारों में UPI का विस्तार करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। NPCI के इस ग्लोबल एक्सपेंशन में सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं विदेश में बसे भारतीय (Non-Resident Indians – NRIs) और भारतीय प्रवासी।

सिंगापुर (PayNow), यूएई (UAE), फ्रांस, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मलेशिया और कंबोडिया जैसे देशों के बाद अब जापान, बहरीन और ओमान जैसे नए बाजारों में UPI अपनी मजबूत धमक दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

विदेशों में एनआरआई (NRIs) कैसे दे रहे हैं यूपीआई को नई रफ्तार?

दुनिया भर में लगभग 3.5 करोड़ से अधिक प्रवासी भारतीय मौजूद हैं, जो भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाने के सबसे बड़े वाहक (Driver) बन रहे हैं। NPCI ने इस विशाल भारतीय समुदाय की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए कई नई सुविधाएं शुरू की हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय मोबाइल नंबर से UPI सुविधा: अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, मलेशिया और सऊदी अरब जैसे 12 से अधिक देशों में रहने वाले NRI अब अपने विदेशी मोबाइल नंबर को सीधे NRE/NRO बैंक खातों से जोड़कर भारत में बिना किसी परेशानी के UPI का इस्तेमाल कर पा रहे हैं।

  • सस्ता और तेज क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस: पारंपरिक वायर ट्रांसफर (SWIFT) और मनी ट्रांसफर एजेंटों की भारी फीस व समय के मुकाबले, UPI के जरिए विदेश से भारत पैसे भेजना (Cross-Border Remittances) बेहद तेज़, सुरक्षित और बहुत सस्ता हो गया है।

  • क्यूआर कोड (QR Code) मर्चेंट पेमेंट: यूएई, सिंगापुर, नेपाल और फ्रांस जैसे देशों में यात्रा करने वाले भारतीय पर्यटक और वहां रहने वाले प्रवासी भारतीय अब स्थानीय दुकानों और सुपरमार्केट में भारतीय करेंसी (INR) खाते का उपयोग करके सीधे QR कोड स्कैन करके भुगतान कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्यों बढ़ रही है UPI की मांग?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और वैश्विक वित्तीय संस्थाएं पहले ही स्वीकार कर चुकी हैं कि भारत का UPI लेनदेन की मात्रा (Volume) के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है।

NPCI केवल भारतीयों के लिए विदेशों में पेमेंट सुविधा ही नहीं दे रहा, बल्कि पेरू, नामीबिया, और त्रिनिदाद एंड टोबैगो जैसे देशों को उनका खुद का संप्रभु (Sovereign) डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में भी तकनीकी मदद दे रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय देशों के पेमेंट सिस्टम्स (जैसे सिंगापुर के PayNow और मलेशिया के DuitNow QR) को सीधे भारत के UPI से जोड़ने (Linkage) का काम तेजी से जारी है।

ग्लोबल इकोनॉमी और भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

विदेशों में UPI के बढ़ते दायरे से जहां एक तरफ प्रवासी भारतीयों के लिए भारत में अपने परिजनों को पैसे भेजना, यूटिलिटी बिल भरना और निवेश करना आसान हो गया है, वहीं दूसरी तरफ इससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और रेमिटेंस फ्लो (Remittance Inflow) को एक नया बल मिला है।

NPCI की यह रणनीति न केवल डॉलर पर पारंपरिक निर्भरता को चुनौती दे रही है, बल्कि दुनिया में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव (Geo-Economic Soft Power) को एक नया आयाम दे रही है।

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