चीनी की अधिकतम कीमत पर लग सकती है कैपिंग! थोक में ₹500 तक गिरे दाम, सरकारी दखल और सप्लाई एक्शन से शेयर 10% तक उछले: जानिए पूरी इनसाइड स्टोरी

आगामी त्योहारी सीजन से पहले चीनी की खुदरा और थोक कीमतों में आए अचानक उछाल को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बहुस्तरीय नीतिगत कदम उठाने की तैयारी तेज कर दी है। बाजार सूत्रों और नीतिगत गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, घरेलू बाजार में अनुचित मुनाफाखोरी रोकने के लिए चीनी की अधिकतम बिक्री कीमत पर सांकेतिक या प्रत्यक्ष कैपिंग (Price Capping) लगाने और मिलों के मासिक रिलीज कोटे (Monthly Release Quota) में समायोजन पर विचार किया जा रहा है। इस बीच, सरकार द्वारा जमाखोरी पर लगाम लगाने के लिए थोक उपभोक्ताओं की स्टॉक लिमिट घटाने और 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात (TRQ) की अनुमति से थोक मंडियों में रिकॉर्ड स्तरों से ₹400 से ₹500 प्रति क्विंटल तक का सुधार देखने को मिला है। दूसरी ओर, मिलों के मजबूत रियलाइजेशन और त्योहारी मांग के दम पर शेयर बाजार में चीनी कंपनियों के शेयर 10% से 13% तक उछल गए हैं।
कीमतों को थामने के लिए सरकार के 3 बड़े नीतिगत फैसले
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई व फूड प्रोसेसिंग उद्योग में बढ़ने वाली मांग को ध्यान में रखते हुए आक्रामक कदम उठाए हैं:
-
1. स्टॉक लिमिट में 50% की कटौती: 1 सितंबर से 30 नवंबर तक प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक खपत करने वाले बड़े औद्योगिक और संस्थागत खरीदारों (जैसे बेवरेज, कन्फेक्शनरी और स्वीटमेकर्स) के लिए अधिकतम इन्वेंट्री रखने की सीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है।
-
2. ड्यूटी-फ्री रॉ शुगर इंपोर्ट (TRQ): अंतरराष्ट्रीय बाजारों से कच्ची चीनी आयात कर उसे स्थानीय रिफाइनरियों में प्रोसेस कर तुरंत घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए टैरिफ रेट कोटा के तहत शून्य आयात शुल्क की व्यवस्था लागू की गई है।
-
3. अर्ली क्रशिंग सीजन: उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलों को 2026-27 पेराई सत्र 10 से 15 दिन पहले (अक्टूबर की शुरुआत में) चालू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बाजार में नई चीनी की आवक समय से शुरू हो सके।
थोक मंडियों में उतार-चढ़ाव: ₹5,800 के रिकॉर्ड हाई से फिसले भाव
अगस्त के दौरान दिल्ली, मुजफ्फरनगर, कानपुर और कोलकाता की थोक मंडियों में चीनी के भाव ₹5,800 से ₹6,000 प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गए थे, जिसके कारण खुदरा बाजार में चीनी ₹58 से ₹65 प्रति किलो तक बिकने लगी थी।
सरकार की कड़ी निगरानी और 15-दिवसीय स्टॉक लिमिट के नियम के बाद सट्टेबाजी और अनावश्यक जमाखोरी पर लगाम लगी है। थोक कारोबारियों द्वारा अतिरिक्त स्टॉक खाली करने से प्रमुख उत्तर भारतीय मंडियों में प्रति क्विंटल दामों में ₹300 से ₹500 की नरमी दर्ज की गई है, जिससे खुदरा कीमतों में भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
शेयर बाजार में क्यों आई चीनी कंपनियों में 10% तक की तेजी?
कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ाव और सरकारी नियमों के बीच दलाल स्ट्रीट पर शुगर स्टॉक्स में निवेशकों की जोरदार लिवाली देखी गई है:
-
बलरामपुर चीनी मिल्स (Balrampur Chini): 10% से 13% की इंट्राडे तेजी के साथ नए स्तरों पर कारोबार।
-
बजाज हिंदुस्तान शुगर (Bajaj Hindusthan Sugar): 8.7% से 9.3% का उछाल।
-
द्वारिकेश शुगर (Dwarikesh Sugar): 6.5% से 12.6% तक की मजबूत बढ़त।
-
श्री रेणुका शुगर्स, मवाना शुगर्स और त्रिवेणी इंजीनियरिंग: 5% से 10% के दायरे में मजबूती।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पिछले पेराई सत्र में कम उत्पादन, एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) के लिए फीडस्टॉक के डायवर्जन और त्योहारी सीजन में मजबूत मांग के चलते मिलों को मिलने वाले एक्स-फैक्ट्री रेट्स (Ex-Mill Price Realisations) काफी मजबूत बने हुए हैं। भले ही सरकार कीमतों पर कैपिंग या निगरानी लगाए, लेकिन मिलों का मार्जिन और कैश फ्लो चालू तिमाही में बेहतर रहने की उम्मीद है, जिससे शुगर सेक्टर पर निवेशकों का भरोसा कायम है।