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भारत की आर्थिक ताकत की गूँज चार सप्ताह बाद फिर $700 बिलियन के पार पहुँचा विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रिजर्व में भी उछाल

News India Live, Digital Desk: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार एक बार फिर 700 बिलियन डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। चार हफ्तों की लगातार गिरावट और उतार-चढ़ाव के बाद, भारत ने यह उपलब्धि हासिल की है, जो वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय बाज़ार की मजबूती को दर्शाता है।एक हफ्ते में $3.83 बिलियन की बड़ी छलांगरिज़र्व बैंक के साप्ताहिक आंकड़ों के मुताबिक, 10 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.825 बिलियन डॉलर बढ़कर 700.946 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पिछले सप्ताह (3 अप्रैल) यह 697.121 बिलियन डॉलर था। गौरतलब है कि फरवरी के अंत में यह भंडार 728.494 बिलियन डॉलर के ऑल-टाइम हाई पर था, लेकिन मिडिल-ईस्ट संकट और रुपये की गिरावट को थामने के लिए RBI द्वारा डॉलर की बिक्री के कारण इसमें पिछले कुछ हफ्तों से कमी देखी जा रही थी।विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) और सोने का जादूभंडार में इस भारी बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा संपत्तियों और गोल्ड रिजर्व का अहम योगदान रहा है:FCA में वृद्धि: भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा यानी फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) 3.127 बिलियन डॉलर बढ़कर 555.983 बिलियन डॉलर हो गया है।चमकता सोना: अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतों में आए उछाल का असर भारत के खजाने पर भी दिखा। गोल्ड रिजर्व का मूल्य 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।SDR और IMF के पास सुरक्षित निवेश भी बढ़ाविशेष आहरण अधिकार (SDR): अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे SDR में भी 56 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जो अब 18.763 बिलियन डॉलर है।IMF रिजर्व: आईएमएफ के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 41 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.857 बिलियन डॉलर हो गई है।क्यों महत्वपूर्ण है यह $700 बिलियन का आंकड़ा?वैश्विक स्तर पर चीन, जापान और स्विट्जरलैंड के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। आर्थिक जानकारों के अनुसार:रुपये को मजबूती: मजबूत भंडार RBI को मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप करने और रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने की शक्ति देता है।बाहरी झटकों से सुरक्षा: मिडिल-ईस्ट में ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच यह भंडार भारत के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ (Cushion) की तरह काम करता है।निवेशकों का भरोसा: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय बाज़ार में भरोसा बना रहता है, जिससे शेयर बाज़ार को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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