‘टॉक्सिक’ के तूफान में सिनेमाघरों से बाहर होने वाली थी ‘हनुमान अंश’: प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने बयां किया 350 से 25 स्क्रीन्स पर सिमटने का पूरा दर्द

साल 2026 के भारतीय सिनेमाई परिदृश्य में जहां बड़े बजट की मेगा-कैनवास और पैन-इंडिया फिल्मों का दबदबा माना जा रहा था, वहीं निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की स्लीपर हिट 'हनुमान अंश' (Hanuman Ansh) ने सभी व्यावसायिक पूर्वानुमानों को पूरी तरह ध्वस्त करते हुए इस साल की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों की फेहरिस्त में शीर्ष स्थान बना लिया है। 7 अगस्त को बिना किसी भारी-भरकम पीआर कैंपेन के सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह माइथोलॉजिकल ड्रामा फिल्म आज अपने प्रदर्शन के 40 से अधिक दिन पूरे कर लेने के बाद भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टिकट खिड़की पर अभूतपूर्व पकड़ बनाए हुए है। हालांकि, सफलता की इस चमचमाती कहानी के पीछे एक ऐसा खौफनाक दौर भी छिपा था जब फिल्म सिनेमाई नक्शे से पूरी तरह गायब होने के कगार पर पहुंच चुकी थी। हाल ही में एक एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान फिल्म की मुख्य निर्माता रागिनी सोना ने उस दौर के खौफनाक सच से पर्दा उठाया है जब कन्नड़ सुपरस्टार यश की मेगा-बजट फिल्म 'टॉक्सिक' (Toxic) की दस्तक के चलते 'हनुमान अंश' के शोज को लगभग हर मल्टीप्लेक्स से हटाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी।
350 से सीधे 25 थिएटरों पर सिमटा दायरा: जब दो बड़ी रिलीज ने छीनी 'हनुमान अंश' की सांसें
फिल्म के शुरुआती रिलीज संघर्ष को याद करते हुए रागिनी सोना ने बताया कि फिल्म की शुरुआत बॉक्स ऑफिस पर काफी साधारण रही थी। पहले हफ्ते में फिल्म को देशभर के करीब 350 थिएटरों में सम्मानजनक प्रदर्शन के लिए रिलीज किया गया था और दर्शक धीरे-धीरे सिनेमाघरों की तरफ बढ़ रहे थे। लेकिन असली संकट दूसरे हफ्ते में तब खड़ा हुआ जब बॉलीवुड और रीजनल सर्किट में दो बहुप्रतीक्षित फिल्में—'आवारापन 2' और 'बंटवारा 1947'—सिनेमाघरों में रिलीज हुईं। इन नई रिलीज के दबाव के कारण एग्जीबिटर्स और मल्टीप्लेक्स चेन ने आनन-फानन में 'हनुमान अंश' के शोज काट दिए और फिल्म रातों-रात 350 स्क्रीन्स से गिरकर महज 25 से 30 थिएटरों के संकरे दायरे में सिमट गई। किसी भी नई फिल्म के लिए 90 प्रतिशत से ज्यादा स्क्रीन्स का अचानक छिन जाना बॉक्स ऑफिस पर मौत के फरमान जैसा था, लेकिन चमत्कार यह हुआ कि सीमित 25 थिएटरों में भी फिल्म का ऑक्यूपेंसी रेट 95 प्रतिशत से ऊपर बना रहा और इसका रोजाना का नेट बिजनेस गिरने के बजाय और मजबूत होता चला गया।
आधी रात का वो फैसला: जब डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी प्रमोशन के लिए सड़कों पर उतरने को हुए तैयार
थिएटरों की संख्या में आई इस भारी गिरावट ने निर्माण टीम के भीतर गहरा मानसिक तनाव पैदा कर दिया था। रागिनी सोना ने बेहद भावुक होते हुए खुलासा किया कि हालात इतने प्रतिकूल हो चुके थे कि निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने हार मानने के बजाय सीधे जमीन पर उतरने का फैसला कर लिया था। विशाल ने अपनी कोर टीम के साथ एक वैन में बैठकर राज्यों के छोटे कस्बों और शहरों के सिनेमाघरों तक रोड ट्रिप करने का संकल्प लिया ताकि वे खुद जाकर लोगों से जुड़ सकें। रागिनी के अनुसार, उस वक्त वे काफी भावुक हो गईं और उन्होंने विशाल को रोकने की कोशिश की क्योंकि फिल्म कानूनी और लॉजिस्टिकल रूप से लगभग सिनेमाघरों से हटाई जा चुकी थी। उसी रात शो बंद होने से चंद घंटे पहले प्रोड्यूसर और डायरेक्टर ने अपनी पूरी जमापूंजी दांव पर लगाते हुए डिस्ट्रीब्यूटर्स से आखिरी मिन्नत की। काफी मान-मनौव्वल और अतिरिक्त शो-होल्डिंग गारंटी देने के बाद वितरक एक और हफ्ते का जोखिम उठाने को राजी हुए, जिसके बाद फिल्म के स्क्रीन्स को दोबारा बढ़ाया गया और यहीं से बॉक्स ऑफिस के इतिहास का नया अध्याय शुरू हुआ।
26 अगस्त को यश की 'टॉक्सिक' की दस्तक: क्या छोटे बजट की फिल्म को कुचलने वाला था तूफ़ान?
जैसे ही 'हनुमान अंश' ने अपने तीसरे हफ्ते में वापसी की सांस ली, उसके सामने भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा तूफान खड़ा था। 26 अगस्त को सुपरस्टार यश की भारी-भरकम पैन-इंडिया एक्शन थ्रिलर 'टॉक्सिक' सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी। ट्रेड पंडित मान रहे थे कि यश की फिल्म आते ही बाकी सभी मौजूदा फिल्मों के प्रिंट्स पूरी तरह उतार दिए जाएंगे और 'हनुमान अंश' का खेल वहीं खत्म हो जाएगा। रागिनी सोना ने इस पर खुलकर बात करते हुए कहा कि उनकी टीम को बिल्कुल भी भरोसा नहीं था कि 'टॉक्सिक' के आने के बाद उन्हें सिंगल स्क्रीन तो दूर, मल्टीप्लेक्स की आखिरी कतार में भी कोई शो मिल पाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मेकर्स ने कभी भी 'टॉक्सिक' के फ्लॉप होने की कल्पना नहीं की थी क्योंकि एक बड़ी फिल्म के चलने से पूरे फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन इकोसिस्टम को नया जीवन मिलता है। लेकिन जब दर्शकों ने 'टॉक्सिक' की भारी-भरकम स्टारकास्ट के मुकाबले 'हनुमान अंश' के सधे हुए कंटेंट, इमोशनल डेप्थ और रूटेड कहानी को प्राथमिकता देना शुरू किया, तो सिनेमाघर मालिकों ने आनन-फानन में दोबारा शो बदलकर 'हनुमान अंश' को प्राइम-टाइम स्लॉट सौंपना शुरू कर दिया।
'टॉक्सिक बनाम हनुमान अंश' की तुलना पर निर्माता का रुख: 'हमने एक दिन टिकने की उम्मीद भी नहीं की थी'
इंडस्ट्री में बने इस अप्रत्याशित मुकाबले पर निर्माता रागिनी ने साफ शब्दों में कहा कि 'टॉक्सिक' बनाम 'हनुमान अंश' की यह जंग दरअसल सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों द्वारा गढ़ी गई थी। वे व्यक्तिगत रूप से यश की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और उनकी दिली तमन्ना थी कि दोनों ही फिल्में समानांतर रूप से चलें। रागिनी ने स्वीकार किया कि उनके मन में इतना बड़ा अहंकार कभी नहीं था कि वे यश जैसी वैश्विक शख्सियत के सामने एक दिन भी टिक पाएंगे। उनका मानना था कि अगर वे 'टॉक्सिक' के समानांतर अपनी लागत निकाल लें और ठीक-ठाक दर्शक जुटा लें तो यह उनके लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा। लेकिन जनता जनार्दन के फैसले ने सब कुछ उलट दिया, जहां भारी प्रचार वाली 'टॉक्सिक' को दर्शकों की बेरुखी झेलनी पड़ी, वहीं सादगी और आध्यात्मिक पुट से सजी 'हनुमान अंश' ने जनआंदोलन का रूप ले लिया।
बॉक्स ऑफिस पर 315 करोड़ का महा-कलेक्शन: शुद्ध मुनाफे के मामले में बनी साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर
आंकड़ों की बात करें तो 'हनुमान अंश' का बॉक्स ऑफिस सफरनामा किसी परिकथा से कम साबित नहीं हुआ है। सीमित बजट में तैयार की गई इस फिल्म ने भारत में अब तक 250 करोड़ रुपये का जादुई नेट कलेक्शन हासिल कर लिया है, जबकि इसका ग्रॉस घरेलू कारोबार 290 करोड़ के पार पहुंच चुका है। वहीं ओवरसीज मार्केट में भी भारतीय प्रवासियों के मजबूत वर्ड-ऑफ-माउथ के चलते फिल्म ने वैश्विक स्तर पर 315 करोड़ रुपये से अधिक की धमाकेदार कमाई दर्ज कर ली है। अपने रिलीज के 40 दिनों बाद भी फिल्म की कमाई का यह सिलसिला जारी है, जो यह साबित करता है कि अगर कहानी में दम हो और दर्शकों की भावनाओं से सीधा जुड़ाव हो, तो कोई भी बड़ा स्टारडम या थिएटरों की कृत्रिम कमी किसी फिल्म की असली उड़ान को रोक नहीं सकती।