ट्रंप के आने से पहले ही ईरान ने खींची लकीर, वॉशिंगटन को भेजा ऐसा सख्त संदेश की दुनिया हैरान

News India Live, Digital Desk: लेकिन अब मामला थोड़ा और गंभीर हो गया है। ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian), जिन्हें दुनिया एक उदारवादी (मॉडरेट) नेता मानती थी, उन्होंने अब अमेरिका को बेहद सख्त लफ्जों में चेतावनी दे डाली है।सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) का समर्थन पाकर राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अमेरिका को साफ कर दिया है कि “धमकी और दबाव की भाषा अब नहीं चलेगी।”क्या कहा है ईरान के राष्ट्रपति ने?सीधे शब्दों में कहें तो ईरान ने अमेरिका को आईना दिखा दिया है। पेजेशकियान ने कहा है कि अगर अमेरिका को लगता है कि वो प्रतिबंध (Sanctions) लगाकर या “मैक्सिमम प्रेशर” वाली पॉलिसी अपनाकर ईरान को घुटनों पर ला देगा, तो यह उसकी बहुत बड़ी गलतफहमी है।उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका जितना दबाव बढ़ाएगा, ईरान उतना ही अपने परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को तेज करेगा। हाल ही में ईरान ने नई और एडवांस सेंट्रीफ्यूज मशीनें लगाने की बात कही है, जो यह इशारा करती है कि ईरान अब परमाणु ताकत बनने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।ट्रंप की वापसी और ईरान का डर?जानकारों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में डोनल्ड ट्रंप फिर से सत्ता में लौट रहे हैं। ट्रंप हमेशा से ईरान के खिलाफ सख्त रहे हैं। ऐसे में ईरान पहले ही यह सन्देश देना चाहता है कि “हम तैयार हैं।”पेजेशकियान ने यह भी कहा कि ईरान कभी बातचीत से पीछे नहीं हटा, लेकिन वो बातचीत ‘सम्मान’ के साथ होनी चाहिए, ‘डर’ के साये में नहीं। उनका कहना है कि अमेरिका ने जब-जब समझौते तोड़े हैं, ईरान ने अपनी ताकत बढ़ाई है।खामेनेई का फैक्टरइस पूरी कहानी में सबसे अहम रोल अयातुल्ला खामेनेई का है। राष्ट्रपति जो भी कह रहे हैं, उसके पीछे सुप्रीम लीडर की ही रजामंदी है। खामेनेई पहले ही कह चुके हैं कि पश्चिम (Western Countries) पर भरोसा करना गलती होगी। अब उनके राष्ट्रपति भी उसी रास्ते पर चलते दिख रहे हैं।कुल मिलाकर बात यह है कि मिडल ईस्ट में शांति के आसार अभी दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे। अमेरिका अपनी जिद्द पर अड़ा है और ईरान अपने “स्वाभिमान” और “परमाणु शक्ति” को छोड़ने को तैयार नहीं। आने वाले दिनों में यह तनाव क्या रूप लेता है, यह देखना वाकई डराने वाला हो सकता है।