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ट्रंप के एक फैसले से इजराइल में मची खलबली! नेतन्याहू ने ईरान को दी खुली चेतावनी

वैश्विक कूटनीति और मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के भू-राजनीतिक समीकरणों में इस समय एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मोड़ आया है, जिसने पूरी दुनिया के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए प्रमुख शिया मुस्लिम देश ईरान के साथ सुलह और बातचीत का रास्ता साफ कर दिया है। ट्रंप के इस अप्रत्याशित फैसले ने अमेरिका के सबसे भरोसेमंद और पारंपरिक सहयोगी देश इजरायल के भीतर गहरी हलचल पैदा कर दी है। इस नए घटनाक्रम के बाद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बेहद मुश्किल रणनीतिक स्थिति में फंसते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बहुत बड़ा और कड़ा बयान जारी किया है।

ट्रंप और ईरान की कूटनीतिक नजदीकियों से क्यों चौंक उठी दुनिया

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर हमेशा से बेहद कड़ा रुख रहा है, लेकिन अपने ताजा कार्यकाल में उन्होंने सबको हैरान करते हुए तेहरान के साथ सीधे कूटनीतिक रिश्ते सुधारने और बातचीत की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप मिडिल ईस्ट में जारी लंबे युद्ध को समाप्त करने और एक नया वैश्विक शांति समझौता स्थापित करने के उद्देश्य से यह नीति अपना रहे हैं। इस सुलह के प्रयास का सीधा मतलब यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई दशकों से चली आ रही आर्थिक और सैन्य तल्खी अब कम हो सकती है, जो वैश्विक बाजार और कच्चे तेल की आपूर्ति के लिहाज से एक बड़ी खबर है।

नेताओं के बीच समझौते से इजराइल में क्यों बढ़ गया तनाव

अमेरिका के इस बदले हुए रुख से यरुशलम (इजरायल) के सत्ता गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई है। इजरायल हमेशा से ईरान को अपने अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह स्थिति बेहद असहज करने वाली है, क्योंकि इजरायल को उम्मीद थी कि अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध और सैन्य दबाव और ज्यादा बढ़ाएगा। लेकिन ट्रंप के इस समझौते वाले रुख ने नेतन्याहू को कूटनीतिक मोर्चे पर अलग-थलग पड़ने के संकट में डाल दिया है। यही वजह है कि इजरायली सुरक्षा कैबिनेट और वहां के सैन्य नेतृत्व के बीच अब नए सुरक्षा रोडमैप को लेकर आपातकालीन बैठकें शुरू हो गई हैं।

ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे: नेतन्याहू का हुंकार

बदलते हालातों के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बिना देर किए दुनिया को अपना कड़ा संदेश दे दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर तेहरान और वाशिंगटन को सचेत करते हुए कहा कि चाहे वैश्विक परिस्थितियां कुछ भी हों या कोई भी देश किसी के साथ समझौता करे, इजरायल अपनी सुरक्षा से रत्ती भर भी समझौता नहीं करेगा। नेतन्याहू ने पुरजोर शब्दों में दोहराया कि इजरायल किसी भी कीमत पर और कभी भी ईरान को परमाणु बम (Nuclear Weapon) विकसित नहीं करने देगा। उन्होंने साफ किया कि अगर जरूरत पड़ी, तो इजरायल ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने के लिए अकेले ही सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

मिडिल ईस्ट और वैश्विक राजनीति पर क्या होगा इसका असर

इस बड़े घटनाक्रम का असर केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रहने वाला है। अमेरिका-ईरान सुलह के इस प्रयास से पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे सुन्नी बहुल खाड़ी देश भी इस कूटनीतिक बदलाव पर बहुत पैनी नजर रखे हुए हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप और ईरान के बीच बातचीत सफल रहती है, तो क्षेत्र में हिजबुल्लाह और हमास जैसे उग्रवादी संगठनों को मिलने वाले समर्थन पर भी लगाम लग सकती है। हालांकि, इजरायल का आक्रामक रुख इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह शांत होना इतना आसान नहीं है।

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